भारत देश में कई ऐतिहासिक किले मौजूद हैं, जिनकी अपनी अलग ही खासियत और इतिहास है। इनमें से एक किला ऐसा है, जो महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित है। अरब सागर के बीच बना मुरुद जंजीरा किला अपने अनोखे इतिहास के लिए जाना जाता है। यह भारत का एकमात्र ऐसा किला है, जिसे सैकड़ों वर्षों के इतिहास में कोई भी राजा या साम्राज्य युद्ध के मैदान में कभी भी जीत नहीं पाया। चाहे छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना हो या फिर ब्रिटिश सेनाएं, हर किसी ने इसको फतह करने की कोशिश तो की, लेकिन सभी नाकाम रहे। चारों ओर से समुद्र की लहरों से घिरा यह किला इतिहास के पन्नों में अमर है। आइए जानते हैं जंजीरा किले के बारे में विस्तार से।

मुरुद जंजीरा किले का निर्माण और रहस्यमयी बनावट

जंजीरा किले का निर्माण 15वीं सदी से जुड़ा हुआ है। इस किले को सबसे पहले स्थानीय कोली मछुआरों ने लकड़ी और मिट्टी की बाड़ (मेढ़बंदी) से तैयार किया था। इसे बनाने की मुख्य वजह समुद्री डाकुओं से अपनी रक्षा करना था। हालांकि बाद में अहमदनगर सल्तनत के सिद्दी सेनापतियों ने इस पर अपना कब्जा कर लिया, जिसके बाद यहां पत्थरों का एक बड़ा और मजबूत किला बनवाया गया।  

रहस्यमयी है मुरुद जंजीरा का मुख्य द्वार

इस किले का निर्माण बहुत ही अनोखे तरीके से किया गया था, ताकि दुश्मन की सेना भ्रमित हो सके। मुरुद जंजीरा का मुख्य द्वार किले की दीवारों के बीच इस तरह बनाया गया था कि वह छिपा रहे। इस दरवाजे को दुश्मन समुद्र में कई किलोमीटर दूर से भी नहीं देख पाते थे। जब तक दुश्मन किले के करीब आते थे, तब तक किले के सैनिक आसानी से हमलावरों को अपना निशाना बना लेते थे। 

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खारे समुद्र के बीच मीठे पानी के दो विशाल कुएं

इस किले की एक और अनोखी खासियत यह है कि यह चारों तरफ से अरब सागर के खारे पानी से घिरा हुआ है, फिर भी किले के अंदर दो बड़े और गहरे तालाब मौजूद हैं। इन दोनों तालाबों में पीने लायक मीठा पानी रहता है। इसके अलावा किले की सुरक्षा के लिए मजबूत बुर्ज बनवाए गए थे, जिन पर 500 से भी ज्यादा तोपें तैनात थीं। ये तोपें कई किलोमीटर दूर तक आसानी से निशाना साध लेती थीं। इस किले की दीवारें करीब 40 फीट ऊंची थीं, जिस वजह से भी दुश्मन हमले की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे।

मुरुद जंजीरा किले तक कैसे पहुंचें?

अगर आप भी महाराष्ट्र के कोंकण तट पर बसे मुरुद जंजीरा किले को देखने जाना चाहती हैं, तो यहां तक पहुंचने के लिए आसान रास्ते दिए गए हैं:

किले तक पहुंचने का एकमात्र जरिया बोट है। मुरुद गांव के पास स्थित राजपुरी घाट से किले के लिए नावें और मोटर बोट्स मिलती हैं, जो 15 से 20 मिनट में आपको किले तक पहुंचा देंगी। यहां तक जाने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन रोहा और पनवेल हैं। बात करें एयरपोर्ट की, तो सबसे नजदीकी हवाई अड्डा छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, मुंबई है। 

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मुरुद जंजीरा किला अपनी इन्हीं खासियतों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यह किला आज भी अरब सागर के बीचों-बीच सीना ताने खड़ा है। ऐसे में अगर आपको ऐतिहासिक विरासतें देखना पसंद है, तो आप मुरुद जंजीरा किला देखने की योजना बना सकती हैं। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।  

Image Credit: magnific