Sat Sep 12, 2026 | Updated 01:03 AM IST

राजा-महाराजाओं के महलों में क्यों बनाए जाते थे छोटे-छोटे झरोखे? जानें वजह

क्या आपने कभी सोचा है कि प्राचीन काल में राजा-महाराजा अपने महलों में ये झरोखे क्यों बनवाते थे? अगर नहीं तो आज इस लेख में हम आपको इसकी जानकारी देंगे। आइए जानते हैं इसके बारे में।
Updated:- 2026-08-05, 21:03 IST
Jharokha architecture

अक्सर जब हम किसी ट्रिप या छुट्टियों पर घूमने जाते हैं, तो वहां के ऐतिहासिक किलों और भव्य महलों का दीदार जरूर करते हैं। चाहे राजस्थान के आलीशान महल हों या फिर मध्य प्रदेश के शांत और भव्य किले। इनकी बनावट हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है।

आपने इन पुराने महलों की दीवारों और कमरों में एक खास चीज जरूर देखी होगी। वो हैं बारीक नक्काशी वाले छोटे-छोटे झरोखे, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि राजा-महाराजा महलों में ये झरोखे क्यों बनवाते थे? अगर आप भी इतिहास और पुरानी इमारतों की शौकीन हैं, तो यह लेख आपके लिए बेहद खास है। आइए जानते हैं इन झरोखों के पीछे की बेहद दिलचस्प वजह। 

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ठंडा रखने का अनोखा तरीका

राजा-महाराजाओं के दौर में आज की तरह बिजली या एयर कंडीशनर जैसी सुविधाएं नहीं हुआ करती थीं। ऐसे में गर्मी से बचाव और महलों को अंदर से ठंडा रखने के लिए पुराने समय में महलों में छोटे-छोटे झरोखे डिजाइन किए जाते थे ताकि बाहर की ठंडी हवा अंदर आ सके और अंदर की गर्म हवा बाहर निकल जाए। झरोखों से छनकर आने वाली हवा महल के अंदर तापमान को भी काफी हद तक नार्मल कर देती थी।  

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निगरानी और हमले से बचाव की रणनीति

झरोखे बनाने की दूसरी और सबसे खास वजह थी महल की सुरक्षा। ये झरोखे आकार में छोटे और बारीक जालीदार डिजाइन वाले बनाए जाते थे। ताकि झरोखे के अंदर खड़ा कोई भी सैनिक या राजा बाहर की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर रख सके। इसकी एक और खासियत थी कि बाहर खड़ा कोई भी व्यक्ति या दुश्मन यह नहीं देख पाता था कि झरोखे के पीछे कौन खड़ा है या अंदर क्या चल रहा है।

बाहर की दुनिया देखने का जरिया

उस दौर में राजघरानों की महिलाओं और रानियों के लिए पर्दा प्रथा का सख्ती से पालन किया जाता था। रानियां और राजकन्याएं आम जनता के सामने या खुले में नहीं आती थीं। ऐसे में नगर में निकलने वाली सवारी, कार्यक्रम या सेना का स्वागत देखने के लिए पुराने समय में रानियां इन्हीं झरोखों का सहारा लेती थीं।   

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किलों में नजर आने वाले ये खूबसूरत झरोखे सिर्फ महल की भव्यता बढ़ाने के लिए नहीं थे, बल्कि इनके पीछे हमारे पूर्वजों का कमाल का विज्ञान, सुरक्षा रणनीति और सामाजिक व्यवस्था छुपी हुई थी। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से। 

Image Credit :   magnific

FAQ
क्या झरोखों से सुरक्षा और किलेबंदी में मदद मिलती थी?
हां, सैनिकों को छिपकर दुश्मनों पर नजर रखने में आसानी होती थी।
झरोखों पर बारीक नक्काशी और जालियां क्यों लगाई जाती थीं?
खूबसूरती बढ़ाने और बाहर से अंदर का दृश्य छिपाने के लिए।
क्या झरोखे भारतीय वास्तुकला की विशेष पहचान हैं?
हां, खासकर राजपूत और मुगल कालीन महलों में ये खूब देखने को मिलते हैं।
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