भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं लोगों को हैरान कर देती हैं। ऐसा ही एक अनोखा मंदिर केरल में मौजूद है, जहां भगवान शिव का शिवलिंग साल के 364 दिन पानी में डूबा रहता है। यहां की सबसे खास बात यह है कि महाशिवरात्रि के दिन मंदिर से पानी बाहर निकाला जाता है और तभी भक्तों को शिवलिंग के दर्शन हो पाते हैं। भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त स्वरूप को समर्पित यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के चलते काफी खास है।

क्यों खास है श्री अर्धनारीश्वर मंदिर?

सोचिए, आप किसी मंदिर में दर्शन करने जाएं और वहां भगवान का शिवलिंग पानी के अंदर हो। आपको उसके दर्शन के लिए पूरे साल इंतजार करना पड़े और सिर्फ एक खास दिन ही शिवलिंग दिखाई दे। सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन केरल में ऐसा एक मंदिर है। यहां सालभर शिवलिंग पानी में डूबा रहता है। महाशिवरात्रि के दिन पानी निकालने के बाद श्रद्धालु इसके दर्शन कर पाते हैं। आइए जानते हैं इस मंदिर की खास परंपरा और यहां पहुंचने का रास्ता।

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कहां स्थित है यह अनोखा शिव मंदिर?

केरल के मलप्पुरम जिले के अरक्कुपरम्बा (Arakkuparamba) गांव में श्री अर्धनारीश्वर मंदिर स्थित है। यह पेरिंथलमन्ना (Perinthalmanna) शहर से करीब 17 किमी। दूर है। मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त स्वरूप अर्धनारीश्वर की पूजा की जाती है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां स्थापित शिवलिंग है, जो साल के 364 दिन पानी के अंदर रहता है। महाशिवरात्रि के दिन मंदिर से पानी बाहर निकाला जाता है। इसके बाद श्रद्धालुओं को शिवलिंग के प्रत्यक्ष दर्शन करने का अवसर मिलता है। मंदिर तक पहुंचने वाला रास्ता भी पानी से घिरा रहता है, जो इसे और खास बनाता है।

क्यों खास है भगवान अर्धनारीश्वर का स्वरूप?

अर्धनारीश्वर भगवान शिव और माता पार्वती का संयुक्त स्वरूप है। इसमें शरीर का आधा हिस्सा भगवान शिव और आधा हिस्सा माता पार्वती का माना जाता है। यह स्वरूप स्त्री और पुरुष शक्ति के समान महत्व और एक-दूसरे के पूरक होने का संदेश देता है। इस मंदिर में श्रद्धालु खासतौर पर शादी में आ रही बाधाओं को दूर करने और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना लेकर पहुंचते हैं। यहां विवाह से जुड़ी मनोकामनाओं के लिए उमा महेश्वर पूजा भी कराई जाती है। इसके अलावा 'पट्टुम थालियुम समरप्पणम' नाम का विशेष अनुष्ठान भी होता है। श्रद्धालु इसे सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से करते हैं।

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मंदिर में कब और कौन से त्योहार मनाए जाते हैं?

इस मंदिर में दिसंबर या जनवरी के दौरान पांच दिनों का वार्षिक उत्सव मनाया जाता है। इसकी शुरुआत ध्वजारोहण से होती है और समापन थिरु अरट्टू अनुष्ठान के साथ होता है। इसके अलावा जून या जुलाई में भी विशेष धार्मिक आयोजन किया जाता है। इस दौरान 1008 कलश जलाभिषेक होता है। इसमें 1008 कलशों के जल से भगवान का अभिषेक किया जाता है। मंदिर में 1008 कुडम जलाभिषेक का आयोजन भी होता है।

मंदिर खुलने का समय

अगर आप इस मंदिर में दर्शन करने की योजना बना रहे हैं तो यहां पहुंचने का समय नोट कर लें।

सुबह: 6 बजे से 9:30 बजे तक।
शाम: 4 बजे से 7 बजे तक।

मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए दोपहर में मुफ्त भोजन की व्यवस्था भी की जाती है। हालांकि, महाशिवरात्रि पर विशेष दर्शन के लिए जाने से पहले मंदिर प्रशासन से समय और व्यवस्था की जानकारी जरूर ले लें।

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कैसे पहुंचें श्री अर्धनारीश्वर मंदिर?

केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित इस मंदिर तक हवाई, रेल और सड़क तीनों रास्तों से पहुंचा जा सकता है।

हवाई मार्ग: मंदिर का नजदीकी प्रमुख एयरपोर्ट कालीकट अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। यह मंदिर से करीब 40-50 किलोमीटर दूर है। एयरपोर्ट से टैक्सी लेकर पेरिंथलमन्ना होते हुए मंदिर पहुंच सकते हैं।

रेल मार्ग: ट्रेन से जाने वाले श्रद्धालु अंगडीपुरम रेलवे स्टेशन तक पहुंच सकते हैं। यहां से मंदिर की दूरी तय करने के लिए टैक्सी, ऑटो या स्थानीय बस ले सकते हैं।

सड़क मार्ग: पेरिंथलमन्ना से मंदिर करीब 17 किलोमीटर दूर है। यहां से स्थानीय बस या टैक्सी के जरिए अरक्कुपरम्बा पहुंचा जा सकता है।

अगर आप केरल जा रहे हैं तो सिर्फ घूमने के लिए नहीं, बल्कि शिव-पार्वती के इस संयुक्त स्वरूप के दर्शन और वैवाहिक जीवन की सुख-शांति की कामना के लिए इस मंदिर में जरूर जाइए। बस एक बात याद रखिए, महाशिवरात्रि पर भीड़ बहुत होती है, इसलिए पहले से टाइमिंग और व्यवस्था कंफर्म करके ही जाएं। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।