नए कपड़े पहनने से पहले क्यों धोने चाहिए? एक्सपर्ट से जानिए कारण

शॉपिंग मॉल्स में कपड़े खरीदने से पहले हम ट्रायल जरूर करते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि इसका त्वचा पर कितना नुकसान हो सकता है। मॉल्स में एक ही कपड़े कई लोग शरीर पर ट्राई करते हैं, ऐसे में स्वच्छता और सुरक्षा दोनों ही खतरे में पड़ जाती हैं। दरअसल, कंपनियां कपड़ों को चमकदार बनाने के लिए फॉर्मेल्डिहाइड जैसे केमिकल्स और सिंथेटिक डाई का उपयोग करती हैं, इनसे कपड़े सिकुड़ते भी नहीं हैं। ये रसायन जैसे ही त्वचा के संपर्क में आते हैं, वैसे ही प्रतिक्रिया देने लगते हैं। कई बार समस्या इतनी बढ़ जाती है कि पित्ती (त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली) तक हो सकती है।
धूल और बैक्टीरिया की परत
नया कपड़ा फैक्ट्री, गोदाम, ट्रांसपोर्ट और दुकान से होकर उपभोक्ता तक पहुंचता है। इस दौरान उस पर धूल और बैक्टीरिया की परत जम जाती है। यही नहीं, लंबे समय तक कपड़े बंद पैकेट में पड़े रहने की वजह से इनमें फफूंद तक लग सकती है, जिसकी वजह से फंगल इंफेक्शन और स्किन एलर्जी जैसी समस्या पैदा हो सकती है।

बच्चे और संवेदनशील त्वचा वालों को हो सकते हैं नुकसान
बच्चों की त्वचा नाजुक होने के कारण उन्हें नरम और साफ कपड़े ही पहनाए जाते हैं। वरना उनकी त्वचा पर बहुत जल्दी खुजली शुरू हो जाती है। वहीं, संवेदनशील त्वचा वालों को भी इन चीजों से बहुत सावधान रहने की जरूरत है, वरना थोड़ी सी लापरवाही से उनकी स्किन पर कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। गर्दन, गले, कमर और बगलों में रिएक्शन की संभावनाएं अधिक रहती हैं।
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नुकसानदायक केमिकल फार्मेल्डिहाइड
स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ रोविरा आई वर्गिलि में साल 2022 में शिशुओं के 120 पीस कपड़ों पर शोध हुआ। उस शोध में 20 प्रतिशत कपड़ों में फार्मेल्डिहाइड प्राप्त हुआ। शोधकर्ता ने कहा कि भले ही कपड़ों को ऑर्गेनिक का टैग लगाकर बेचा जाता है, लेकिन अधिकांश कपड़ों में अतिरिक्त रंग, परफ्यूम आदि मिले रहते हैं, जो बच्चों की त्वचा के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।

क्यों धोने चाहिए कपड़े
नए कपड़ों को धोने से उसकी गंध, जहरीले तत्व, धूल और अतिरिक्त रंग साफ हो जाते हैं। हां, कुछ सख्त केमिकल होते हैं जो शायद एक या दो बार धोने से नहीं जाते हैं, लेकिन जब उन्हें मशीन या ड्राई क्लीन में धोया जाता है तब वे जिद्दी केमिकल काफी हद तक चले जाते हैं।
दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के त्वचा विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार मीणा बताते हैं कि नए कपड़ों में बैक्टीरिया, केमिकल्स, और एजो-एनिलिन जैसे रंग मौजूद हो सकते हैं। ये तत्व त्वचा में जलन और खुजली पैदा कर सकते हैं। जो आगे जाकर एलर्जी कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस जैसी समस्या का रूप ले सकती है। डेनिम जैसे गहरे रंग के कपड़ों में अधिक डाई होने के कारण त्वचा को ज्यादा नुकसान होता है। इसलिए नए कपड़े पहनने से पहले धोने की सलाह दी जाती है।
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लेखक: सुमन अग्रवाल
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