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1724 में क्यों बनवाया गया था दिल्ली का जंतर-मंतर? विज्ञान का चमत्कार है इसका रहस्‍य

दिल्ली का जंतर-मंतर 300 साल पहले आकाश में मौजूद सूर्य, चंद्रमा, ग्रहों और तारों की सही स्थिति जानने के लिए बनवाया था। आइए जानते हैं कि आखिर जंतर-मंतर में कौन-कौन से खास यंत्र हैं।
Updated:- 2026-07-21, 16:21 IST
jantar mantar history

द‍िल्‍ली का जंतर-मंतर लगातर चर्चा में बना हुआ है। हाल के दि‍नों में यहां बड़े प्रदर्शन और धरनों की वजह से यह जगह लगातार सुर्खियों में रही। यहां अभी भी प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है। बता दें क‍ि नीट पेपर लीक के विरोध और एजुकेशन सिस्टम में सुधार की मांग को लेकर यहां प‍िछले एक महीने से प्रोटेस्‍ट हो रहा है। आज भी 15 से 20 हजार लोगों की भीड़ है, लेक‍िन बहुत कम लोग जानते हैं क‍ि आज जि‍स जगह को लोग व‍िरोध-प्रदर्शन के ल‍िए पहचानते हैं, उसका असली मकसद कुछ और था।

करीब 300 साल पहले इसे न तो धरना न देने के ल‍िए बनाया गया था और न ही क‍िसी राजनीत‍िक गत‍िव‍िध‍ि के ल‍िए। 1724 में महाराजा सवाई जय स‍िंह द्व‍ितीय ने इसे आकाश में मौजूद सूर्य, चंद्रमा, ग्रहों और तारों की सही स्‍थ‍ित‍ि जानने के ल‍िए बनवाया था। उस समय यह अपने दौर का बहुत ही मॉडर्न साइंट‍िफ‍िक सेंटर हुआ करता था। यहां के बड़े यंत्र बिना बिजली और मशीन के समय बताते थे। साथ ही आकाश और तारों के बारे में हिसाब-किताब लगाने में मदद करते थे। आइए इसके बारे में जानते हैं सब कुछ-

आखिर जंतर-मंतर बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?

जंतर-मंतर को 1724 में जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने बनवाया था। उन्हें एस्ट्रोनॉमी में खास रुच‍ि थी। उस समय इस्तेमाल होने वाले छोटे औजारों से सही हिसाब लगाना मुश्किल होता था। इसीलिए उन्होंने बड़े-बड़े यंत्र (मशीनें) बनवाए ताकि बिल्कुल सही जानकारी मिल सके। जंतर-मंतर नाम भी इसी काम से जुड़ा है। इसमें जंतर का मतलब है मशीन या औजार और मंतर का मतलब है हिसाब-किताब या फॉर्मूला। यानी जंतर-मंतर एक ऐसी जगह है, जहां मशीनों की मदद से ग्रहों और तारों का हिसाब लगाया जाता था।

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दिल्ली का जंतर-मंतर था पांच वेधशालाओं में सबसे पहला?

दिल्ली का जंतर-मंतर राजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा बनवाई गई 5 वेधशालाओं (Observatory) में सबसे पहला था। इसके बाद उन्होंने जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में भी ऐसी ही जगहें बनवाईं। इन सभी को बनाने का मकसद एक ही था क‍ि सूरज, चांद और तारों की चाल को समझना और सही समय व मौसम का सटीक हिसाब लगाना। इनमें से जयपुर का जंतर-मंतर सबसे बड़ा है।

raja sawai jai singh

नंगी आंखों से होता था आकाश का अध्ययन

आज हमारे पास टेलीस्कोप और कंप्यूटर हैं, लेकिन 18वीं शताब्दी में ऐसा कुछ नहीं था। उस समय एस्‍ट्रोनॉमी साइंट‍िस्‍ट नंगी आंखों से ग्रहों और तारों की स्थिति का अध्ययन करते थे। दिल्ली के जंतर-मंतर में बने बड़े-बड़े यंत्र इसी काम के लिए तैयार किए गए थे। यहां बने 13 यंत्र सूरज, चांद और ग्रहों की जगह देखने और उनके बारे में सही हिसाब-किताब लगाने में मदद करते थे।

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सम्राट यंत्र: विशाल सूर्य घड़ी

जंतर-मंतर का सबसे प्रसिद्ध यंत्र सम्राट यंत्र है। यह एक बड़ी सी सूर्य घड़ी (संडायल) है। इसे पृथ्वी की धुरी के समान बनाया गया है। जब सूर्य की रोशनी इस पर पड़ती है तो उसकी छाया देखकर समय का पता लगाया जाता था। अपने समय में यह काफी सटीक माना जाता था।

राम यंत्र का क्या काम था?

जंतर-मंतर में दो बड़े गोलाकार खुले ढांचे बने हुए हैं, जिन्हें राम यंत्र कहा जाता है। इनका इस्‍तेमाल आसमान में द‍िखाई देने वाले ग्रहों और तारों की ऊंचाई और उनकी स्थिति मापने के लिए किया जाता था।

जय प्रकाश यंत्र क्यों है खास?

जंतर-मंतर का 'जय प्रकाश यंत्र' बहुत खास है। इसे कटोरी (आधे गोले) जैसे दो बड़े ड‍िजाइन में बनाया गया है। इसकी मदद से आसमान में तारों और ग्रहों की सही जगह पता की जाती थी।

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मिश्र यंत्र का था य‍ह काम

जंतर-मंतर का एक और खास यंत्र है, ज‍िसे मिश्र यंत्र कहा जाता है। यह पांच अलग-अलग यंत्रों का मिला-जुला ही रूप है। इसकी मदद से साल के सबसे लंबे और सबसे छोटे दिन की जानकारी ली जाती थी।

ईंट, पत्थर और चूने से बने हैं ये विशाल यंत्र

आपको बता दें क‍ि जंतर-मंतर के ज्यादातर यंत्र ईंट, पत्थर और मलबे से बनाए गए हैं। इनके ऊपर चूने का प्लास्टर किया गया है। समय के साथ इनकी मरम्मत भी की जाती रही है ताकि ये सुरक्ष‍ित रहें।

jantar mantar history (1)

आज पहले जैसी सटीक गणना क्यों नहीं हो पाती?

जब जंतर-मंतर बनाया गया था तब इसके आसपास खुला इलाका था। कोई बड़ी ब‍िल्‍ड‍िंग नहीं थीं। ऐसे में इससे सूरज और आसमान साफ दिखाई देते थे, लेकिन अब इसके चारों तरफ ऊंची-ऊंची ब‍िल्‍ड‍िंग्‍स बन गईं हैं। इसी वजह से पहले जैसी सटीक जानकारी हासि‍ल करना संभव नहीं है।

वैज्ञानिकों के साथ आर्किटेक्ट भी करते हैं इसकी तारीफ

वैज्ञानिकों के साथ-साथ इमारतें बनाने वाले (आर्किटेक्ट) भी इसकी तारीफ करते हैं। जंतर-मंतर सिर्फ साइंस के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी बेहतरीन बनावट के लिए भी जाना जाता है। इसके बड़े-बड़े यंत्र और इसका शेप दुनिया भर के डिजाइनरों, इतिहासकारों और कला के जानकारों को बहुत पसंद आते हैं। यही वजह है कि इसे भारत की सबसे खास और अनोखी ऐतिहासिक जगहों में गिना जाता है।

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अब तो आप जान ही गईं होंगी क‍ि आज जहां इतने समय से धरना प्रदर्शन चल रहा है, वो जगह कभी आकाश, सूर्य, ग्रहों और तारों की गणना का काम करी थी। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Source-
https://artsandculture.google.com/story/innovations-in-architectural-astronomy-the-jantar-mantar-observatory-incredibleindia/bAUhUiZGvdm5Lw?hl=en
https://delhitourism.gov.in/tourist_place/jantar_mantar.html

Image Credit- Incredible india/delhi tourism

FAQ
दि‍ल्‍ली का जंतर-मंतर कब बना था?
1724 में द‍िल्‍ली का जंतर मंतर बनाया गया था।
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