हर साल करवा चौथ पर चांद देरी से क्यों निकलता है? जानिए इसके पीछे का कारण
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हर साल की तरह इस साल भी करवा चौथ का त्योहार बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। अधिकतर शादीशुदा महिलाओं को इस व्रत का पूरे साल बेसब्री से इंतजार रहता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए पूरा दिन निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चंद्रमा की पूजा करने के बाद ही अपना व्रत खोलती हैं। आपने एक चीज जरूर नोटिस की होगी कि करवा चौथ वाले दिन चंद्रमा रोज के मुकाबले काफी देर से दिखाई देता है। आखिर ऐसा क्यों होता है? अगर आपके मन में भी यह सवाल है, तो आइए इस लेख में इसके पीछे के कारणों को जानते हैं।
चंद्रमा के देर से निकलने के पीछे का खगोलीय कारण
चंद्रमा के देर से निकलने के पीछे कोई चमत्कार नहीं, बल्कि इसके पीछे एक वैज्ञानिक और खगोलीय कारण छिपा हुआ है। करवा चौथ का त्योहार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है, जो पूर्णिमा के ठीक चार दिन बाद आता है। पूर्णिमा वाले दिन चंद्रमा ठीक सूर्यास्त के समय यानी लगभग शाम 6:00 बजे उदित होता है।
पृथ्वी की गति और चंद्रमा की परिक्रमा है कारण
पूर्णिमा के बाद जैसे-जैसे कृष्ण पक्ष की तिथियां आगे बढ़ती हैं, पृथ्वी की गति और चंद्रमा की परिक्रमा के कारण चंद्रमा के निकलने का समय रोज लगभग 50 मिनट खिसक जाता है। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है और पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है। इस वजह से पृथ्वी के एक ही स्थान से देखने पर चंद्रमा हर दिन पिछले दिन के मुकाबले लगभग 50 मिनट देरी से उदित होता है। चूंकि करवा चौथ पूर्णिमा के 4 दिन बाद पड़ता है, इसलिए इस दिन चंद्रमा के निकलने का समय खिसक कर रात के 8:00 से 9:00 बजे के बीच आ जाता है।
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लट्टीट्यूड एंड लोंगिट्यूड का असर
गेओग्राफिकल लोकेशन भी चांद दिखने के समय को प्रभावित करती है। जी हां कृष्ण पक्ष में चंद्रमा का आकार घटने लगता है। चतुर्थी तिथि तक आते-आते चंद्रमा का केवल एक छोटा हिस्सा ही रोशनी में रहता है, जिससे रोशनी कम होने पर वह धुंधला और देर से दिखाई देता है।
भारत के अलग-अलग शहरों के लट्टीट्यूड एंड लोंगिट्यूड भी अलग-अलग होते हैं। इस कारण से चन्द्रमा पूर्वी राज्यों में चांद थोड़ा जल्दी दिखाई देता है, जबकि उत्तर और पश्चिम भारत में चांद थोड़ी और देर से नजर आता है।
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निष्कर्ष:करवा चौथ के दिन अक्सर महिलाएं चांद का इंतजार करती रहती हैं। इस दिन चांद रोज के मुकाबले कुछ देरी से निकलता है। ऐसा इसीलिए क्योंकि पूर्णिमा के बाद तिथियों के क्रम में चंद्रमा का हर दिन 50 मिनट पीछे खिसकना ही इसकी सबसे बड़ी और मुख्य वजह होती है। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।
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- क्या पूर्णिमा के बाद रोज चांद देर से निकलता है?
- जी हां, पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष में चंद्रमा रोजाना लगभग 48 से 50 मिनट की देरी से उदित होता है, जो खगोलीय गति का एक स्वाभाविक नियम है।
- अलग-अलग शहरों में करवा चौथ का चांद अलग समय पर क्यों दिखता है?
- पृथ्वी के गोल आकार और अलग-अलग शहरों की भौगोलिक स्थिति के कारण पूर्वी हिस्से वाले शहरों में चंद्रोदय पहले होता है और पश्चिमी हिस्सों में थोड़ा बाद में।
- अगर करवा चौथ की रात बादल छाए रहें और चांद न दिखे तो क्या करें?
- यदि खराब मौसम या बादलों की वजह से चांद प्रत्यक्ष न दिखे, तो पंचांग में दिए गए चंद्रोदय के समय के अनुसार भगवान शिव और चंद्रदेव का ध्यान करके, दीपक जलाकर अर्घ्य दिया जा सकता है।
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