Fri Sep 11, 2026 | Updated 08:15 PM IST

Gen Z फोन कॉल से क्यों बचती है? जानिए इसकी असली वजह

एक समय ऐसा था जब लोग टेक्स्ट करने के बजाय फोन कॉल पर बात करना ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसे में आज हम आपको इस लेख में जेन-जी के ऐसे व्यवहार के बारे में बताएंगे, जो आपको हैरान कर सकता है।
Updated:- 2026-07-16, 08:54 IST
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जिन लोगों का जन्म 1997 से लेकर 2012 के बीच में हुआ है, वे सभी लोग जेन-जी कैटेगरी में आते हैं। ऐसे लोगों का स्वभाव मिलेनियल्स से बिल्कुल अलग होता है। जेन-जी की कुछ ऐसी बातें होती हैं, जिन्हें जानकर आप हैरान हो जाएंगे। ऐसे में कुछ जेन-जी ऐसे पाए गए हैं, जो फोन की रिंगटोन सुनते ही चिढ़ जाते हैं। वे फोन उठाने के बजाय या तो उसे साइलेंट कर देते हैं या फिर फोन काट देते हैं। यह बात आपको बेहद हैरान कर सकती है, लेकिन यह व्यवहार अधिकतर जेन-जी में देखा गया है। आइए जानते हैं कि आज की युवा पीढ़ी फोन कॉल्स से इतना दूर क्यों होती जा रही है।

फोन कॉल से ज्यादा टेक्सटिंग है पसंद

जेनरेशन जेड जितना सोशल मीडिया इस्तेमाल करती है, या यूं कहें कि जितना टेक्सटिंग, मैसेज पर एक्टिव रहती है, उतना ही वे फोन कॉल पर बात करने से हिचकिचाती है। जेन-जी को टेक्स्ट मैसेज करना बहुत पसंद आता है, लेकिन किसी से लंबे समय तक फोन पर बात करना उनके लिए परेशानी बनता जा रहा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि ग्लोबल रिसर्च फर्म YouGov के हालिया सर्वे में इस बात का जिक्र किया गया है, कि 65% जेन-जी लोग किसी अनजान अजनबी या कुछ ऐसे लोगों के फोन कॉल को रिसीव नहीं करते हैं।

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बातचीत के बजाय टेक्स्ट और ईमेल को प्रायोरिटी

पुरानी पीढ़ी के कुछ लोग जहां टेक्स्ट करने से कतराते थे और सीधा फोन कॉल पर बात करते थे, वहीं अब इसका बिल्कुल उल्टा हो रहा है। जेन-जी अब फोन कॉल पर बात करने के बजाय टेक्स्ट मैसेज, चैटिंग या ईमेल को प्रायोरिटी दे रही है। हालांकि, जेन-जी का फोन कॉल्स से बचना कोई बदतमीजी नहीं है। यह डिजिटल युग का असर हो सकता है। उन्हें लंबे समय तक किसी से बात करने के बजाय टाइपिंग करना और टेक्स्ट मैसेज को इमोजी के साथ भेजना ज्यादा सही लगता है। 

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फ्लो को तोड़ सकता है

इसका एक और कारण हो सकता है, कि अचानक आने वाला काम उनके आराम या फ्लो को तोड़ सकता है। इसलिए, उन्हें बातचीत शुरू करने से पहले एक मैसेज के जरिए पूछना सही लगता है। टेक्स्ट मैसेजिंग में युवाओं को सोचने और जवाब देने का समय मिल जाता है, वहीं कॉल पर बातचीत में कोई गलती होने का डर बना रहता है।

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इस आर्टिकल में शामिल सभी आंकड़े और जानकारियां वैश्विक रिसर्च एजेंसी 'YouGov' की रिपोर्ट से लिए गए हैं। ये विचार और निष्कर्ष रिसर्च एजेंसी के हैं, 'हरजिंदगी' इसकी पुष्टि या समर्थन नहीं करता है।

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Image Credit :  magnific  

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