Fri Sep 18, 2026 | Updated 11:28 PM IST

गांव और शहर के नाम के पीछे क्यों होता है गंज, क्या पता है आपको इसके पीछे का कारण?

हमारे आस-पास के शहर-गांव और कस्बे के कई बार ऐसे नाम सुनाई पड़ते हैं, जिसे सुनने के बाद हम अपनी हंसी नहीं रोक पाते हैं और सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि यह कैसा नाम है? लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सिटी, मार्केट या फिर अन्य जगहों के नाम के पीछे गंज क्यों होता है? अगर नहीं, तो यह लेख इस जानकारी के बारे में लिखा गया है। नीचे जानिए-
Updated:- 2026-06-24, 17:20 IST
What is the meaning of Ganj in city name

हमारे आस-पास के गांव, कस्बे और शहर हैं, जिनके नाम के पीछे गंज जुड़ा होता है, लेकिन अगर इसके पीछे का कारण पूछा जाए, तो बहुत से कम लोग हैं, जिन्हें इसकी जानकारी होगी। क्या आपको इसके पीछे की वजह पता हो। हो सकता है कि शायद नहीं। अगर इन जगहों के नाम के बारे में जानें तो जैसे दिल्ली का दरियागंज, बिहार का किशनगंज या उत्तर प्रदेश का नवाबगंज। अब ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों है? हमारे देश में जगहों के नाम सिर्फ पहचान के लिए नहीं रखे गए, बल्कि उनके पीछे एक इतिहास, भूगोल और संस्कृति छुपी होती है। किसी नाम के पीछे 'पुर' और 'गंज' लगाने की खास वजहें थीं। आज के इस आर्टिकल में हम आपको इसके पीछे की वजह के बारे में बताने जा रहे हैं कि गंज शब्द कहां से आया।

गंज शब्द का मतलब

What is the meaning of Ganj in city name

'गंज' शब्द फारसी भाषा से आया है। प्राचीन फारसी में गंज का मतलब खजाना, कोष या गोदाम होता था। इसका मतलब वह जगह जहां कीमती चीजें या अनाज इकट्ठा करके सुरक्षित रखा जाता था। समय के साथ जब भारत में मुगल काल और नवाबों का दौर आया, तो इस शब्द का इस्तेमाल बड़े बाजारों, व्यापारिक केंद्रों और मंडियों के लिए होने लगा। धीरे-धीरे गंज का मतलब एक ऐसा व्यस्त और गतिशील बाजार बन गया जहां अनाज, सब्जियां या अन्य जरूरत का सामान थोक में बिकता था।

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नाम के पीछे गंज लगाने का कारण

पुराने समय में जब किसी राजा, नवाब या जमींदार को अपनी रियासत में व्यापार को बढ़ावा देना होता था, तो वे एक बड़ा बाजार या मंडी बसाते थे। उस बाजार के आसपास धीरे-धीरे लोग आकर बस जाते थे और वह पूरा इलाका एक गांव या शहर बन जाता था क्योंकि उस जगह की पहचान उस बड़े बाजार (गंज) से ही होती थी, इसलिए उस जगह के नाम के पीछे गंज जोड़ दिया जाता था। यह नाम भी दो कारणों पर जुड़ा था।

What is the difference between Ganj and pur

पहला- कई बार बाजार बसाने वाले राजा, नवाब या किसी मशहूर व्यक्ति के नाम के आगे गंज लगा दिया जाता था। आसान भाषा में समझें मुरादाबाद या नवाबगंज ये नवाब द्वारा बसाया गया बाजार, किशनगंज या रामगंज जैसे नाम स्थानीय शासकों या रसूखदार लोगों से जुड़े हैं।

दूसरा- कई बार उस जगह की बनावट या वहां होने वाले व्यापार के तरीके पर भी नाम रख दिया जाता था। जैसे दिल्ली का मशहूर दरियागंज। पुराने समय में यह बाजार यमुना नदी के किनारे लगा करता था, इसलिए इसका नाम दरियागंज पड़ गया। इसी तरह जहां पहाड़ों के बीच बाजार होता था, उसे गंजडुंडवारा या पहाड़ी इलाकों से जुड़े नाम दे दिए जाते थे।

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Image Credit- Freepik, Shutterstock

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