क्या आपने कभी सोचा किसने बनाया 9-टू-5 जॉब और रोज स्कूल जाने का सिस्टम?

क्या आपने कभी सोचा है कि हम सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक ऑफिस और रोज स्कूल जाने के इस सिस्टम में कैसे फंस गए? आज के समय यह रूटीन हमारी जिंदगी का ऐसा हिस्सा बन चुका है, जिस पर हम शायद ही कभी सवाल उठाते हैं। सुबह जल्दी उठना, ट्रैफिक से जूझना, तय समय पर काम करना और फिर अगले दिन फिर से वही सब दोहराना यह सब मॉडर्न लाइफ की एक सामान्य आदत बन चुकी है। मगर क्या आप जानती हैं कि यह सिस्टम किसने और क्यों डिजाइन किया था। अगर नहीं, तो नीचे लेख में पढ़ें इसके पीछे की वजह।
स्कूल जाने के सिस्टम की शुरुआत कब और क्यों हुई?
आज हम जिस स्कूल जाने के सिस्टम को देखते हैं, वह मुख्य रूप से इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन के दौरान हुआ था। इससे पहले आम लोग खेतों में काम करते थे या घर पर पारंपरिक हुनर सीखते थे, जहां समय की कोई ऐसी पाबंदी नहीं हुआ करती थी। जब फैक्ट्रियां और कारखाने खुले, तो मालिकों को ऐसे कामगारों की जरूरत पड़ी जो समय के पाबंद हों, अनुशासित हों, निर्देशों को आसानी से समझ सकें और एक तय समय तक लगातार काम कर सकें।
इस जरूरत को पूरा करने के लिए एक ऐसा एजुकेशन सिस्टम तैयार किया गया जो बच्चों को घंटों एक जगह बैठकर चुपचाप सुनना, घंटी बजने पर क्लास बदलना और लाइन में चलना सिखाए। यानी स्कूल असल में एक तरह की फैक्ट्री के मजदूरों को तैयार करने की शुरुआती ट्रेनिंग की तरह बनाए गए थे।
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9-से-5 जॉब कल्चर का इतिहास
स्कूल सिस्टम की तरह, 9-से-5 की नौकरी का इतिहास भी कारखानों और लेबर यूनियनों से जुड़ा हुआ है। औद्योगिक क्रांति के शुरुआती दिनों में मजदूरों से दिन में 10 से 16 घंटे तक काम लिया जाता था, जो इंसानी शरीर को थका देने वाला था। इसके खिलाफ यूनाइटेड स्टेट्स और यूरोप में मजदूरों ने कड़ा संघर्ष किया। सबसे पहले कारखाने के मालिक और उद्योगपति रॉबर्ट ओवेन ने 1817 में 8 घंटे काम, 8 घंटे मनोरंजन और 8 घंटे आराम का नारा दिया था।
लंबी लड़ाई और आंदोलनों के बाद, साल 1926 में हेनरी फोर्ड (Henry Ford) ने अपनी ऑटोमोबाइल कंपनियों में हफ्ते में 5 दिन और रोज 8 घंटे यानी सुबह 9 से शाम 5 बजे तक काम करने का नियम लागू किया। उन्होंने पाया कि लगातार काम करने से कर्मचारियों की क्षमता कम होती है, इसलिए आराम और काम का संतुलन होना जरूरी है। साल 1938 में अमेरिकी सरकार ने फेयर लेबर स्टैंडर्ड्स एक्ट के जरिए इसे कानूनी रूप दे दिया और धीरे-धीरे पूरी दुनिया ने इसी मॉडल को अपना लिया।
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अगर आपने अभी तक इस सिस्टम पर गौर नहीं किया था और यह कहती थी कि इसे किसने बनाया, तो यकीनन आपको इस सवाल का जवाब मिल गया होगा। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Image Credit- Magnific
content source- हेनरी फोर्ड की नीति (1926), फेयर लेबर स्टैंडर्ड्स एक्ट, 1938
- स्कूलों में घंटी बजने का नियम क्यों शुरू हुआ?
- बच्चों को फैक्ट्रियों में शिफ्ट बदलने के समय और अनुशासन के लिए तैयार के लिए यह नियम बना था।
- 9-to-5 से पहले लोग एक दिन में कितने घंटे काम करते थे?
- औद्योगिक क्रांति के दौरान लोग रोजाना 12 से 16 घंटे तक काम करते थे।
- अमेरिका में अनिवार्य शिक्षा का जनक किसे माना जाता है?
- अमेरिका में अनिवार्य शिक्षा का जनक हॉरेस मान को आधुनिक अमेरिकी स्कूली शिक्षा का पिता कहा जाता है।
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