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दुनिया के सबसे पुराने स्कूलों में शामिल है भारतीय गुरुकुल, जानिए इससे जुड़ी ये अनोखी बातें

हमारे देश में शिक्षा को एक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है और दुनिया के सबसे पुराने स्कूलों में भारतीय गुरुकुल का विशेष स्थान है। देश के विकास और प्रगति में भारतीय गुरुकुल का योगदान रहा है। 
Updated:- 2023-08-29, 14:09 IST
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शिक्षा को एक इंसान से कई इंसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों को शुरू किया गया था। दुनिया के सबसे पुराने स्कूलों में भारतीय गुरुकुल भी शामिल है। गुरुकुल वैदिक युग से ही अस्तित्व में है। चलिए इसके बारे में कुछ खास बातें आपको बताते हैं। 

भारतीय गुरुकुल की स्थापना कब हुई थी? 

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दुनिया की सबसे पुराने स्कूल में भारतीय गुरुकुल की स्थापना 10वीं शताब्दी से भी पहले हुई थी। माना जाता है कि भगवान राम के भाई भरत द्वारा पहले गुरुकुल को बसाया गया था। उन्होंने अपने पुत्र तक्ष के नाम पर इसका नाम तक्षशिला रखा था। यहां बड़े बच्चों के लिए तक्षशिला विश्वविद्यालय और बच्चों के लिए स्कूल भी थे, जिसे उस वक्त गुरुकुल भी कहा जाता था। 

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गुरुकुल में कैसे होती थी पढ़ाई? 

गुरुकुल की शिक्षा प्रणाली काफी अलग थी क्योंकि यहां सिर्फ छात्रों को ज्ञान नहीं दिया जाता था बल्कि उनके चरित्र में सुधार, आध्यात्मिक विकास, मित्रता या सामाजिक जागरूकता, आत्म-संयम भी सिखाया जाता था।(लखनऊ यूनिवर्सिटी के बारे में खास बातें) 

सिर्फ यही नहीं, इस स्कूल में गुरु का सम्मान करना सबसे जरूरी था और उन्हें अनुशासन पालन करना सिखाया जाता था।

गुरुकुल में किस प्रकार छात्रों को पढ़ाया जाता था? 

गुरुकुल में छात्रों को तीन प्रकार में विभाजित किया गया था। पहला था वासु जिसमें 24 साल की उम्र तक शिक्षा प्राप्त करने वाले थे। इसके बाद रुद्र छात्र थे जो 36 साल की उम्र तक शिक्षा प्राप्त करने वाले थे और फिर आदित्य जो 48 साल की उम्र तक शिक्षा प्राप्त करने वाले थे।(बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए बेस्ट हैं उत्तर प्रदेश के बोर्डिंग स्कूल)

छात्रों को गुरुकुल में इस प्रकार का वातावरण दिया जाता था कि वह अपने पसंद के काम के साथ एक सफल व्यक्ति बनना सीखें। सिर्फ यही नहीं, योग साधना और यज्ञ के लिए गुरुकुल को एक अभिन्न अंग माना जाता था।

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गुरुकुल में विद्यार्थी हर प्रकार के कार्य को सीखता था और शिक्षा पूर्ण होने के बाद ही अपना काम रुचि और गुण के आधार पर चुनता था। आज भी ऐसे कई गुरुकुल हैं जहां पर बच्चों को पढ़ाया जाता है। 

तो ये थी भारतीय गुरुकुल से जुड़ी कुछ खास बातें। इस आर्टिकल के बारे में अपनी राय भी आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। साथ ही, अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

 

 

image credit- freepik 

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