मकान किराये पर देने से पहले जान लें ये 6 कानूनी अधिकार, बाद में नहीं होगी परेशानी

जब भी कोई व्यक्ति अपने मकान या फ्लैट को किराये पर लगाना चाहता है तो वह अकसर अपनी प्रॉपर्टी की सुरक्षा के प्रति चिंतित रहता है। ऐसे में इससे जुड़े कानून जानें...
By Sakhi Digital | Edited By Garima Garg
Updated:- 2026-08-14, 17:55 IST
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पहले मकान मालिक अपनी संपत्ति को व्यावसायिक उद्देश्य से लिखित अनुबंध के आधार पर किराये पर देते थे। तब किरायेदार उसमें लिखी शर्तों का पालन करते थे, लेकिन ऐसी स्थिति में कुछ मकान मालिक मनमानी करते थे और जब चाहे किरायेदार को अपने घर से बेदखल कर देते थे। इसी वजह से रेंट एग्रीमेंट यानी किरायानामा बनाने का नियम लागू किया गया। इसके अनुसार समझौता लिखित या मौखिक हो सकता है, लेकिन कानूनी तौर पर लिखित किरायानामा ही सुरक्षित माना जाता है।

कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि यह कानून केवल किरायेदारों के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। इसी समस्या के समाधान के लिए मॉडल टेनेंसी एक्ट या किरायेदार अधिनियम लागू किया गया। इसके अंतर्गत आपसी सहमति से किराया तय करना, किरायेदार को मनमाने ढंग से बेदखल करने पर रोक लगाना एवं निवास से संबंधित शर्तों में संशोधन करना शामिल है।

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मकान मालिक के मुख्य कानूनी अधिकार

मकान मालिक को यह अधिकार प्राप्त है कि वह किराया समझौते का उल्लंघन करने, बिना अनुमति किसी दूसरे व्यक्ति को बतौर किरायेदार रखने, किराये के भुगतान में देरी करने, संपत्ति की सुविधाओं के दुरुपयोग और मकान में गैर-कानूनी गतिविधियां चलाने की स्थिति में किरायेदार को मकान खाली करने का नोटिस दे सकता है। अन्य कानूनी अधिकार इस प्रकार हैं-

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1. किराया बढ़ाने की मांग: समझौता या रेंट एग्रीमेंट खत्म होने के बाद नया एग्रीमेंट बनवाते समय मकान मालिक किराया बढ़ाने की मांग कर सकता है।

2. मकान की मरम्मत के लिए बेदखली: यदि मकान असुविधाजनक, असुरक्षित या पुराना हो गया हो, तो मकान मालिक आवास की मरम्मत या निर्माण कार्य के लिए किरायेदार से स्थायी या अस्थायी रूप से मकान खाली करवा सकता है।

3. नियमित किराया वृद्धि: मकान मालिक को यह भी अधिकार प्राप्त है कि वह अपनी रिहायशी एवं व्यावसायिक संपत्ति पर किराया कानून के हिसाब से प्रत्येक 2 वर्ष में 10 प्रतिशत तक किराया बढ़ा सकता है। किराये में यह वृद्धि दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम की धारा 6 एवं 8 के प्रावधान पर आधारित है।

4. रखरखाव और सुविधाएं: किराया कानून के अनुसार मकान की आवश्यक सुविधाओं जैसे पानी, बिजली आदि को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी मकान मालिक की होती है। हालांकि कानूनी तौर पर ऐसा प्रावधान है कि दोनों पक्ष मिलकर इस जिम्मेदारी का निर्वाह करें।

5. संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर कार्रवाई: यदि कोई व्यक्ति किराये की संपत्ति को हानि पहुंचाता है, तब भी मकान मालिक उससे अपनी संपत्ति खाली करने के लिए कह सकता है।

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6. कानूनी नोटिस और कोर्ट की शरण: यदि कोई व्यक्ति किराये का मकान खाली नहीं करता है या छह महीने से अधिक समय तक किराया नहीं देता, तो मकान मालिक को अधिकार है कि वह संपत्ति खाली करवाने के लिए नियमानुसार नोटिस भेजे। इसके बावजूद मकान खाली न करने की स्थिति में मकान मालिक को सिविल कोर्ट में याचिका डालकर आदेश प्राप्त करने का अधिकार है। इस आदेश का पालन करवाने में पुलिस प्रशासन का भी सहयोग मिलता है।

निष्कर्ष

संपत्ति को किराये पर देने से पहले या स्वयं किराये पर कोई आवास या व्यावसायिक परिसर लेते समय सभी को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए।

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