Fri Sep 25, 2026 | Updated 11:06 AM IST

शादी की रस्‍मों में सुनती होंगी ‘कांकू पगला’, आखिर क्या है इसका मतलब? इस गुजराती शब्द में छिपी है शुभ कदमों की कहानी

What Is Kanku Pagla: शादी-ब्याह में कई ऐसी रस्‍में न‍िभाई जाती हैं, ज‍िनके बारे में ज्‍यादातर लोगों को मालूम नहीं होती है। उन्‍हीं में से एक गुजराती रस्‍म है कांकू पगला। हम आपको इसके बारे में व‍िस्‍तार से जानकारी दे रहे हैं।
Updated:- 2026-09-25, 09:42 IST
kanku pagla rasam in gujarati weddings

हमारे यहां भारतीय घरों में शादी-ब्‍याह के समय कई तरह की रस्‍में न‍िभाई जाती हैं। यहां हर राज्‍यों की अपनी अलग-अलग परंपराएं हैं। इन रस्‍मों के नाम तो हम सुनते हैं, लेक‍िन कई लोगों को उनका मतलब नहीं पता होता है। 'कांकू पगला' भी उन्‍हीं में से एक है। यह शब्‍द गुजराती शाद‍ियों में खासताैर से सुनने को मि‍लता है। आपने अक्सर शादी की तस्वीरों और वीडियो में दुल्हन के लाल पैरों के निशान तो देखे ही होंगे। इन्हीं शुभ कदमों से जुड़ा है ‘कांकू पगला’।

तो अगर आपको भी अभी तक इसके बारे में नहीं मालूम था तो हम आपको बता रहे हैं क‍ि आखिर इसका मतलब क्या है और गुजरात के अलावा दूसरे राज्यों में इसी तरह की रस्म कैसे निभाई जाती है? आइए जानते हैं-

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क्या होता है ‘कांकू पगला’?

नोएडा के मेरे अपार्टमेंट में रहने वाली मेरी एक गुजराती दोस्त पारुल ने जब मुझसे इस परंपरा का जिक्र किया, तो मैंने इसके बारे में जानना चाहा। इस दौरान उन्होंने बताया कि गुजरात में लाल यानी कुमकुम से पड़े पैरों के निशानों को ही कांकू पगला कहा जाता है। इसमें कांकू का मतलब कुमकुम (रोली) और पगला का मतलब कदम या पैरों की छाप होता है। गुजराती कल्‍चर में कांकू पगला का मतलब शुभ कदम, अच्छी किस्मत और घर में तरक्की का प्रतीक माना जाता है।

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घर में शुभ कदमों का आना है कांकू पगला

वहीं कांकू ना पगला करवां का आसान शब्दों में मतलब होता है- किसी के शुभ कदमों से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का आना। यानी आसान शब्दों में कहें तो कांकू पगला का मतलब है कुमकुम से पड़े शुभ कदम। यह शब्द सिर्फ पैरों की छाप के लिए ही इस्तेमाल नहीं होता है बल्कि किसी के आने से मिलने वाली खुशी और पॉज‍िट‍िव‍िटी को दिखाने के लिए भी बोला जाता है।

शादी में कांकू पगला का क्या मतलब है?

आपको बता दें क‍ि शादी के बाद जब नई दुल्हन अपने ससुराल आती है, तो कई परिवारों में उसके स्वागत के दौरान लाल रंग से पैरों के निशान बनाने की परंपरा होती है। इसके पीछे भी यही भावना होती है क‍ि नई दुल्हन के साथ घर में शुभता और सुख-समृद्धि आए। गुजरात में कांकू पगला का इस्तेमाल घर में किसी के शुभ आगमन यानी आने की खुशी को जताने के लिए किया जाता है। यहां शादियों में कांकू पगला की एक खास रस्म निभाई जाती है। 

kanku pagla

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गुजराती शाद‍ियों में कांकू पगला की रस्‍म कैसे न‍िभाई जाती है?

गुजराती शादियों में यह रस्म दो मौकों पर निभाई जाती है। एक तो विदाई के समय और दूसरा ससुराल में गृह प्रवेश के दौरान। इस दौरान दुल्हन अपने दोनों पैरों को कुमकुम (रोली) के घोल में डुबोती है और फिर सफेद कपड़े, थाली या कागज पर अपने पैरों की छाप छोड़ती है। विदाई के समय मायके वाले इस छाप को बेटी की खुशहाली की याद के रूप में सहेज कर रखते हैं, वहीं ससुराल में इसे देवी लक्ष्मी का शुभ आगमन और सुख-समृद्धि की शुरुआत माना जाता है।

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गुजरात के अलावा दूसरे राज्यों में क्या परंपरा है?

देश के कई अलग-अलग हिस्सों में भी नई दुल्हन के घर आने पर लाल पैरों की छाप बनाने या शुभ कदमों की रस्म निभाई जाती है। भले ही अलग-अलग जगहों पर इसका नाम और तरीका बदल जाए, लेकिन इसके पीछे की भावना एक ही होती है- दुल्हन के आगमन को शुभ मानना।

  • बंगाल: यहां दुल्हन के पैरों को लाल आलता और दूध के मिश्रण में डुबोकर कपड़े या थाली पर उसके पैरों के निशान लिए जाते हैं। इसे देवी लक्ष्मी के आगमन से जोड़ा जाता है। यहां पर इसे बोहु भात या दूध-आलता रस्म कहा जाता है।
  • ओडिशा: यहां कुछ कम्‍युन‍िटी में गृह प्रवेश के दौरान दूल्हा-दुल्हन के पैर हल्दी के पानी और आलता से धोने की परंपरा है। यहां इसे गृह प्रवेश या आलता पदा रस्म के नाम से जाना जाता है।
  • उत्तर भारत (यूपी, बिहार, एमपी, राजस्थान): यहां कई जगहों पर गृह प्रवेश के समय दुल्हन के पैर कुमकुम या लाल रंग के पानी में रखे जाते हैं, ताकि घर में प्रवेश करते समय लाल पैरों के शुभ निशान बनें। यहां इसे खासतौर से गृह प्रवेश या लक्ष्मी पदचिह्न या लक्ष्मी चरण रस्म कहा जाता है।
  • महाराष्ट्र: यहां भी गृह प्रवेश के दौरान दुल्हन के पैरों से कुमकुम की छाप बनाने की रस्म निभाई जाती है। मराठी कल्‍चर में इसे लक्ष्मीच्या पावलांचे ठसे (लक्ष्मी के कदमों के छाप) कहा जाता है।

यानी इसका मतलब साफ है क‍ि इसका नाम अलग हो सकता है, तरीका थोड़ा बदल सकता है, लेकिन लाल पैरों के शुभ निशान का भाव कई भारतीय शादी की परंपराओं में दिखाई देता है।

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FAQ
नई दुल्‍हन के गृह प्रवेश में दाहिना पैर ही क्यों इस्‍तेमाल होते हैं?
सनातन परंपरा में दाहिना भाग शुभ और पवित्र माना गया है। इसलिए दुल्हन पहली बार दाहिना पैर आगे बढ़ाकर घर में सकारात्मकता का प्रवेश कराती है।
नई दुल्‍हन के गृह प्रवेश के पैरों के निशान कब तक रखने चाहिए?
कुमकुम के पैरों की छाप को सुखाकर कपड़े या कागज पर रखा जाता है। इसे परिवार जिंदगी भर एक शुभ यादगार के रूप में सहेज कर रखता है।
क्या दूल्हा भी 'कंकू पगला' करता है?
मुख्य रूप से यह रस्म दुल्हन के लिए होती है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में गृह प्रवेश के दौरान दूल्हा और दुल्हन दोनों साथ मिलकर यह रस्म निभाते हैं।
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