क्यों श्री कृष्ण ने भगवान शिव की नटराज उपाधि को लिया था छीन

Shri Krishna And Shiva Katha: धर्म ग्रंथों में भगवान शिव के अनेक रूपों और अवतारों का वर्णन मिलता है। इन्हीं में से एक है भगवान शिव का नटराज स्वरूप। वहीं, धर्म ग्रंथों में भगवान श्री कृष्ण को भी नटराज कहा गया है।
ऐसे में एक उपाधि दो भगवानों को कैसे मिली ये जानना बेहद दिलचस्प होगा। इसलिए हमारे ज्योतिष एक्सपर्ट डॉ राधाकांत वत्स द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर आज हम आपको यह बताने जा रहे यहीं कि आखिर भगवान श्री कृष्ण और भगवान शिव में से किसे पहले नटराज की उपाधि मिली थी।
- पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार जब भगवान शिव (भगवान शिव का महान भक्त) आनंदित होकर तांडव कर रहे थे तब सभी देवता उनके नृत्य को देखने कैलाश पर्वत पहुंचे।
- भगवान शिव अपने नृत्य में मगन थे और सभी देवताओं के सामने अनजाने में अपना अलौकिक नृत्य करते-करते शुभ तरंगों को सभी तक पहुंचा रहे थे।
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- भगवान शिव का नृत्य देख सभी देवता बेहद प्रसन्न थे। वहीं, माता पार्वती इतनी खुश हो गई थीं कि महादेव को वरदान देने की प्रबल इच्छा जताई।
- भगवान शिव ने माता पार्वती से वरदान में मनुष्यों तक इस सुगम नृत्य को पहुंचाने की प्रार्थना की। माता गौरी को समझ नहीं आया कि भला ये कैसे संभव है।
- तब भगवान शिव ने माता पार्वती को बताया कि उनके समान ही नृत्य करने की क्षमता मात्र श्री कृष्ण में हैं जो अभी वृंदावन में अवतरित होकर रह रहे हैं।
- भगवान शिव माता पार्वती और सभी देवी-देवताओं के साथ पृथ्वी पर पहुंचे और श्री कृष्ण से राधा रानी संग नृत्य करने का निवेदन किया।
- भगवान शिव के निवेदन को स्वीकार करते हुए श्री कृष्ण और राधा रानी ने वृंदावन में रास रचाया। श्री कृष्ण का नृत्य देख सब मंत्रमुग्ध हो गए।
- तब माता पार्वती के मुख से एक ही शब्द निकला जो था 'नटराज'। माता पार्वती ने श्री कृष्ण (अट्रैक्टिव पर्सनैलिटी के लिए श्री कृष्ण मंत्र) को नटराज कहकर पुकारा।
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- तभी से श्री कृष्ण भी नटराज कहलाए और नटराज की उपाधि उन्हें भी मिल गई। वैसे भी श्री कृष्ण और भगवान शिव दोनों को ही नृत्य पसंद है।
- दोनों ही एक दूसरे के आराध्य हैं। ऐसे में नटराज कहकर महादेव को पुकारो या कान्हा को पुकार दोनों तक पहुंचती है।
तो ये थी श्री कृष्ण के भगवान शिव से उनकी नटराज उपाधि को छीन ने की कथा। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर जरूर शेयर करें और इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। आपका इस बारे में क्या ख्याल है? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
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