क्या आप जानती हैं गरबा में ताली बजाने का साइंस, जानिए कैसे हथेलियों की थपकी से सुधरती है सेहत?
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नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा की भक्ति के साथ-साथ चारों तरफ गरबा और डांडिया की धूम मची रहती है। नौ दिनों तक महिलाएं रोजाना बड़े-बड़े गरबा पंडालों में जाकर गरबा और डांडिया करती हैं। क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि गरबा नृत्य की शुरुआत करते ही हम तालियों का इस्तेमाल करते हैं? गरबा की शुरुआत में स्टेप-वन में दो ताली, तीन ताली और चार तालियों के साथ नृत्य शुरू होता है। आखिर गरबे में ताली बजाने के पीछे का साइंस क्या है? आज इस लेख में हम आपको इसके बारे में बताएंगे। गरबा खेलते वक्त ताली बजाने के पीछे एक गहरा वैज्ञानिक और स्वास्थ्य से जुड़ा रहस्य छुपा है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
हथेलियों के एक्यूप्रेशर पॉइंट्स और ताली बजाने का कनेक्शन
एक्यूप्रेशर थेरेपी के अनुसार, इंसान की दोनों हथेलियों में फेफड़े, लिवर, किडनी, दिल और मस्तिष्क से जुड़े 30 से ज्यादा प्रेसर पॉइंट्स होते हैं। जब भी हम गरबा खेलते हैं, तब एक जैसे सीक्वेंस में तालियां बजाते हैं। तालियां बजाते वक्त हथेलियों पर एक समान दबाव पड़ता है। इस दबाव से सभी एक्यूप्रेशर पॉइंट्स स्टिमुलेट होते हैं, जिससे शरीर के अंदर के हिस्से और बेहतर हो जाते हैं।
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गरबे में ताली बजाने से सेहत को मिलने वाले गजब के फायदे
जब दोनों हाथों की हथेलियां आपस में टकराती हैं, तो हाथों और पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन तेजी से बढ़ जाता है। इससे दिमाग में ऑक्सीजन बेहतर तरीके से जाता है और शरीर की सुस्ती दूर होती है। ताली बजाने और गरबा करने से सेहत पर कई पॉजिटिव चेंजेस देखने को मिलते हैं। जैसे -
- गरबा का बॉडी मूवमेंट बेहतरीन एरोबिक वर्कआउट कहलाता है। यह दिल की धड़कन को सामान्य रखता है, खराब कोलेस्ट्रॉल के लेवल को नियंत्रित करता है और दिल की बीमारियों के खतरे को कम करता है।
- जब गरबा करते वक्त हथेलियां आपस में टकराती हैं, तो इसका सीधा संबंध हमारी आंतों और पेट से होता है। ताली बजाने से पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है और शरीर में व्हाइट ब्लड सेल्स का तेजी से बनते हैं।
- ताली बजाने से दिमाग में सेरोटोनिन और एंडोर्फिन जैसे हैप्पी हार्मोन्स रिलीज होते हैं, जो डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं।
- लगातार गरबे में तालियां बजाने से हाथों की उंगलियों, कलाई और कोहनी की बेहतरीन एक्सरसाइज होती है, जिससे जोड़ों की जकड़न दूर हो जाती है।
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निष्कर्ष: गरबा केवल एक नृत्य या मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारी एक प्राचीन और वैज्ञानिक परंपरा को दर्शाता है जो स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद बेहतरीन मानी गई है। नवरात्रि के दौरान जब भी आप गरबा खेलते हुए झूमती और ताली बजाती हैं, तो इससे आपके शरीर और सेहत में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हरजिंदगी से।
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