क्या आप जानते हैं गरबा और डांडिया का फर्क, जानिए नवरात्रि के इन दोनों लोकप्रिय नृत्यों का सच?

नवरात्रि का त्योहार शुरू होते ही चारों तरफ ढोल-नगाड़ों की धून गूंजने लगती है। ऐसे में अधिकतर महिलाएं 9 दिनों तक रंग-बिरंगी चनिया-चोली पहनकर गरबा करती नजर आती हैं। हम सभी ने अक्सर गरबा और डांडिया का नाम तो सुना ही होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गरबा और डांडिया दोनों में क्या अंतर होता है?
Updated:- 2026-10-15, 15:34 IST
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आमतौर पर लोग गरबा और डांडिया को एक ही समझते हैं, लेकिन ये दोनों शब्द और दोनों के डांस करने का तरीका अलग-अलग हैं। आज इस लेख में हम आपको गरबा और डांडिया के बीच का असली अंतर बताएंगे। परंपरा, इतिहास, नृत्य की शैली और धार्मिक मान्यताओं के हिसाब से देखा जाए तो इन दोनों में बहुत बड़ा अंतर है। जहां एक नृत्य हाथों की तालियों और चुटकियों के साथ होता है, वहीं दूसरे में रंग-बिरंगी डंडियों का इस्तेमाल किया जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं इन दोनों के बारे में।

1. गरबा क्या है और इसका महत्व?

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत भारत की राष्ट्रीय संगीत, नाटक एवं नृत्य अकादमी इस बात की जानकारी देती है कि गरबा केवल डांस नहीं है, बल्कि यह मां शक्ति की पूजा-अर्चना का एक बेहद पवित्र माध्यम माना जाता है। 'गरबा' शब्द संस्कृत के 'गर्भ दीप' से लिया गया है। इसमें मिट्टी के छोटे-छोटे छेदों वाले मटके के अंदर एक दीपक जलाकर रखा जाता है, जिसे 'दीप गर्भ' कहते हैं। यह दीपक महिला की शक्ति और चलती रहने वाली जिंदगी की पहचान है।

  • गरबा खेलते समय सभी लोग एक बड़े गोल घेरे में घूमते हैं। यह गोल घेरा जीवन के निरंतर चलते रहने वाले चक्र को दर्शाता है, जिसमें जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म सब शामिल है।
  • पारंपरिक गरबा बिना किसी डंडी या लकड़ी के खेला जाता है। इसमें हाथों की तालियों, पैरों के तालमेल और चुटकियों का इस्तेमाल होता है।

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(image credit: Pinterest/Historical Dance)

2. डांडिया रास क्या है और इसके बारे में?

गुजरात सरकार का आधिकारिक पर्यटन पोर्टल पर डांडिया रास से जुडी जानकारी दी गई है। डांडिया में लोग दो रंग-बिरंगी लकड़ियों का इस्तेमाल करके डांस करते हैं। डांडिया में इस्तेमाल होने वाली ये डंडियां मां दुर्गा की तलवार या त्रिशूल को रिप्रजेंट कर ती हैं। जब ये डंडियां आपस में टकराते हैं, तो उनसे निकलने वाली आवाज मां दुर्गा और महिषासुर के बीच हुए युद्ध को बताती है।

  • डांडिया रास का इतिहास भगवान श्री कृष्ण और गोपियों की वृंदावन वाली रासलीला से भी जोड़ा जाता है, जिसे उत्सव और जीत के आनंद के रूप में खेला जाता है।
  • गरबा के मुकाबले डांडिया थोड़ा अलग होता है। इसमें लोग दो लाइनों में आमने-सामने खड़े होकर डांस करते हैं और एक-दूसरे की डंडियों पर मारते हुए आगे बढ़ते हैं।

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(image credit: Pinterest/Stardust Memories)

गरबा और डांडिया के बीच मुख्य अंतर

आइए आसान भाषा में समझते हैं इन दोनों में खास अंतर क्या है?  

आधार गरबा (Garba) डांडिया रास (Dandiya Raas)
समय यह मुख्य रूप से आरती से पहले मां दुर्गा की आराधना के रूप में किया जाता है। यह आमतौर पर आरती के बाद उत्सव के रूप में खेला जाता है।
साधन इसमें हाथों की ताली, चुटकी और पैरों के तालमेल का इस्तेमाल होता है। इसमें दो रंग-बिरंगी लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है।
फॉर्मेशन्स यह एक बड़े गोल घेरे में घूमकर खेला जाता है। इसमें आमने-सामने दो लाइनें बनती हैं और पार्टनर्स बदलते हैं।
पहनावा इसमें महिलाएं पारंपरिक चनिया-चोली और पुरुष केडिया-धोती पहनते हैं। इसमें ट्रेडिशनल आउटफिट्स के साथ-साथ इंडो-वेस्टर्न फ्यूजन भी देखने को मिलता है।
संगीत इसमें देवी मां के पारंपरिक भजन और स्तुति गाए जाते हैं। इसमें आधुनिक बीट्स, बॉलीवुड सांग्स और तेज संगीत होता है।

निष्कर्ष: गुजरात के बाद अब पूरी दुनिया में मशहूर होने वाला गरबा और डांडिया एक-दूसरे से काफी अलग हैं। जहां एक तरफ गरबा मां शक्ति की साधना और भक्ति के लिए किया जाता है, वहीं दूसरी तरफ डांडिया बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी मनाने का एक जरिया है। इस नवरात्रि जब आप पंडाल में जाएं, तो इन खूबसूरत परंपराओं के अंतर को समझकर इनका पूरा आनंद उठाएं। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से। 

FAQ
'गरबा' शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है?
'गरबा' शब्द 'गर्भ-द्वीप' से बना है, जिसका संबंध मिट्टी के उस घड़े से है जिसके अंदर जलता हुआ दीया रखकर मां दुर्गा की पूजा की जाती है।
डांडिया की डंडियां किस बात का प्रतीक मानी जाती हैं?
डांडिया की डंडियां देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच हुए युद्ध में इस्तेमाल हुई तलवारों और मां के शस्त्रों का प्रतीक मानी जाती हैं।
गरबा पहले खेला जाता है या डांडिया?
धार्मिक परंपरा के अनुसार पहले मां दुर्गा की स्थापना और आरती के समय 'गरबा' किया जाता है, जिसके बाद आनंदोत्सव के रूप में 'डांडिया' खेला जाता है।
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