काशी का यह दुर्गा पंडाल है बेहद खास, 259 साल से विराजमान हैं मां की मूर्ति, आज तक नहीं हुआ विसर्जन

हम सभी जानते हैं कि दुर्गा पूजा के पंडालों में नवरात्रि के दौरान मां की खूब आराधना का जाती है और फिर भारी मन से दशहरे पर मूर्ति विसर्जन किया जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि काशी में एक ऐसा दुर्गा पंडाल है जहां 259 साल से मां की प्रतिमा का विसर्जन नहीं हुआ है।
Updated:- 2026-10-16, 19:33 IST
navratri special kashi durga pandal 258 years old durga idol never immersed

देवी मां के नौ रूपों की आराधना का पर्व नवरात्रि इन दिनों पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। शास्त्रों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माँ दुर्गा की महिमा असीम है, दुर्गा पूजा मां की भक्ति और शक्ति को सेलिब्रेट करता एक पावन उत्सव है। दुर्गा पूजा में मां दुर्गा की बड़ी-बड़ी प्रतिमाओं (मूर्तियों) की स्थापना और उनके विसर्जन की परंपरा बहुत प्राचीन और भव्य है। नवरात्रि में मां का स्वागत किया जाता है और दशमी के दिन पूरे सम्मान से मां दुर्गा को उनके दिव्य धाम के लिए विदा किया जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि महाकाल की नगरी काशी में के मदनपुरा इलाके में पुराना दुर्गा बाड़ी स्थित है, जहां मां दुर्गा की एक ऐसी प्रतिमा है जिसका 259 सालों से विसर्जन नहीं हुआ है और भक्त हर साल इसकी पूरी श्रद्धा और भक्ति से उपासना करते हैं। चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं।

259 साल पुरानी मां दुर्गा की मूर्ति की दिव्य कहानी

वाराणसी के मदनपुरा इलाके में पुराना दुर्गा बाड़ी में मौजूद इस मूर्ति की कहानी काफी चमत्कारी है और इसका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। साल 1767 में मदनपुरा क्षेत्र में रहने वाले मुखर्जी परिवार ने बहुत प्रेम से मां का स्वागत किया था और पूरे भक्ति भाव से उनकी सेवा की। दशमी के दिन मुखर्जी परिवार मां को पूरे सम्मान के साथ विदाई देने की तैयारी कर रहा था, लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने सभी को हैरान कर दिया और मां के इस चमत्कार से सभी चकित रह गए।

ghee rubbing benefits on foot

नहीं हो सकी थी देवी की विदाई

बताया जाता है कि जब दशमी के दिन मां की मूर्ति के विसर्जन का वक्त आया, तो 5 फीट की छोटी सी प्रतिमा को सैकड़ों लोग मिलकर भी नहीं उठा पाए और सभी हैरान व परेशान हो गए। मन में यह विचार था कि मां क्रोधित तो नहीं है या फिर इस चमत्कार के पीछे क्या वजह है? इसके बाद देवी ने परिवार के मुखिया को सपने में दर्शन दिए और कहा कि वह उनकी भक्ति-आराधना से बहुत प्रसन्न हैं व अब वह वहीं विराजमान हैं। यह मूर्ति मिट्टी और पुआल से बनी है, लेकिन इसकी चमक आज भी वैसी ही बनी हुई है।

यह भी पढ़ें- दिल्ली के ये 5 दुर्गा पूजा पंडाल हैं सबसे खास, खूबसूरती देखकर आ जाएगी कोलकाता की याद

मुरादें पूरी करती हैं मां

काशी के लोग और वहां प्रचलित कथाएं बताती हैं कि काशी में विराजमान देवी की यह मूर्ति काफी चमत्कारिक है और वहां सच्चे मन से मांगी गई सारी मुरादें पूरी होती हैं। अगर कोई भक्त मन में कोई इच्छा लेकर वहां पहुंचता है, तो वह इच्छा जरूर पूरी होती है। यूं तो वहां पूरे साल मां का पूजन किया जाता है, लेकिन खासकर नवरात्रि के नौ दिन देवी की विशेष पूजा होती है।

यह भी पढ़ें- पंडालों से अलग इन पुरानी हवेलियों की दुर्गा पूजा, कोलकाता में आज भी निभाई जाती हैं सदियों पुरानी रस्में

अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।