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Mauni Amavasya 2025 Snan Ke Niyam: मौनी अमावस्या पर स्नान के समय कितनी डुबकी लगाएं? जानें विधि

मौनी अमावस्या के दिन अगर आप त्रिवेणी संगम पर स्नान नहीं भी कर पा रहे हैं, लेकिन अन्य किसी भी पवित्र नदी में स्नान करते हैं तो उसका उतना ही फल प्रात होगा जितना कि महाकुंभ में अमृत स्नान का। 
Updated:- 2025-01-28, 16:00 IST
mauni amavasya 2025 snan vidhi

मौनी अमावस्या जिसे माघी अमावस्या भी कहा जाता है 29 जनवरी, दिन बुधवार को पड़ रही है। इस साल मौनी अमावस्या का महत्व और भी अधिक इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इस दिन शाही या अमृत स्नान का योग बन रहा है। माना जा रहा है कि मौनी अमावस्या के दिन जहां एक ओर महाकुंभ में अमृत स्नान करने से भगवान शिव की असीम कृपा मिलेगा और जीवन के कष्टों का निवारण होगा।

वहीं, दूसरी ओर मौनी अमावस्या के दिन अगर आप त्रिवेणी संगम पर स्नान नहीं भी कर पा रहे हैं, लेकिन अन्य किसी भी पवित्र नदी में स्नान करते हैं तो उसका उतना ही फल प्रात होगा जितना कि महाकुंभ में अमृत स्नान का। इसी कड़ी में ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स ने हमें बताया कि मौनी अमावस्या के दिन स्नान के दौरान कौन से नियमों का पालन करना चाहिए एवं किस विधि से स्नान करना उचित होगा।

मौनी अमावस्या 2025 के दिन क्या हैं स्नान के नियम एवं विधि?

शास्त्रों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान के दौरान 5 डुबकियां लगानी चाहिए। वहीं, इस साल तो महाकुंभ का शाही स्नान भी इसी दिन पड़ रहा है। ऐसे में अमृत स्नान के दौरान 5 डुबकियां लगाना औ भी लाभकारी सिद्ध होगा।

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पहली डुबकी पूर्व दिशा में मुख करके लगानी चाहिए। जब आप स्नान के लिए जाएं, तो सबसे पहले अपना मुख पूर्व दिशा की ओर रखें और आस्था के साथ पहली डुबकी लगाएं। डुबकी से पहले गंगा, यमुना, सरस्वती और जल देवता को प्रणाम करना आवश्यक है।

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इसके बाद, उसी अवस्था में यानी कि पूर्वमुखी की स्थिति में ही दूसरी डुबकी लगानी चाहिए। दूसरी डुबकी से आपको अपने कुल देवता और इष्ट देवता की कृपा प्राप्त होती है। अगर कुल देवत या इष्ट देवता से जुड़ा कोई दोष है तो वह भी शीघ्र ही दूर हो जाता है।

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तीसरी डुबकी उत्तर दिशा में मुख करके लगानी चाहिए। उत्तरमुखी तीसरी डुबकी से भगवान शिव, माता पार्वती, सप्त ऋषियों, मुनियों और गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है और अनिष्टों से रक्षा होती है।

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चौथी डुबकी पश्चिम दिशा में मुख करके लगानी चाहिए। पश्चिममुखी डुबकी से किन्नर, यक्ष, गुरुड़ और 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। पांचवीं डुबकी दक्षिण दिशा में मुख करके लगानी चाहिए। यह डुबकी पितरों के कल्याण के लिए होती है।

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image credit: herzindagi 

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