Mon Oct 5, 2026 | Updated 11:54 AM IST

'केसरिया बालम' सिर्फ राजस्‍थानी लोकगीत नहीं, ढोला-मारू के प्यार और इंतजार की पुकार है! पढ़ें इसकी द‍िलचस्‍प कहानी

हमारे यहां भारत में कई तरह के गीत और लोकगीत गाए जाते हैं। उन्‍हीं में से एक है 'केसरिया बालम आओ नी, पधारो म्हारे देस...'। हम आपको इस राजस्‍थानी लोकगीत की द‍िलचस्‍प कहानी बता रहे हैं।
Updated:- 2026-10-05, 10:04 IST
kesraiya balam aao ni rajasthani folk song history

'केसरिया बालम आओ नी, पधारो म्हारे देस...' ये लोकगीत तो आपने सुनी ही होगी। इसके बोल में ही राजस्थानी टच है। जैसे ही हम यह गीत सुनते हैं, हमें राजस्थान की मिट्टी, रंग-बिरंगे कपड़े और मेहमानों के स्वागत का ही ख्याल आता है। आज यह गीत राजस्थान की पहचान से जुड़ चुका है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि इस गीत की पहचान हमेशा से स्वागत गीत की नहीं थी?

इसके पीछे एक ऐसी लोककहानी जुड़ी है, जिसमें प्यार, इंतजार और बिछड़ने का दर्द भी है। बताया जाता है कि 'केसरिया बालम' एक ऐसी पत्नी की पुकार थी, जो अपने पति के लौटने का लंबे समय से इंतजार कर रही थी। दरअसल, आप जिसे स्वागत गीत समझ रही थीं, वह एक विरह का गीत है। आइए इसके बारे में जानते हैं-

kesraiya balam aao ni rajasthani folk song history (2)

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ढोला और मारू की कहानी से जुड़ा है केसरिया बालम गीत

राजस्थान की आठवीं शताब्दी की मशहूर लोककथा है कि नरवर के राजकुमार ढोला और पूंगल की राजकुमारी मारू यानी ढोला-मारू की शादी बचपन में ही कर दी गई थी। शादी के बाद मारू अपने मायके पूंगल में रहने लगीं, जबकि समय बीतने के साथ ढोला इस पुराने रिश्ते से दूर हो गए। जब मारू बड़ी हुई तो उसे अपने पति की याद सताने लगी। वह चाहती थीं कि ढोला उन्हें लेने के लिए आएं, लेकिन उसके पास ढोला तक अपनी बात पहुंचाने का कोई आसान रास्ता नहीं था।

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संदेश पहुंचाना हुआ मुश्किल

मारू के परिवार की तरफ से ढोला तक कई संदेश भेजे गए, लेकिन ये संदेश उन्हें मिल नहीं पाए। जब बार-बार कोशिश करने के बाद भी बात ढोला तक नहीं पहुंची, तब मारू ने एक अलग तरीका अपनाया। उन्होंने लोकगायकों के जरिए अपने दिल की बात ढोला तक पहुंचाने की कोशिश की।

सुरों के जरिए पहुंची मारू की आवाज

कहा जाता है कि लोकगायक ढोला के पास पहुंचे और गीत के जरिए मारू का संदेश सुनाया। इसी कहानी को 'केसरिया बालम आओ नी, पधारो म्हारे देस' की पंक्ति से जोड़ा गया। यहां 'बालम' यानी प्रिय और 'देस' यानी अपने घर या अपने इलाके में लौटने की पुकार है। इस लोकगीत में अपने प्यार को वापस आने के लिए दर्द साफ समझ आता है।

ढोला को याद आया पुराना रिश्ता

जब मारू की आवाज गीत के जरिए ढोला तक पहुंची तो उन्हें अपना पुराना रिश्ता याद आ गया। इसके बाद वह मारू से मिलने के लिए पूंगल पहुंचे। इस तरह लंबे इंतजार के बाद दोनों का दोबारा मिलन हुआ। हालांकि ढोला-मारू की यह कहानी लोकपरंपरा का हिस्सा है और इसके अलग-अलग रूप राजस्थान में सुनने को मिलते हैं।

kesraiya balam aao ni rajasthani folk song history (1)

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फिर कैसे केसर‍िया बालम बना स्वागत का गीत?

समय के साथ 'केसरिया बालम' की पहचान सिर्फ विरह या प्रेम की कहानी तक नहीं रही। राजस्थानी लोकसंगीत में इसे अलग-अलग कलाकारों ने अपनी आवाज और अंदाज में गाया। धीरे-धीरे यह गीत राजस्थान की मेहमाननवाजी और अपनापन दिखाने वाला गीत बन गया।

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ये हैं केसरिया बालम के लिरिक्स

केसरिया बालम आओ नी
पधारो म्हारे देस जी
मारू थारै देस में
निपजे तीन रतन

एक ढोलो दूजी मारवण
तीजो कसूमल रंग
केसरिया बालम आओ नी
पधारो म्हारे देस जी

केसर सूं पगला धोवती
घरै पधारो बींद
और बधाई क्या करूं
पल-पल वारूं जी
पधारो म्हारे देस जी

केसरिया बालम आओ नी
पधारो म्हारे देस

आम्बा मीठी आम्बली
चौसर मीठी चा
ओ मै लां मीठी कामणी
रण मीठी तलवार
पधारो म्हारे देस जी

केसरिया बालम आओ नी
पधारो म्हारे देस

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FAQ
'केसरिया बालम' स्वागत गीत है या विरह का गीत?
मूल रूप से 'केसरिया बालम' एक विरह का गीत है, जिसमें पत्नी (मारू) अपने पति (ढोला) के लौटने का लंबे समय से इंतजार करती है और अपनी पुकार भेजती है। हालांकि, समय के साथ यह राजस्थान की मेहमाननवाजी और स्वागत का प्रतीक लोकगीत बन गया।
'केसरिया बालम' लोकगीत किस प्रसिद्ध लोककथा से जुड़ा है?
यह गीत राजस्थान की 8वीं शताब्दी की प्रसिद्ध लोककथा 'ढोला और मारू' की अमर प्रेम कहानी से जुड़ा हुआ है।
'केसरिया बालम' गीत में मारू ने ढोला तक अपना संदेश कैसे पहुंचाया था?
जब मारू के भेजे संदेश ढोला तक नहीं पहुंच पाए, तब उन्होंने लोकगायकों के जरिए अपने दिल का दर्द और लौटने की पुकार 'केसरिया बालम' पंक्तियों के माध्यम से ढोला तक पहुंचाई थी।
गीत में 'केसरिया बालम' और 'देस' का क्या अर्थ है?
इस लोकगीत में 'बालम' का अर्थ प्रिय/पति से है और 'देस' का अर्थ अपने घर, प्रदेश या अपनी मिट्टी में लौटने का आग्रह है।
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