हर वक्त डरे-सहमे रहते हैं आपके बच्चे? इन पेरेंटिंग आदतों से बढ़ाएं उनका सेल्फ-कॉन्फिडेंस

बच्चों में आत्मविश्वास की कमी के कारणों और इसे बढ़ाने के प्रभावी तरीकों के बारे में पता होना जरूरी है। डॉ. चांदनी तुगनैत के अनुसार, माता-पिता के व्यवहार और शब्दों का बच्चे के व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जिससे वे डरे-सहमे रह सकते हैं।
Updated:- 2026-05-03, 17:04 IST
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माता-पिता का व्यवहार बच्चे के पूरे व्यक्तित्व की नींव रखता है। कई बार हम देखते हैं कि कुछ बच्चे बहुत संकोची होते हैं या हर छोटी बात पर डर जाते हैं। एक माता-पिता के तौर पर हमारे शब्द और हमारा व्यवहार ही यह तय करता है कि बच्चा खुद को कितना काबिल मानता है। अगर आपका बच्चा भी अक्सर डरा-सहमा रहता है, तो समय आ गया है कि आप अपनी पेरेंटिंग आदतों पर गौर करें। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि बच्चे के आत्मविश्वास में कमी के कारण क्या है और आत्मविश्वास बढ़ाने के कारगर तरीके क्या हैं? इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...

बच्चे के आत्मविश्वास में कमी के कारण क्या है?

जब बच्चे को हर छोटी बात पर टोका जाता है या उसकी तुलना दूसरे बच्चों से की जाती है, तो उसे लगने लगता है कि वह कुछ भी सही नहीं कर सकता।

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घर का माहौल बहुत ज्यादा कड़क होने पर बच्चा अपनी बात कहने से डरने लगता है।

यदि माता-पिता केवल परफेक्शन की उम्मीद करते हैं, तो बच्चा गलती करने के डर से नई चीजें सीखने से कतराने लगता है।

तुमसे नहीं होगा या तुम हमेशा गलत करते हो जैसे वाक्य बच्चे के आत्म-सम्मान को बुरी तरह चोट पहुंचाते हैं।

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आत्मविश्वास बढ़ाने के कारगर तरीके क्या हैं?

बच्चे की बड़ी उपलब्धियां ही नहीं, बल्कि छोटी-छोटी कोशिशों की भी तारीफ करें। इससे उसे महसूस होता है कि उसकी मेहनत की वैल्यू है।

जब बच्चा कोई गलती करे, तो उसे डांटने के बजाय समझाएं कि उस गलती से क्या सीखा जा सकता है। उसे यह अहसास दिलाएं कि हारना या गलती करना जीवन का हिस्सा है।

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नोट - कभी भी दूसरों के सामने या उनके दोस्तों के सामने बच्चे को न झिड़कें। इससे वे समाज से कटने लगते हैं।

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