अकेलेपन का शिकार हो गया है मेरा 12 साल का बेटा, इस स्थिति से कैसे निकालूं?

सिंगल पेरेंट के लिए काम और परिवार के बीच बैलेंस बनाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। जब बच्चे पूरे दिन घर पर अकेले रहते हैं, तो वे धीरे-धीरे अकेलेपन का शिकार होने लगते हैं। शुरुआत में यह अकेलापन आम लगता है, लेकिन वक्त के साथ यह बच्चे के स्वभाव को पूरी तरह बदल देता है। वे बात करना बंद कर देते हैं और अपनी ही दुनिया में सिमट जाते हैं। ऐसा ही कुछ टीना के साथ हुआ। उनका बच्चा भी इस दौर से गुजर रहा था। सही तरीकों से बच्चों को इस स्थिति से बाहर निकाला जा सकता है। ऐसे में इसके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि टीना मित्तल की किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा और कैसे बच्चों को अकेलेपन से बाहर निकाला जा सके। इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...
जब शाम को घर आने के बाद भी चुप रहता था मेरा बेटा
गाजियाबाद की रहने वाली टीना मित्तल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जब उनका बेटा महज 5 साल का था, तब उसके पिता का साया सिर से उठ गया। एक सिंगल मदर होने के नाते टीना ने हिम्मत नहीं हारी और बच्चे के अच्छे फ्यूचर के लिए दिन-रात नौकरी में मेहनत करने लगीं, लेकिन...
इस आपाधापी में उनका 12 साल का बेटा दिनभर घर पर अकेला रहने लगा। टीना जब शाम को थककर ऑफिस से घर लौटतीं, तो देखतीं कि उनका बेटा बेहद गुमसुम बैठा रहता है। न तो वह स्कूल की बातें शेयर करता और न ही कोई रिएक्शन देता। बेटे के इस बदलते और शांत व्यवहार ने टीना की चिंता बहुत ज्यादा बढ़ा दी।
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ऐसी स्थिति से कैसे निपटें?
- जब भी आप ऑफिस से लौटें तो 30 मिनट बिना मोबाइल या टीवी के सिर्फ बच्चे के साथ बैठें।
- बच्चे को दिनभर अकेला छोड़ने के बजाय उसे उसकी पसंद के अनुसार पेंटिंग, डांस, म्यूजिक या किसी स्पोर्ट्स क्लास में बिजी रखें।
- जब आप घर पर हों, तो बच्चे को छोटे-छोटे कामों में अपने साथ शामिल करें।
एक्सपर्ट की राय
आप अपने बच्चे पर तुरंत बात करने का प्रेशर न बनाएं। उसे इस बात का यकीन दिलाएं कि आप उसकी हर भावना को समझती हैं। इसके अलावा छुट्टी के दिन बच्चे को उसकी पसंदीदा जगह पर ले जाएं या उसके साथ कोई इनडोर गेम खेलें।
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