बच्चे को ज्यादा फ्रीडम देना पड़ गया भारी, एक होममेकर के अनुभव से सीखें पेरेंटिंग के सबक

एक वर्किंग मदर के अनुभव से पता चलता है कि बच्चों को ज्यादा आजादी देना कैसे उन्हें परिवार से दूर कर सकता है। ऐसे में जानते हैं उनकी स्टोरी के बारे में...
Updated:- 2026-06-24, 15:14 IST
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बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के चक्कर में कई बार हम उन्हें जरूरत से ज्यादा आजादी दे देते हैं। खासतौर पर वर्किंग मदर्स के लिए प्रोफेशनल लाइफ और बच्चों के बीच बैलेंस बनाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। वंदना श्रीवास्तव, जो एक IT कंपनी में काम करती हैं, उनके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। उन्होंने अपने आसपास के माहौल और ऑफिस के कर्मचारियों की बातें सुनकर अपने बच्चों पर कभी कोई रोक-टॉक नहीं लगाई और उन्हें पूरी फ्रीडम दी, लेकिन इसका जो नतीजा निकला, उसने उनकी आंखें खोल दीं। ऐसे में पूरी स्टोरी के बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि छोटी से लापहरवाही कैसे बच्चे का जीवन खराब कर सकती है? इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...

कैसे हुआ अहसास?

वंदना के पति एक बिजनेसमैन हैं जो अपने काम के चलते ज्यादातर घर से बाहर ही रहते हैं। वंदना ने बच्चों को फ्रीडम दी थी ताकि वे बाउंडेशन हुआ महसूस न करें, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह फ्रीडम बच्चों को परिवार से दूर कर रही है। इस बात का अहसास उन्हें तब हुआ जब कुछ समय के लिए उनकी मां घर रहने आईं। वंदना ने नोटिस किया कि बच्चे अपनी नानी के पास बैठने, उनसे बात करने या वक्त बिताने के बजाय हर समय अपने मोबाइल गेम्स, दोस्तों और अपनी ही दुनिया में बिजी रहे।

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तब वंदना की मां ने उन्हें समझाया कि करियर और जॉब अपनी जगह जरूरी हैं, लेकिन बच्चों की सही पेरेंटिंग उससे भी ज्यादा जरूरी है। इतनी ज्यादा फ्रीडम और अकेलापन बच्चों को अपनों से ही दूर कर देगा, वे रिश्तों के मायने कभी नहीं समझ पाएंगे और धीरे-धीरे तुमसे भी कट जाएंगे।  

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बच्चों को अपनी दुनिया से बाहर कैसे निकालें?

  • आ वीकेंड पर पूरे परिवार के लिए एक ऐसा समय तय करें जब कोई भी सदस्य स्मार्टफोन यूज नहीं करेगा।
  • बच्चों को घर के पुराने सामान, खाली डिब्बों या बोतलों से क्राफ्ट बनाने और इंडोर गार्डनिंग जैसी क्रिएटिव एक्टिविटीज में बिजी रखें।
  • रोज शाम को बच्चों के साथ बैठकर दिनभर की बातें शेयर करें।

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एक्सपर्ट की राय

एक्सपर्ट का मानना है कि बच्चों को आजादी देना गलत नहीं है, लेकिन बिना किसी सीमा के दी गई फ्रीडम उनके बिहेवियर को जिद्दी बना देती है।

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