Sat Sep 26, 2026 | Updated 11:38 AM IST

भारत की इस रहस्यमयी जगह पर पानी के कुंड में तैयार होता है लंगर, हजारों लोग रोजाना छकते हैं प्रसाद

ह‍िमाचल प्रदेश के कुल्‍लू में स्‍थ‍ित मणिकरण साहिब लोगों के बीच आस्‍था का केंद्र बना हुआ है। यहां की खास बात कुंड का सालों साल खौलता हुआ पानी ही है। इसी कुंड में लंगर के ल‍िए दाल-चावल भी बनाए जाते हैं।
Updated:- 2026-09-26, 10:49 IST
manikaran sahib interesting facts

हमारे यहां भारत में कई रहस्यमयी जगहें हैं, जिनसे जुड़ी बातें आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। हिमाचल प्रदेश की मणिकरण साहिब भी ऐसी ही एक बेहद कमाल की और रहस्यमयी जगह है। यहां एक ऐसा गर्म पानी का कुंड है, जिसका पानी पूरे साल उबलता रहता है। चाहे गर्मी का मौसम हो, सर्दी हो या बारिश, पानी कभी ठंडा नहीं होता है।

इस जगह की सबसे मजेदार बात यह है कि यहां गुरुद्वारे के लंगर के लिए चावल और दाल इसी उबलते हुए पानी में पकाए जाते हैं, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। ऐसे में अगर आप भी इसके बारे में विस्तार से जानना चाहती हैं तो हमारा यह लेख आपके लिए ही है। आइए जानते हैं-

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image credit- himachal pradesh tourism

कहां है मणिकरण साहब?

आपको बता दें कि मणिकरण साहब हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में पार्वती घाटी के बीच स्थित है। यह जगह यहां मौजूद गर्म पानी के झरने के लिए खासतौर पर जानी जाती है। बताया जाता है कि इसी झरने से निकलने वाला पानी लगातार गर्म रहता है। यह गुरुद्वारा समुद्र तल से 1760 मीटर की ऊंचाई पर है। कुल्लू शहर से इसकी दूरी करीब 35 किलोमीटर है। इस जगह को देखने और यहां के गर्म पानी के कुंड को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

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सालभर खौलता रहता है पानी

मणिकरण साहब की सबसे खास बात यहां का गर्म पानी ही है। ऐसा बताया जाता है कि इस कुंड का पानी हर मौसम में खौलता रहता है। गर्मी में इसका टेंपरेचर कम नहीं होता और सर्दियों में भी यह पानी खौलता ही रहता है। यहां तक कि बारिश भी इस कुंड के पानी को ठंडा नहीं कर पाती है। यही कुंड का उबलता हुआ पानी गुरुद्वारे में लंगर तैयार करने के काम आता है। कुंड के पानी में चावल और दाल को पकाया जाता है।

वैज्ञानिक भी नहीं समझ पाए इसका रहस्य

वैज्ञानिक भी इस बात से हैरान हैं कि आखिर यह पानी हमेशा इतना गर्म कैसे रहता है? इसका सच जानने के लिए कई बार वैज्ञानिक भी यहां आ चुके हैं। हालांकि, आज भी इसका पूरा रहस्य पूरी तरह से सामने नहीं आया है। लोग इसे कुदरत का एक ऐसा अनोखा करिश्मा मानते हैं, जिससे बिना किसी गैस या चूल्हे के सीधे लंगर का खाना तैयार हो जाता है। इसी प्रसाद को रोजाना श्रद्धालु ग्रहण करते हैं।

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मणिकरण नाम के पीछे है दिलचस्प कहानी

इसका मणिकरण नाम पड़ने के पीछे एक बहुत पुरानी और दिलचस्प पौराणिक कथा है। माना जाता है कि भगवान शिव और माता पार्वती ने यहां करीब 11,000 साल तक तपस्या की थी। इसी दौरान किसी तरह माता पार्वती की एक बहुत कीमती मणि यहीं पानी या जमीन में कहीं खो गई। जब माता पार्वती की वह मणि काफी ढूंढने पर भी नहीं मिली, तो भगवान शिव बहुत ज्यादा गुस्से में आ गए। गुस्से में उनका तीसरी आंख खुल गया, जिससे चारों तरफ खलबली मच गई।

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कहा जाता है कि तभी वहां एक शक्ति प्रकट हुईं जिन्होंने बताया कि वह मणि पाताल लोक में शेषनाग के पास है। जब शिवजी के गणों ने शेषनाग से मणि वापस मांगी, तो वे और नाराज हो गए। गुस्से में शेषनाग ने जैसे ही जोर से फुफकार छोड़ी, वैसे ही जमीन से गर्म पानी की तेज धारा फूट पड़ी। तभी से यहां यह गर्म पानी का कुंड लगातार बह रहा है और माता पार्वती की मणि मिलने की इस घटना (करण) की वजह से ही इस जगह का नाम मणिकरण पड़ गया।

गुरु नानक देव से भी जुड़ी है एक मान्यता

मणिकरण साहिब से सिखों के पहले गुरु गुरु नानक देव की भी एक बहुत कहानी जुड़ी है। कहा जाता है कि गुरु नानक देव अपने पांच शिष्यों के साथ यहां पहुंचे थे। उस समय सबको भूख लगी थी और लंगर पकाने के लिए सामान की जरूरत थी। गुरु नानक ने अपने शिष्य भाई मर्दाना से कहा कि वो जाकर दाल-आटा और एक बड़ा सा पत्थर लेकर आएं। जैसे ही मर्दाना ने वह पत्थर उठाया, उसके नीचे से अचानक गर्म पानी की धार बहने लगी। तभी से वह गर्म पानी लगातार बह रहा है, जिसका इस्तेमाल आज भी गुरुद्वारे के लंगर के लिए किया जाता है।

इस जगह को क्यों माना जाता है खास?

मणिकरण साहिब को हिन्दू और सिख दोनों धर्मों के लोगों के लिए बहुत ही पवित्र और खास जगह माना जाता है।

  • यहां जो गरम पानी का कुंड है, उसे लेकर लोगों में गहरी आस्स्था है। मान्यता है कि इस पवित्र कुंड के पानी का जल छिड़कने से ही इंसान के सारे पाप धुल जाते हैं और उसे मुक्ति मिलता है।
  • यहां आने वाले लोगों के लिए यह गर्म पानी सिर्फ कोई देखने की अजूबी चीज नहीं है बल्कि उनकी धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है।

मणिकरण साहिब से जुड़ी खास बातें

अगर आप मणिकरण साहिब जाना चाहती हैं, तो उससे जुड़ी खास बातें प्वाइंटर्स में समझें-

  • मणिकरण साहिब गुरुद्वारा हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में है।
  • यह पार्वती घाटी के बीच मौजूद है।
  • यहां गर्म पानी का कुंड पूरे साल गर्म रहता है।
  • इसी गर्म पानी से लंगर के लिए चावल और दाल तैयार किए जाते हैं।
  • यह जगह समुद्र तल से 1760 मीटर की ऊंचाई पर है।
  • कुल्लू शहर से मणिकरण साहब करीब 40 किलोमीटर दूर है।
  • मणिकरण नाम को लेकर भगवान शिव और माता पार्वती की कथा प्रसिद्ध है।
  • सिखों में यह जगह गुरु नानक देव और उनके शिष्य मर्दाना से जुड़ी मान्यता के लिए भी खास है।

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Source- https://hpkullu.nic.in/tourist-place/manikaran/

https://himachalstory.com/location/manikaran-sahib/

Cover Image Credit- AI

FAQ
मणिकरण साहिब कब जाना चाहिए?
मणिकरण जाने के लिए मार्च से जून का समय सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान यहां का मौसम बहुत सुहावना रहता है और यात्रा आसान होती है।
क्या मणिकरण साहिब के इस कुंड के पानी में नहा सकते हैं?
जी हां, यहां महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग गर्म पानी के स्नानघर (बाथ) बने हैं। माना जाता है कि इसमें नहाने से त्वचा की बीमारियां ठीक होती हैं।
मणिकरण के पास प्रमुख दर्शनीय स्थल?
मणिकरण के पास कसोल, तोष गांव और खीरगंगा बहुत मशहूर हैं। यहां ट्रैकिंग और प्रकृति की खूबसूरती का आनंद लेने दूर-दूर से पर्यटक आते हैं।
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