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आज का गरबा कितना बदला? 2-ताली, 3-ताली और ‘हींच’ से समझिए पारंपरिक गरबा की बदलती कहानी

क्या आपको पता है कि आज हम नवरात्रि गरबा इवेंट में जो डांस करते हैं, वह पारंपरिक गरबा नृत्य से काफी अलग है? पारंपरिक गरबा में 2 ताली, 3 ताली और हींच जैसे स्टेप्स किए जाते हैं। नीचे लेख में जानें ट्रेडिशनल गरबा आधुनिकता के दौर में कितना बदल चुका है?
Updated:- 2026-10-09, 16:51 IST
garba me 2 tali aur 3 tali kya hota hai

नवरात्रि का पर्व शुरू होते ही हर जगह मां दुर्गा की पूजा-पाठ और पंडाल सजे हुए देखने को मिल जाते हैं। इसके साथ ही जगह-जगह पर गरबा और डांडिया की गूंज सुनाई देती हैं। हालांकि, आज के मॉर्डन क्लब्स, पार्टियों और हाई-फाई इवेंट्स में होने वाले गरबे को देखें, तो यह अपने पारंपरिक स्वरूप से काफी अलग नजर आता है। ट्रेडिशनल गरबा पहले मिट्टी के दीये के चारों ओर श्रद्धा और भक्ति भाव से खेला जाता था। वहीं आज यह पर्व एक कॉर्पोरेट इवेंट का रूप ले चुका है।

आज के इस लेख में हम आपको पारंपरिक गरबा की मूल शैली जैसे 2-ताली, 3-ताली और हींच के जरिए बताने जा रहे हैं कि आज यह नृत्य कितना बदल चुका था?

पारंपरिक गरबा की खासियत

शुरूआती दौर में गरबा केवल नृत्य नहीं बल्कि मां अंबे की उपासना का माध्यम था। इसमें किसी महंगे डीजे या बॉलीवुड गानों की जरूरत नहीं होती थी बल्कि महिलाएं और पुरुष ढोल, मंजीरे और पारंपरिक लोकगीतों की धुन पर गोल घेरे में घूमते थे। इसमें हर एक कदम और हाथ की मुद्रा का एक निश्चित अर्थ होता था। साथ ही इसमें 2 ताली, 3 ताली और हींच खास थे। नीचे जानें इनका मतलब।

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  • 2-ताली गरबा- इसमें दो बार तालियां बजाते हुए शरीर को एक निश्चित लय में मोड़ा जाता है। यह शुरुआती सीखने का चरण होता है जिसमें कोऑर्डिनेशन पर जोर दिया जाता है।
  • 3-ताली गरबा- यह थोड़ा जटिल और बेहद ऊर्जावान होता है। इसमें तीन बार तालियां बजाई जाती हैं, जो त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) या शक्ति के तीन स्वरूपों का प्रतीक मानी जाती हैं। इसमें हाथों की गति और पैरों के तालमेल का अनूठा संगम दिखता है।
  • हींच- हींच पारंपरिक गरबे का खास और रोमांचक हिस्सा है। इसमें शरीर को हल्का सा नीचे झुकाकर तेजी से आगे-पीछे या साइड में कदम बढ़ाए जाते हैं। यह पूरे माहौल में एक अलग ही ऊर्जा भर देती है।

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मॉडर्न समय के साथ गरबा में क्या और कितना बदलाव हुआ?

पारंपरिक गरबा से लेकर आज के चकाचौंध भरे कमर्शियल डीजे गरबा तक का सफर बेहद दिलचस्प रहा है। यह सिर्फ नृत्य शैली में बदलाव नहीं है बल्कि समाज, टेक्नोलॉजी और ग्लोबलाइजेशन के बदलते दौर की एक सफर है। नीचे जानें- 

1. आंगन की चौपाल से कम्युनिटी इवेंट की शुरूआत

शुरुआत में गरबा पूरी तरह से ग्रामीण और कम्यूनिटी इंवेंट हुआ करता था। गांव के चौक या किसी खुले आंगन में बीच में दीपक (जिसे गरबी कहा जाता है।) जलाकर महिलाएं और पुरुष गोल घेरे में घूमते थे। उस दौर में न कोई लाउडस्पीकर होता था और न ही किसी प्रोफेशनल इंस्ट्रूमेंट की जरूरत। ढोल, मंजीरा, और महिलाओं के पारंपरिक लोकगीत ही संगीत का एकमात्र साधन हुआ करते थे।

2. अर्बन माइग्रेशन और लाउडस्पीकर का इस्तेमाल

जैसे-जैसे लोग गांवों से शहरों की तरफ शिफ्ट हुए, गरबा ने भी शहरी गलियारों और हाउसिंग सोसाइटियों के परिसरों में अपनी जगह बनानी शुरू की। यहीं से पारंपरिक लोकगीतों की जगह माइक, लाउडस्पीकर और छोटे ऑर्केस्ट्रा ने ले ली। ढोल-मंजीरे के साथ ढोलक, कीबोर्ड और सिंथेटिक पैड्स का इस्तेमाल होने लगा। इस दौर में गरबा सोसाइटियों की बाउंड्री से बाहर निकलकर स्थानीय क्लबों और कम्युनिटी ग्राउंड्स तक फैल गया, जिससे इसमें भागीदारी का दायरा काफी बड़ा हो गया।

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3. टीवी, नवरात्रि उत्सव और कमर्शियल स्पॉन्सरशिप

90 के दशक के बाद जब ग्लोबलाइजेशन और मीडिया का विस्तार हुआ, तो गरबा पूरी तरह से एक बड़े कमर्शियल इवेंट में तब्दील होने लगा। टीवी चैनलों, बड़े ब्रांड्स और स्पॉन्सरर्स की एंट्री ने इसे रातों-रात एक पॉपुलर कल्चर बना दिया। अब गरबा सिर्फ भक्ति का पर्व नहीं रहा, बल्कि यह फैशन, ट्रेंड और बिजनेस का भी एक बहुत बड़ा मंच बन गया। पारंपरिक चनिया-चोली की जगह डिजाइनर ड्रेसेस और कॉर्पोरेट पास मिलने लगे, जिससे इस लोक पर्व का व्यावसायिक रूप सामने आया।

4. डीजे रीमिक्स और सोशल मीडिया रील्स का दौर

आज का दौर पूरी तरह से हाई-बीट डीजे रीमिक्स, फ्यूजन म्यूजिक और सोशल मीडिया का है। पारंपरिक लोकगीतों की जगह बॉलीवुड गानों के गरबा रीमिक्स ने ले ली है। इंस्टाग्राम रील्स पर ट्रेंड करने वाले फैंसी स्टेप्स ने पारंपरिक 2-ताली, 3-ताली और 'हींच' को पीछे छोड़ दिया है। आज का यूथ सामूहिक आनंद के बजाय अपनी परफॉर्मेंस को वीडियो में परफेक्ट दिखाने पर ज्यादा जोर देता है।

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अगर आपको भी अभी तक यही लगता था कि गरबा का नृत्य हमेशा से इसी फॉर्मेट में रहा है, जो हम वर्तमान में करते हैं, तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें। इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हर जिन्दगी के साथ

Source-

https://ich.unesco.org/en/RL/garba-of-gujarat-01962

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FAQ
मॉडर्न गरबा में पहनावे में क्या बदलाव आया है?
पारंपरिक कॉटन चनिया-चोली की जगह अब डिजाइनर, लाइट-वेट और इंडो-वेस्टर्न फ्यूजन ड्रेसेस ने ले ली है।
डिस्को गरबा या फ्यूजन गरबा क्या है?
पारंपरिक गरबा स्टेप्स को पॉप, बॉलीवुड और इलेक्ट्रॉनिक म्यूजिक के साथ मिलाकर करना ही डिस्को या फ्यूजन गरबा कहलाता है।
गरबा में दीपक और मिट्टी के मटके का क्या महत्व है?
छिद्रों वाले मिट्टी के मटके में जलता दीपक गर्भाशय (सृष्टि की उत्पत्ति) और माता की अखंड ज्योति का प्रतीक माना जाता है।
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