Chhath Puja Samagri 2024: छठ महापर्व का तीसरा दिन आज.. जानें संध्या अर्घ्य में क्या-क्या सामग्री लगेगा, यहां पढ़ें पूरी जानकारी

सनातन धर्म में छठ पूजा केवल एक पर्व ही नहीं है। यह भक्तों की आस्था का महापर्व है। इस महापर्व का आरंभ नहाय-खाय के साथ हो चुका है। आज महापर्व का तीसरा दिन है। दिन सुहागिन महिलाएं सूर्यदेव की आराधना करती हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए कामना करती हैं।
छठ पूजा पवित्रता का प्रतीक है। इस पर्व में शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसा कहा जाता है कि अगर आपकी कोई मनोकामना है, तो छठ पर्व शुभ फलदायी मानी जाती है। वहीं छठ पूजा की शुरूआत नहाय-खाय से शुरू होती है और इसका समापन सूर्यदेव को सुबह अर्घ्य देने के बाद होता है।
अब ऐसे में अगर आप छठ पूजा के लिए सामग्री के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए ही हैं। आइए इस लेख में हम आपको ज्योतिषाचार्य पंडित अरविंद त्रिपाठी द्वारा बताए सामग्री के बारे में जानते हैं।
छठ पूजा के लिए पूरी सामग्री यहां पढ़ें
छठ पूजा के लिए किन-किन सामग्री की आवश्यकता होती है। इसके लिए सामग्री की पूरी लिस्ट एक बार जरूर पढ़ लें।
- नई साड़ी
- बांस की दो बड़ी-बड़ी टोकरियां
- एक कलश (तांबा, सोना)
- पीतल की थाली
- बांस से बनी सूप
- 5 या 11 गन्ने
- शकरकंदी
- पान और सुपारी
- हल्दी
- मूली और अदरक
- मीठा डाभ नींबू
- शरीफा
- केला
- नाशपाती
- सिंघाड़ा
- पानी वाला नारियल
- मिठाई
- गुड़
- गेहूं
- चावल का आटा
- ठेकुआ
- चावल
- सिंदूर
- कलावा
- दीपक
- शहद
- धूप
- कुमकुम
- सुथनी
सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए सामग्री
छठ पूजा के पहले दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है जिसे संध्या अर्घ्य के नाम से जाना जाता है।
- इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए बांस या पीतल की टोकरी या आप बांस से बने सूप का उपयोग कर सकते हैं।
- इसके अलावा आप तांबे, पीतल या सोने के कलश से सूर्यदेव को शाम के समय अर्घ्य दे सकते हैं।
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छठी माता को चढ़ाने के लिए सामग्री
सूर्यदेव की पूजा करने से पहले छठी माता की पूजा-अर्चना की जाती है।
- छठी माता का पूजा करने के दौरान उन्हें सिंदूर, अक्षत, चना, गुड़, मिठाई, सात प्रकार के फल, सुहाग का सामान, घी का बना ठेकुआ आदि अर्पित करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है।
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बांस की टोकरी में सूर्यदेव को चढ़ाने के लिए सामग्री
- बांस की टोकरी में भगवान सूर्य देव को अर्पित करने के लिए भोग रखते हैं। जिनमें ठेकुआ, मखाना, अक्षत, भुसवा, सुपारी, अंकुरी, गन्ना, बड़ा निंबू आदि चीजें होती हैं।
- टोकरी में 5 प्रकार के फल (शरीफा, नारियल, केला, नाशपाती और डाभ) और 5 प्रकार की मिठाई रखी जाती है।
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Image Credit- HerZindagi
- नहाय खाय क्या है?
- नहाय-खाय के साथ छठ पूजा का आरंभ होता है। इस दिन व्रत करने वाले व्यक्ति किसी पवित्र नदी या तालाब में स्नान करते हैं और प्रसाद के रूप में चावल, चने और लौकी की सब्जी भोजन के तौर पर ग्रहण करते हैं।
- छठ पूजा के तीसरे दिन किन पूजा सामग्री की जरूरत होती है?
- गन्ना, कपूर, दीपक, अगरबत्ती, बाती, कुमकुम, चंदन, धूपबत्ती, माचिस, फूल, हरे पान के पत्ते, साबुत सुपाड़ी, शहद, हल्दी, मूली, पानी वाला नारियल, अक्षत, अदरक का हरा पौधा, शकरकंदी, सुथनी, मिठाई, पीला सिंदूर, दीपक, घी, गुड़, गेंहू की जरूरत होती है।
- छठ पूजा के तीसरे दिन क्या होता है?
- छठ पूजा के तीसरे दिन सुबह को सूर्य को अर्घ्यछठ पूजा की जाती है।
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