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वर्किंग मॉम और ब्रेस्टफीडिंग, काम और ममता के बीच ऐसे बनाएं सही बैलेंस

वर्किंग मॉम्स के लिए नौकरी और ब्रेस्टफीडिंग के बीच संतुलन बनाने के तरीके इस लेख में बताए जा रहे हैं। जानते हैं एक्सपर्ट से...
Updated:- 2026-08-07, 17:04 IST
breastfeeding tips

बच्चे के विकास और अच्छी सेहत के लिए मां का दूध सबसे जरूरी माना जाता है। हालांकि, यह एक नेचुरल प्रक्रिया है, लेकिन हर मां का अनुभव इसे लेकर अलग होता है। कुछ महिलाएं इसे बहुत जल्दी सीख जाती हैं, तो कुछ को इसमें थोड़ा वक्त, सब्र और सही सलाह की जरूरत होती है। दूध पिलाने का कोई एक फिक्स तरीका नहीं होता, बस सबसे जरूरी बात यह है कि मां और बच्चा दोनों इसमें पूरी तरह सहज महसूस करें। इसके लिए हमने आर्टसाना इंडिया के सीईओ, श्री राजेश वोहरा (Mr. Rajesh Vohra) से बात की है। जानते हैं आगे...

1. वर्किंग मॉम्स के लिए जॉब और ब्रेस्टफीडिंग में बैलेंस कैसे बनाएं?

आजकल की बिजी जीवनशैली में नौकरी के साथ बच्चे को स्तनपान कराना कई महिलाओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि, आधुनिक संसाधनों, स्मार्ट तकनीकों और थोड़ी सी पूर्व योजना की मदद से वर्किंग मॉम्स अपने करियर और बच्चे की सेहत दोनों को बिना किसी तनाव के संभाल सकती हैं।

  • ब्रेस्ट पंप का सही उपयोग: मैनुअल या इलेक्ट्रिक ब्रेस्ट पंप वर्किंग मॉम्स के लिए बेहद मददगार साबित होते हैं। इनकी मदद से आप काम पर जाने से पहले या ऑफिस में समय निकालकर दूध एक्सप्रेस करके सुरक्षित रूप से स्टोर कर सकती हैं।

breastfeeding mother

  • अनुपस्थिति में भी निरंतर पोषण: जब आप काम के सिलसिले में घर से बाहर होती हैं, तब भी परिवार के सदस्य या केअरटेकर आपके द्वारा स्टोर किए गए दूध को बच्चे को पिला सकते हैं। इससे मां की गैरमौजूदगी में भी शिशु को मां के दूध का पूरा पोषण मिलता रहता है।
  • ब्रेस्ट पैड्स का इस्तेमाल: ऑफिस में काम करते समय या सफर के दौरान दूध लीक होने की समस्या आम बात है। डिस्पोजेबल या रियूजेबल ब्रेस्ट पैड्स का उपयोग करने से कपड़े खराब नहीं होते और आप दिनभर बिना किसी झिझक के आत्मविश्वासी महसूस करती हैं।

2. शुरुआती महीनों में ब्रेस्टफीडिंग क्यों है सबसे खास?

एक्सपर्ट के मुताबिक, बच्चे के जन्म के शुरुआती 6 महीने उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बहुत अहम होते हैं। मां के दूध में बच्चे की जरूरत के हिसाब से सारे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसमें लगभग 80% पानी होता है, जो बच्चे के शरीर को हमेशा हाइड्रेटेड रखता है। ऐसे में ये बच्चे के लिए सही ऑप्शन है।


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3. ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मां का आराम भी है जरूरी

जब मां खुद को आरामदायक महसूस करवाती है, तो बच्चे को दूध पिलाना काफी आसान हो जाता है।

  • सही पोजीशन चुनना: दिन-रात दूध पिलाने से पीठ और गर्दन में दर्द हो सकता है, इसलिए हमेशा टेक लगाकर सही मुद्रा में बैठें।

  • नर्सिंग पिलो का इस्तेमाल: यह पिलो बच्चे को सही ऊंचाई पर रखता है, जिससे मां के कंधों पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता।
  • निप्पल शील्ड की मदद: शुरुआती दिनों में अगर दर्द या अकड़न महसूस हो, तो निप्पल शील्ड की मदद से बिना किसी परेशानी के दूध पिलाया जा सकता है।

ब्रेस्टफीडिंग हर मां के जीवन का एक खूबसूरत लेकिन जिम्मेदारी भरा दौर होता है। सही जानकारी, आधुनिक प्रॉडक्ट्स और परिवार के सपोर्ट से इस सफर को बहुत आसान बनाया जा सकता है। 

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Images: magnific

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