मां और पिता के साथ बच्चे अलग व्यवहार क्यों करते हैं? जानें क्या है पेरेंटिंग में इमोशनल कंफर्ट?

अक्सर देखा जाता है कि एक ही बच्चा अपने माता-पिता के साथ अलग-अलग तरीके से व्यवहार करता है। वह पिता की बात एक बार में मान लेता है, लेकिन मां के सामने छोटी-छोटी बातों पर जिद करने लगता है। वहीं कभी-कभी स्थिति इसके उलट भी होती है। कुछ बच्चे एक अभिभावक के साथ बेहद बातें करते हैं, जबकि दूसरे के सामने एकदम शांत रहते हैं। जब बच्चा परेशान होता है तो वह अपनी मां के पास भागता है, लेकिन खेलकूद या अपनी मांगें पूरी कराने के लिए पिता के पास जाता है।
अभिभावकों के लिए यह स्थिति अक्सर उलझन भरी हो जाती है। उनके मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बच्चा एक के साथ इतना सहज और दूसरे के साथ इतना सख्त क्यों है? लेकिन बाल मनोविज्ञान के अनुसार, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि बच्चा किसी एक को कम या ज्यादा प्यार करता है। जी हां, इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...
बच्चों का हर अभिभावक से अलग जुड़ाव
बच्चा अपने माता-पिता में से प्रत्येक के साथ एक अलग और अनोखा रिश्ता कायम करता है। यह रिश्ता रोजाना के अनुभवों से आकार लेता है। इस बात से फर्क पड़ता है कि बच्चे के रोने पर उसे कौन चुप कराता है, उसके साथ कौन खेलता है, पढ़ाई में कौन मदद करता है और सबसे महत्वपूर्ण यह कि जब बच्चा मानसिक रूप से परेशान होता है, तो कौन सा अभिभावक किस तरह प्रतिक्रिया देता है।

क्यों ज्यादा परेशान करता है बच्चा?
पेरेंटिंग में अक्सर कहा जाता है कि बच्चे जिस इंसान के साथ सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं, उसी के सामने अपना सबसे जिद्दी रूप दिखाते हैं। एक्सपर्ट भी इसे सच्चाई मानते हैं, क्योंकि बच्चा अपने भरोसेमंद व्यक्ति के सामने अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर कर पाता है। हालांकि, हर बार जिद या गुस्सा करने का कारण सिर्फ यही नहीं होता।
थकान, भूख, दिनभर का तनाव और आसपास का माहौल भी बच्चे के बर्ताव को प्रभावित करते हैं। स्कूल में दिनभर नियमों का पालन करने के बाद घर लौटते ही बच्चे का रो पड़ना इस बात का संकेत है कि वह दिनभर की मानसिक थकान को बाहर निकाल रहा है। ऐसे में वह पेरेंट्स के पास जाता है।
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पेरेंटिंग में क्या ध्यान देना चाहिए?
पेरेंट्स को बच्चे के व्यवहार की तुलना आपस में करने की जगह कुछ खास बातों पर ध्यान देना चाहिए-
- क्या बच्चा चोट लगने या परेशान होने पर आपके पास आता है?
- क्या वह अपनी मन की बात बिना किसी डर के आपसे शेयर कर पाता है?
- क्या आप बिना गुस्सा किए बच्चे को सही और गलत का अंतर समझा पाते हैं?
- लड़ाई या नाराजगी के बाद क्या आप दोनों का रिश्ता फिर से सामान्य हो जाता है?
बच्चों को ऐसे दो अभिभावकों की जरूरत नहीं होती जो बिल्कुल एक जैसा व्यवहार करें। उन्हें ऐसे माता-पिता की जरूरत होती है जो उनकी बात सुनें और उन्हें समझें।

निष्कर्ष
बच्चों का माता-पिता के साथ अलग-अलग व्यवहार करना किसी समस्या का संकेत नहीं है, बल्कि यह उनके विकास की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। बच्चा अपने दोनों अभिभावकों से अलग-अलग चीजें सीखता है और उनसे अलग तरह की उम्मीदें रखता है।
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- पेरेंटिंग में इमोशनल कंफर्ट क्या है?
- इमोशनल कंफर्ट का अर्थ है बच्चे को ऐसा माहौल देना जहां वह बिना किसी डर या झिझक के अपनी खुशी, डर, गुस्सा और दुख व्यक्त कर सके।
- जब बच्चा अचानक रोने या गुस्सा करने लगे तो क्या करें?
- बच्चे पर तुरंत चिल्लाने के बजाय शांत रहें, उसकी भावना को समझें और उसे सुरक्षित महसूस कराएं कि आप उसकी मदद के लिए मौजूद हैं।
- स्कूल से आने के बाद बच्चा चिड़चिड़ा क्यों हो जाता है?
- दिनभर स्कूल के अनुशासन और पढ़ाई के मानसिक दबाव को झेलने के बाद घर आकर बच्चा मानसिक रूप से रिलेक्स होता है, जिससे उसकी थकान चिड़चिड़ेपन के रूप में बाहर आती है।
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