प्यार में पड़ते ही क्यों बदल जाता है इंसान का व्यवहार? जानें दिमाग का खेल
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शुरुआत में जब किसी इंसान को किसी से मोहब्बत होती है, तो उसका व्यवहार अपने आप बदलने लगता है। अक्सर उसमें कई तरह के ऐसे अजीब से बदलाव देखने को मिलते हैं, जो उसमें पहले कभी नहीं होते थे। जैसे कि रातभर जागकर फोन पर बात करना, हर छोटी-छोटी बात पर मुस्कुराना, सबसे प्यार से बात करना और सिर्फ एक इंसान का नाम सुनते ही खुशी से झूम उठना। यह सब प्यार के शुरुआती दौर में आम बात है।
विज्ञान और न्यूरोसाइंस में इसका एक अलग ही महत्व माना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्यार सिर्फ दिल की कोई भावना मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारे दिमाग के अंदर चलने वाले केमिकल्स और हॉर्मोन्स का एक खेल है। हमारा दिमाग ऐसे सिग्नल्स छोड़ता है, जो हमारे पूरे व्यवहार को बदलकर रख देते हैं। आखिर प्यार में पड़ते ही इंसान का बर्ताव इतना क्यों बदल जाता है? आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
प्यार में दोनों पार्टनर का व्यवहार
न्यूरोसाइंस और मनोविज्ञान के प्रतिष्ठित शोध पत्र और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल का आधिकारिक स्वास्थ्य प्रकाशन मंच के अनुसार - जब हम किसी के प्यार में होते हैं, तो हमारे ब्रेन के कई हिस्से एक साथ एक्टिव हो जाते हैं और न्यूरोट्रांसमीटर्स रिलीज होने लगते हैं।
डोपामाइन हमारे दिमाग का रिवार्ड सेंटर है। जब हम अपने पार्टनर से मिलते हैं या उनका मैसेज देखते हैं, तो दिमाग भारी मात्रा में डोपामाइन छोड़ता है। इससे बहुत ज्यादा खुशी और एक नशा जैसा महसूस होता है, ठीक वैसे ही जैसे किसी एडिक्शन में होता है।
प्यार के शुरुआती दिनों में एक अलग ही उत्साह और बेचैनी देखने को मिलती है। इस दौरान हॉर्मोन यानी कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है, जिससे दिल की धड़कनें भी तेज होने लगती हैं। प्यार में पड़ते ही हमारे दिमाग में सेरोटोनिन का स्तर कम हो जाता है। यही वजह है कि हम चाहकर भी उस इंसान के बारे में सोचना बंद नहीं कर पाते और लगातार उसी के ख्यालों में खोए रहते हैं।
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व्यवहार में क्यों आते हैं इतने बड़े बदलाव?
दिमाग के रासायनिक बदलावों के कारण इंसानी बर्ताव में कई बड़े बदलाव आते हैं। दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम के लगातार एक्टिव रहने के कारण व्यक्ति का ध्यान अपने जरूरी कामों से हटकर सिर्फ और सिर्फ अपने पार्टनर की तरफ ही केंद्रित होने लगता है।
न्यूरोसाइंस की मानें तो प्यार में पड़ने पर दिमाग का वह हिस्सा थोड़ा सुस्त हो जाता है, जो दूसरों के गलत व्यवहार को परखता या आलोचना करता है। यही कारण है कि हमें अपने पार्टनर में कोई कमी नजर नहीं आती और वह हमें दुनिया का सबसे प्यारा इंसान लगने लगता है। डोपामाइन के हाई लेवल की वजह से इंसान बहुत ज्यादा एनर्जेटिक भी महसूस करता है और अपने पार्टनर को इंप्रेस करने के लिए हर संभव कोशिश करता है।
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निष्कर्ष: प्यार दिल से होने के साथ-साथ हमारे दिमाग का भी एक खेल होता है। डोपामाइन की वजह से हमारे शरीर में ये हॉर्मोन्स ही हमारे पार्टनर के प्रति हमारे व्यवहार को तय करते हैं। जब भी कोई इंसान प्यार में होता है, तो उसका यह बदला हुआ व्यवहार इन्हीं अंदरूनी हॉर्मोन्स की वजह से दिखाई देता है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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- प्यार का यह नशा या क्रेज कितने समय तक रहता है?
- न्यूरोसाइंस के मुताबिक, शुरुआती रोमांटिक आकर्षण और तीव्र भावनाएं आमतौर पर 6 महीने से 2 साल तक रहती हैं, जिसके बाद रिश्ता अधिक स्थिर और परिपक्व हो जाता है।
- क्या 'लव एट फर्स्ट साइट' जैसी कोई वैज्ञानिक सच्चाई है?
- वैज्ञानिकों का कहना है कि पहली नजर का आकर्षण केवल कुछ सेकंड में ट्रिगर होने वाले विजुअल सिग्नल्स और हॉर्मोनल स्पाइक का नतीजा होता है।
- ब्रेकअप के बाद इतना दर्द क्यों होता है?
- ब्रेकअप के समय दिमाग में डोपामाइन का स्तर अचानक बहुत गिर जाता है, जिससे बिल्कुल वैसे ही शारीरिक और मानसिक लक्षण महसूस होते हैं जैसे किसी नशे की लत छूटने पर होते हैं।
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