बेटों की परवरिश पर दीया मिर्जा बोलीं- संकोच छोड़ बच्चों से करें इन मुद्दों पर बात, तभी थमेंगे यौन उत्पीड़न के मामले

बच्चों की परवरिश की बात आती है तो पेरेंट्स अक्सर पढ़ाई, करियर और अच्छी आदतों पर ही ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन बच्चों को रिश्तों, सम्मान, अपनी और दूसरे की बाउंड्रीज और सहमति के बारे में समझाना भी उतना ही जरूरी है। खासकर बेटों की परवरिश को लेकर यह बातचीत कम उम्र से ही शुरू कर देनी चाहिए।
दरअसल, हाल ही में एक मीडिया चैनल को दिए गए इंटरव्यू और इंस्टाग्राम पोस्ट में एक्ट्रेस और एक बेटे की मां दीया मिर्जा ने भी इसी बात पर जोर दिया। उनका कहना है कि अगर हम लड़कियों के लिए सुरक्षित और अच्छा माहौल चाहते हैं, तो लड़कों को भी बचपन से सम्मान और बराबरी का मतलब समझाना होगा। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-

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बेटों को बचपन से सिखाएं महिलाओं का सम्मान करना
दीया मिर्जा का कहना है कि बच्चों को यह समझना जरूरी है कि घर में महिलाओं के साथ किस तरह बात की जाती है और उनके साथ कैसा बिहेवियर होता है। बच्चे सिर्फ माता-पिता की कही बातें नहीं सुनते बल्कि घर में होने वाली चीजों को देखकर भी बहुत कुछ सीखते हैं। इसलिए घर के काम, बच्चों की देखभाल और परिवार की जिम्मेदारियों को सिर्फ मां या किसी एक इंसान पर छोड़ना सही नहीं है। यह काम पूरे परिवार को मिलकर करना चाहिए।
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कंसेंट का मतलब बच्चों को आसान भाषा में समझाएं
इसके अलावा दीया मिर्जा का यह भी कहना है कि सहमति यानी Consent को लेकर बच्चों से बात करने में पेरेंट्स को शर्म या झिझक महसूस नहीं करनी चाहिए। पेरेंट्स उम्र के हिसाब से बच्चे को समझा सकते हैं कि किसी को टच करना, गले लगाना या उसके करीब जाना तभी ठीक है जब सामने वाला भी इसके लिए रेडी हो। दीया ने इस पर पूरा जोर दिया है कि सहमति सिर्फ किसी के 'ना' कहने का इंतजार करना नहीं है। सामने वाले कितना कंफर्टेबल है, यह भी समझना जरूरी है।
रिजेक्शन को न समझें अपमान
बच्चों को यह भी सिखाना जरूरी है कि अगर कोई उनके साथ दोस्ती नहीं करना चाहता, बात नहीं करना चाहता या किसी रिश्ते के लिए मना कर देता है, तो उसे इस फैसले का सम्मान करना चाहिए। किसी के मना करने को अपनी बेइज्जती समझना या सामने वाले पर दबाव बनाना सही तरीका नहीं है। जब बच्चों को बचपन से ही यह समझ मिलेगी तो बड़े होकर वे दूसरों की सहमति और फैसले का भी सम्मान करेंगे।

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बॉडी और प्राइवेट पार्ट्स पर भी बच्चों से खुलकर बात करें पेरेंट्स
दीया के मुताबिक, बच्चों को अपने शरीर के बारे में बात करने में शर्म महसूस नहीं होनी चाहिए। माता-पिता उनकी उम्र के हिसाब से बच्चों को शरीर के अलग-अलग हिस्सों के सही नाम बता सकते हैं और उन्हें समझा सकते हैं कि शरीर की कुछ जगहें प्राइवेट होती हैं। अगर बच्चा शरीर या यौन संबंध से जुड़ा कोई सवाल पूछता है, तो उसे डांटने या चुप कराने के बजाय उसकी उम्र के हिसाब से सही जानकारी दें।
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गलत जानकारी के बारे में भी करें बात
बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं, उन्हें इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए कई तरह की चीजें देखने को मिलती हैं। इसलिए माता-पिता को उम्र के हिसाब से यह समझाना चाहिए कि इंटरनेट पर दिखाई जाने वाली हर चीज सही नहीं होती है। खासकर इंटिमेसी या जबरदस्ती के वीडियोज को लेकर बच्चों के सवालों को नजरअंदाज न करें बल्कि उन्हें सही जानकारी दें।
बेटों को गलत व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाना सिखाएं
दीया ने यह सब बातें इसलिए कही हैं क्योंकि आए दिन महिलाओं और बच्चियों के प्रति यौन उत्पीड़न के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे में दीया का मानना है कि लड़कों को सिर्फ खुद गलत काम न करने की सीख देना काफी नहीं है। अगर वे अपने आसपास किसी महिला या लड़की के साथ गलत व्यवहार देखते हैं, तो उन्हें उसके खिलाफ आवाज उठाना भी सीखना चाहिए।
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- बेटों को बचपन से ही महिलाओं का सम्मान करना कैसे सिखाएं?
- बच्चों को सिखाने की शुरुआत घर के माहौल से ही करें। घर के काम और जिम्मेदारियों को सिर्फ मां पर न छोड़ें बल्कि मिलकर बांटें। बच्चे माता-पिता के व्यवहार को देखकर सबसे ज्यादा सीखते हैं, इसलिए उनके सामने खुद भी बराबरी और सम्मान का उदाहरण पेश करें।
- बच्चों को आसान भाषा में कंसेंट यानी सहमति का मतलब कैसे समझाएं?
- बच्चों को समझाएं कि किसी को छूना, गले लगाना या साथ खेलने के लिए कहना तभी सही है जब सामने वाला भी इसके लिए पूरी तरह सहज हो।
- अगर कोई बच्चा रिजेक्शन का सामना करता है तो पेरेंट्स उसे कैसे संभालें?
- बच्चों को सिखाएं कि अगर कोई उनसे दोस्ती या बात करने के लिए मना करता है, तो उसके इस फैसले का सम्मान करना चाहिए। किसी की 'ना' को अपनी बेइज्जती न समझें और न ही सामने वाले पर कोई दबाव बनाएं।
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