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Kaun Hai Menaka Guruswamy: कौन हैं मेनका गुरुस्वामी? राज्यसभा चुनाव के जरिए बनीं देश की पहली LGBTQ सांसद

डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेकर इतिहास रचा, वे भारतीय संसद में पहुंचने वाली पहली 'Openly LGBTQIA+' प्रतिनिधि बनीं। तृणमूल कांग्रेस द्वारा नामांकित मेनका सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील हैं, जिन्होंने धारा 377 को रद्द कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 
Updated:- 2026-04-07, 14:01 IST
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भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 6 मार्च की तारीख एक सुनहरे अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। जी हां, डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने इस दिन राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेकर इतिहास रच दिया। इसी के साथ वह भारतीय संसद में पहुंचने वाली 'Openly LGBTQIA+' समुदाय की पहली प्रतिनिधि बनी हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा नामांकित किए जाने के बाद मेनका गुरुस्वामी राज्यसभा चुनाव में चुनी गईं। उनकी यह जीत केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि समाज के उस वर्ग के लिए भी बड़ी बात है जो लंबे समय तक प्रतिनिधित्व (Representation) से दूर रहा। ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि कौन हैं मेनका, अगर आप भी यहीं जानना चाहती हैं तो आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि कौन हैं डॉ. मेनका गुरुस्वामी। पढ़ते हैं आगे...

कौन हैं डॉ. मेनका गुरुस्वामी?

डॉ. मेनका गुरुस्वामी सुप्रीम कोर्ट की एक सीनियर वकील हैं। उन्हें देश के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों में कानूनी बहस करने के लिए जाना जाता है। उनकी सबसे बड़ी पहचान 2018 का वह ऐतिहासिक फैसला है, जिसने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को रद्द कर दिया। 

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इस कानूनी लड़ाई का नेतृत्व करते हुए उन्होंने भारत में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई थी।

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शिक्षा और करियर का सफर

मेनका गुरुस्वामी का एजुकेशन सफर भी बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 2001 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से सिविल लॉ (BCL) में ग्रेजुएशन किया और फिर हार्वर्ड लॉ स्कूल से मास्टर्स (LLM) की डिग्री प्राप्त की। इसके असावा ऑक्सफोर्ड के रोड्स हाउस के मिलनर हॉल में उनका पोर्ट्रेट लगा है। यह सम्मान पाने वाली वह पहली भारतीय और दुनिया की मात्र दूसरी महिला हैं।

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प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो दुनिया में उन्होंने भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल अशोक देसाई को अपना गुरु माना है, जिनसे उन्होंने वकालत की बारीकियों को सीखने का मौका मिला। उन्होंने न्यूयॉर्क की प्रसिद्ध लॉ फर्म 'डेविस पोल्क एंड वार्डवेल' में भी काम किया, लेकिन लास्ट में अपनी जड़ों की ओर लौट आईं और दिल्ली में रहकर प्रैक्टिस शुरू की। इससे अलग 2019 में टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में शामिल किया था।

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Images: Freepik/shutterstock

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