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कौन हैं ममता कालिया, जिन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से किया जाएगा सम्मानित?

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित ममता कालिया हिंदी की वरिष्ठ लेखिका है। उन्हें यह सम्मान उनकी संस्मरण जीते जी इलाहाबाद के लिए मिला है। चलिए नीचे लेख में जानिए कहां से रिश्ता रखती हैं ये लेखिका।
Updated:- 2026-03-20, 15:14 IST
Mamta Kalia koun hain

'शहर पुड़िया में बांध कर हम नहीं ला सकते साथ तो क्या!' यह लाइन ममता कालिया जी की संस्मरण से है, जिसका नाम 'जीते जी इलाहाबाद' है। इस किताब के लिए ममता कालिया को साहित्य अकादमी पुरस्कार से 31 मार्च को नई दिल्ली में अकादमी पुरस्कार में सम्मानित किया जाएगा।

ममता कालिया कई दशकों से अपनी लेखनी के जरिए समाज के मध्यम वर्ग, खासकर महिलाओं के संघर्ष और उनकी बदलती मानसिक स्थिति को बड़े ही बेबाक तरीके से लिखती रहती हैं। चलिए नीचे लेख में जानते हैं ममता कालिया कहां की रहने वाली और क्या करती हैं?

ममता कालिया कहां की रहने वाली हैं?

mamata kaliya

2 नवंबर 1940 को उत्तर प्रदेश के मथुरा में ममता कालिया का जन्म हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. किया। महिला सेवा सदन डिग्री कॉलेज प्रयागराज की ममता कालिया पूर्व प्राचार्या रह चुकी हैं। वे भारतीय महिला परिषद की निर्देशिका भी रही हैं।

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ममता कालिया की लिखी गईं रचनाएं और सम्मान

Literary Academy Award

ममता कालिया को उनके उपन्यास 'बेघर' और 'नरक दर नरक' से प्रसिद्धि मिली। इसके अलावा 'सीट नंबर छह' और 'जांच अभी जारी' ने पाठकों के बीच वाहवाही लूटी। वहीं उनकी उपन्यास 'दुक्खम सुक्खम' लिए उन्हें पहले ही प्रतिष्ठित व्यास सम्मान से सम्मानित भी किया गया है। ममता कालिया को यशपाल स्मृति सम्मान, साहित्य भूषण और महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान जैसे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

किन लोगों को दिया जाता है साहित्य अकादमी पुरस्कार?

साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारतीय साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा सम्मान है। यह उन भारतीय लेखकों को दिया जाता है, जिन्होंने साहित्य जैसे उपन्यास, कविता, कहानी, आलोचना या निबंध में उत्कृष्ट रचना की हो। यह सम्मान उन लेखकों को दिया जाता है जिनकी पुस्तकें पिछले पांच वर्षों के भीतर प्रकाशित हुई हों। पुरस्कार के रूप में एक उत्कीर्ण ताम्रफलक, शॉल और 1,00,000 रुपये नकद राशि दी जाती है।

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