शौक में किया जो काम आज वही बना रजनी पंडित की पहचान, कुछ ऐसा रहा इंडिया की पहली फीमेल प्राइवेट इंवेस्टीगेटर का सफर

आपके जीवन में भी ऐसा कोई पल जरूर आया होगा, जहां आपको छोटी-मोटी जासूसी करनी पड़ी होगी। किसी सिचुएशन को लेकर अगर दुविधा हो, तो हम सभी का दिमाग जासूसों की तरह दौड़ने लगता है। आपके ग्रुप में भी कोई न कोई ऐसा व्यक्ति जरूर होगा जिसे आप जासूस कहते होंगे। जब भी इस फील्ड के बारे में बात करो, तो हमें लगता है कि यह पुरुष प्रधान क्षेत्र है।
इस फील्ड में महिलाओं के नाम शायद आपने भी न सुने हों। आज हम आपके साथ जो प्रोफाइल शेयर करने वाले हैं, वो एक ऐसी शख्सीयत हैं जिन्होंने इस पुरुष प्रधान फील्ड में अपना नाम बनाया। रजनी पंडित जिन्हें भारत की पहली महिला प्राइवेट इंवेस्टिगेटर कहा जाता है। भारत की शर्लॉक होम्स और लेडी जेम्स बॉन्ड जैसी उपाधियां भी उन्हें दी गई हैं। उन्होंने समाज में पहले से स्थापित रूढ़िवादियों को तोड़ा और आज कई महिलाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है।
हरजिंदगी की खास सीरीज 'शक्ति रूपेण संस्थिता' में हम आपको ऐसी ही महिलाओं से रूबरू करवाएंगे जो अपने काम और जुनून के कारण शक्ति के स्वरूप से कम नहीं हैं। इसी कड़ी में हमने रजनी पंडित से खुलकर बात की और उनके सफर के बारे में विस्तार से जाना।
कॉलेज में शौकिया तौर पर सुलझाया पहला केस
पालघर में जन्मी रजनी पंडित ने अपनी पढ़ाई मुंबई से की। कॉलेज में पढ़ाई कर रहीं रजनी को एक दिन अपनी क्लासमेट पर शक हुआ। उनकी क्लासमेट घर से कॉलेज की एक्स्ट्रा क्लासेस करके जाती थीं। रजनी को मामला बिगड़ता दिखने लगा, तो उन्होंने बिना किसी को बताए इसकी तहकीकात शुरू की।
धीरे-धीरे उन्हें पता चला कि उनकी क्लासमेट झूठ बोलकर घर देर से पहुंचती है। वह गलत संगत का शिकार हो चुकी है। इसकी जानकारी जब रजनी ने लड़की के घरवालों को दी, तो उन्होंने रजनी की बात बिल्कुल नहीं सुनी। रजनी बताती हैं, "उस लड़की के घरवालों ने मुझे ही झूठा ठहराया, लेकिन जब अगली बार मैं उनके पास सबूत लेकर पहुंची, तब उन्हें पता लगा कि उनकी बेटी वाकई उनसे झूठ बोलकर बाहर जाती है।"
हालांकि, इस केस के बाद उन्होंने दोबारा सोचा भी नहीं था कि वह जासूस बनेंगी। इस बारे में वह कहती हैं, "इस मामले के बाद, मैं अपनी आम जिंदगी में व्यस्त हो गई थी। घर और कॉलेज के बीच यह दिमाग में नहीं आया कि मुझे जासूसी करनी है।"
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रंजनी को सड़क चलते मिला पहला पेड केस
कॉलेज खत्म होने के काफी समय बाद तक रजनी ने एक कंपनी में काम किया। जब वह अपने काम में पूरी तरह से व्यस्त थी, तब उन्हें वो केस मिला जिससे उनके जासूस बनने के सफर की शुरुआत हुई।
वह कहती हैं, "एक दिन मैं ऑफिस से घर लौट रही थी, तो देखा कि पड़ोस में रह रही एक जानकार रो रही थी। मैंने उनसे रोने का कारण पूछा, तो वह बताने लगी कि कुछ समय पहले उनके घर में शादी हुई है। तभी से घर में चोरियां बढ़ गई हैं। मैं बहू से सीधे पूछूंगी, तो वह भी खराब लगेगा। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूं। मुझे लगा कि मैं उनकी मदद कर सकती हूं और मैंने उनसे पूछा कि अगर वह चाहें, तो मैं यह पता लगा सकती हूं। उनकी हामी के बाद, मैंने जासूसी शुरू कर दी।
मैंने देखा कि उनका छोटा बेटा रोज़ सभी के जाने के बाद घर आता था और कुछ न कुछ लेकर जाता था। मैंने सबूत इकट्ठे किए और एक दिन सभी को बुलाकर सच बताया। उनके छोटे बेटे ने अपनी गलती स्वीकार ही नहीं की और अपनी भाभी पर इल्जाम लगाने लगा। यह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने सारी तस्वीरें उनके आगे कर दी। बाद में पता चला कि उसकी कुछ हरकतों के बारे में भाभी को पता चला गया था और उसे डर था कि कहीं भाभी किसी को बताए नहीं, तो वह चोरी करके भाभी को फंसाना चाहता था।"
बस यहीं से रजनी में आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने ठान लिया कि अब वह इसी फील्ड में जाना चाहती हैं। उन्होंने अपने शौक को ही करियर बना लिया।
कई लोगों को कर चुकी हैं इस फील्ड में प्रशिक्षित
यह एक ऐसा फील्ड था जिसमें शुरू से ही पुरुषों का जोर रहा, लेकिन रजनी को इससे फर्क नहीं पड़ा। उनके रिश्तेदारों और परिवार वालों ने जब इस करयियर को लेकर उनसे सवाल किए, तो भी वह डटी रहीं। हालांकि, उनके माता-पिता उनके जुनून को देखकर उनके साथ खड़े थे, लेकिन रिश्तेदारों के ताने कभी बंद नहीं हुए।
1986 में रजनी ने अपनी एक एजेंसी 'रजनी पंडित डिटेक्टिव सर्विसेज' शुरू की। शुरू में उनका भाई विनोद पंडित उनके साथ केस सुलझाता था, लेकिन फिर धीरे-धीरे लोग उनके पास सीखने के भी आए। एक समय ऐसा था जब रजनी 30-40 केसेस एक बार में संभाल रही थीं। उन्होंने अपने अंडर नए बच्चों को लिया और उन्हें ट्रेन करना शुरू किया। इस फील्ड में वह 100 से ज्यादा बच्चों को ट्रेन कर चुकी हैं और इसमें लड़के ही नहीं, लड़कियां भी शामिल हैं।
बाला साहेब ठाकरे से मिली थी सबसे बड़ी शाबाशी
रजनी ने अपने काम से इतनी पहचान बना ली थी कि लोग उन्हें जानने लगे थे। सभी उन्हें लेडी जेम्स बॉन्ड कहने लगे थे। बड़ी-बड़ी पार्टियों में वह शिरकत करने लगी थीं। इतना ही नहीं, कई बड़े मिनिस्टर्स के साथ भी उन्होंने काम किया। उनका मनोबल सबसे ज्यादा बढ़ाया बाला साहेब ठाकरे की प्रशंसा ने। बातचीत में उन्होने बताया, "अपने काम के सिलसले में मैं कई बड़े लोगों से मिलती थी। एक बार किसी पार्टी में मुझे इंवाट मिला था। उसमें बाला साहेब ठाकरे भी थे। मैंने सबसे बातचीत की, लेकिन उनसे मिल नहीं पाई। मगर बाला साहेब ने जब देखा कि मैं भी वहां शामिल हूं, तो कई लोगों को छोड़ वह सीधा मेरे पास आए और मेरे काम की प्रशंसा की। मुझे बेहद खुशी हुई कि इतना बड़ा नाम आज मुझे और मेरे काम को जानता है।"
1988 में मिला करियर का सबसे बड़ा केस सॉल्व
रजनी के पास 1988 में एक बहुत ही प्रभावशाली परिवार का केस आया। यह उनके करियर के लिए एक अहम केस था। इस प्रभावशाली परिवार में एक हत्या हुई थी और उसे ही सुलझाने के लिए रजनी को हायर किया गया था। परिवार को संदेह था कि जिस व्यक्ति की हत्या हुई है, उसके पीछे मृत आदमी की पत्नी का हाथ था। रजनी ने हाउस हेल्प बनकर उनके उस घर में जाना शुरू कर दिया।
उन्हें पता लगा कि मृत व्यक्ति की पत्नी और प्रेमी इसके हत्या के पीछे हैं। रजनी ने उनकी बातों को टेप रिकॉर्डर में टेप करना शुरू किया और धीरे-धीरे सबूत इकट्ठा किए। मगर यह केस जितना आसान लगता था, उसमें कठिनाई ज्यादा थी। रजनी बताती हैं, "एक बार अचानक से रिकॉर्डर ऑन हो गया। मैंने जल्दबाजी में उसे बंद तो किया, लेकिन उस महिला को मुझपर शक हो गया। उन्होंने मुझे घर से बाहर जाने पर पाबंदी लगा दी। इस तरह लगभग 6 महीने बीत चुके थे। जब मैंने उनके खिलाफ सभी सबूत इकट्ठे कर लिए, तो मैंने घर से बाहर निकलने की तरकीब सोची।
मैंने चाकू अपने पैर पर गिराया, जिससे पैर में गहरा घाव हो गया। जब महिला ने देखा कि खून निकल रहा है, तो उन्होंने मुझे दवाई-पट्टी करने की अनुमति दी। बस, मैंने पास के ही एसटीडी बूथ से पुलिस फोन किया। जब पुलिस पहुंची, तो उन्होंने महिला और उसके प्रेमी को गिफ्तार कर लिया।"
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85000 केसेस कर चुकी हैं सॉल्व
आज रजनी के रिश्तेदार भी उनकी बड़ी वाह-वाही करते हैं। उन्होंने सिर्फ मुंबई में ही नहीं, बल्कि देश में भी अलग-अलग जगहों के केसेस सॉल्व किए हैं। आज अपनी टीम के साथ मिलकर रजनी 85000 से ज्यादा केसेस सॉल्व कर चुकी हैं। आज भी उनके पास कई केसेस पड़ी हैं, जिसमें वह अपनी टीम के साथ मिलकर लगी रहती हैं।
शादी को भी नहीं बनने दिया अपने काम में 'हिचकी'
रजनी शुरू से जानती थीं कि उनका काम कैसा है। शुरुआती समय में उनके पास इतना काम था कि उन्हें शादी और बच्चों के बारे में तक सोचने का मौका नहीं मिला। हमारे समाज में आज भी अकेली महिला को तरह-तरह के ताने दिए जाते हैं। लोगों को लगता है कि लड़की का कोई दोष है, इसलिए उसकी शादी नहीं हो रही है। जब शादी का सवाल रजनी से किया गया, तो उनका कहना साफ था कि वह शादी नहीं करना चाहती हैं।
वह कहती हैं, "शुरू में तो मेरे पास काम ही इतना था कि इन सब चीजों के बारे में सोचने की फुरसत नहीं मिली। हां रिश्तेदार कभी सुनाते थे, तो मैंने कभी उन बातों पर गौर नहीं किया। इस फैसले को मेरे परिवार वालों ने पूरा सपोर्ट किया। मैं आज भी इतनी व्यस्त हूं कि मुझे कोई कमी नहीं खली।"
रजनी पंडित को कभी अपने फैसले पर कोई दुख या पछतावा नहीं हुआ। वह यही सलाह आज की महिलाओं को भी देती हैं। जो भी महिलाएं इस फील्ड में आना चाहती थीं, उनके लिए रजनी का एक ही मैसेज है-"जो भी करो, उसमें इतना विश्वास रखो कि आप उस काम को कर जाओ। इस फील्ड में क्या, किसी भी फील्ड के लिए आपके अंदर जुनून और जज्बा होना चाहिए।"
रजनी चाहती हैं कि इस क्षेत्र में और महिलाएं भी आगे आएं। आज 60 साल की उम्र में भी उनके काम करने के जज्बे को हमारा सलाम है। वह ऐसी कई महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो पुरुष प्रधान रूढ़ियों को तोड़ने में संघर्ष कर रही हैं।
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