SIP Myths: क्या आप भी मानते हैं एसआईपी से जुड़ी ये बातें? निवेश से पहले जान लें वरना डूब सकते हैं पैसे

आज के समय में ज्यादातर लोगों के लिए अपनी बचत को बढ़ाने और भविष्य के लिए पूंजी जमा करने का सबसे फेमस तरीका SIP (Systematic Investment Plan) बन गया है। छोटे इंवेस्ट से शुरुआत करने की सुविधा के कारण करोड़ों लोग म्यूचुअल फंड में एसआईपी कर रहे हैं, लेकिन, जितनी तेजी से इसकी पॉपुलैरिटी बढ़ी है, उतनी ही तेजी से इससे जुड़ी गलतफहमियां यानि मिथक भी फैली हैं। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि एसआईपी से जुड़े मिथक क्या हैं। पढ़ते हैं आगे...
मिथक 1: SIP से तुरंत और हमेशा रिटर्न का मिलना
कई लोगों को लगता है कि एसआईपी शुरू करते ही उनका पैसा रॉकेट की तरह बढ़ने लगेगा। जबकि एसआईपी शेयर बाजार (Equity) से जुड़ी होती है। ऐसे में बाजार में उतार-चढ़ाव होना आम बात है।
कम समय यानि 1 से 2 साल में आपका पोर्टफोलियो लाल निशान में भी दिख सकता है। एसआईपी का असली फायदा कंपाउंडिंग से मिलता है, जिसके लिए आपको कम से कम 5 से 10 साल का धैर्य रखना जरूरी है।
मिथक 2: हर टॉप रेटेड या मशहूर फंड में निवेश करना सही
अक्सर लोग स्टार रेटिंग या पिछले साल के सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले फंड को देखकर निवेश कर देते हैं। जरूरी नहीं कि जो फंड पिछले साल टॉप पर था, वह आगे भी वैसा ही रहे। निवेश हमेशा अपनी जरूरत, लक्ष्य और रिस्क लेने की क्षमता को देखकर करना चाहिए, न कि केवल लोकप्रियता के आधार पर।
मिथक 3: एक बार शुरू करने के बाद SIP कभी बंद न करें
अगर आपके द्वारा चुने गए फंड का प्रदर्शन लगातार 1-2 साल तक अपने बेंचमार्क से खराब चल रहा है या आपके जीवन के लक्ष्य पूरे हो गए हैं, तो एसआईपी को रिव्यू करना और जरूरत पड़ने पर बंद करना या दूसरे फंड में स्विच करना जरूरी होता है।
मिथक 4: बाजार गिरने पर SIP बंद कर देनी चाहिए
बता दें कि यह सबसे खतरनाक मिथक है। जब बाजार गिरता है, तो निवेशक डरकर अपनी किस्तें रोक देते हैं। जबकि, असलियत में, बाजार गिरने पर आपको उतनी ही रकम में ज्यादा 'यूनिट्स' मिलती हैं।
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बाजार के निचले लेवल पर निवेश चालू रखने से ही फ्यूचर में बड़ा मुनाफा होता है। गिरावट के समय एसआईपी बंद करना अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।
मिथक 5: SIP अपने आप मुनाफा दिला देगी, कुछ करने की जरूरत नहीं
एसआईपी कोई जादुई मशीन नहीं है। आपको समय-समय पर अपने निवेश को देखते रहना चाहिए। बाजार की स्थितियों और फंड मैनेजर के फैसलों का असर आपके पैसे पर पड़ता है। ऐसे में नजर रखें।
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