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'इसमें हीरोइन जैसी बात नहीं है...', जब आशा पारेख को ऐसा कहकर डायरेक्टर ने दिखा दिया था बाहर का रास्ता

आशा पारेख की गिनती हिंदी सिनेमा की टॉप एक्ट्रेसेस में होती है। उन्हें अपने दौर की 'जुबली गर्ल' कहा जाता था, लेकिन क्या आपको पता है कि एक वक्त पर एक डायरेक्टर ने उन्हें यह कहकर रिजेक्ट कर दिया था कि उनमें हीरोइन जैसी कोई बात नहीं है।  
Updated:- 2026-08-19, 18:35 IST
when a director rejected asha parekh saying she did not look like a heroine

आशा पारेख की गिनती हिंदी सिनेमा (बॉलीवुड) की सबसे सफल, लोकप्रिय और शीर्ष अभिनेत्रियों में होती है। उन्हें 1960 और 1970 के दशक की 'जुबली गर्ल' कहा जाता था क्योंकि उनकी अधिकांश फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बेहद सफल होती थीं। उन्होंने चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर शुरुआत की थी और फिर कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया। अपने दौर में उन्होंने जीतेंद्र, धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, सुनील दत्त और शम्मी कपूर समेत लगभग सभी लीडिंग एक्टर्स के साथ काम किया। क्या आपको पता है कि एक वक्त पर आशा पारेख को एक डायरेक्टर ने यह कहकर बाहर का रास्ता दिखा दिया था कि वह हीरोइन मैटेरियल नहीं हैं। चलिए आज हमारी खास सीरीज 'फिल्मी गलियारों से' में आपको यह दिलचस्प किस्सा सुनाते हैं।

इसमे हीरोइन जैसी कोई बात नहीं...

आशा पारेख ने खुद एक इंटरव्यू के दौरान यह किस्सा सुनाया था। यूं तो आशा पारेख ने कई हिट फिल्में देकर बॉलीवुड में अपनी खास पहचान बनाई। यूं तो वह चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम कर चुकी थीं, लेकिन बतौर लीड एक्ट्रेस उन्होंने शम्मी कपूर की फिल्म 'दिल देकर देखो' से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। हालांकि, इससे पहले वह 'गूंज उठी शहनाई' से फिल्मों में लीड हीरोइन के तौर पर कदम रखने वाली थीं, लेकिन इस फिल्म के डायरेक्टर वियज भट्ट ने उन्हें यह कहकर बाहर का रास्ता दिखा दिया था कि उनमें हीरोइन वाली कोई बात नहीं है और वह किसी भी एंगल से स्टार नहीं दिखती हैं। ऐसा कहकर उन्होंने उन्हें फिल्म से आउट कर दिया था और उनका डेब्यू टल गया था। हालांकि, इसके बाद फिल्म 'दिल देकर देखो' से वह स्टार बन गईं और लोगों को उनकी एक्टिंग बहुत पसंद आई। इसके बाद कई हिट फिल्में देकर उन्होंने अपनी बेइज्जती का मुंहतोड़ जवाब दिया।

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क्रिटिक्स ने कही थी आशा पारेख के बारे में यह बात

आशा पारेख ने बॉक्स ऑफिस पर 1960 और 70 के दशक में लगातार हिट फिल्में दी थीं और उन्हें 'जुबली गर्ल' कहा जाने लगा था। हालांकि, एक वक्त पर क्रिटिक्स को भी ऐसा लगता था कि उन्हें एक्टिंग नहीं आती है। क्रिटिक्स उन्हें 'ग्लैमरस गर्ल' कहने लगे थे। उनके बारे में ऐसी राय बन गई थी कि वह बेहद खूबसूरत हैं, पर एक्टिंग नहीं कर सकती हैं। हालांकि, फिल्म 'दो बदन' में क्रिटिक्स ने उनकी एक्टिंग को बहुत पसंद किया था। आशा पारेख ने 'तीसरी मंजिल', 'लव इन टोक्यो', 'आए दिन बहार के', 'उपकार', 'कटी पतंग', 'कारवां', 'मेरा गांव मेरा देश', 'मैं तुलसी तेरे आंगन की', 'मेरे सनम' और 'घराना' जैसी हिट फिल्मों में काम किया है।

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