'ये आजकल का लड़कियां..', अब अगर नॉर्मली सुना या पड़ा जाए, तो ये जुमला तारीफ भरा भी हो सकता है। मसलन ऐसा कहा जा सकता है कि 'ये आजकल का लड़कियां कितनी तरक्की कर रही हैं...' या 'ये आजकल की लड़कियां घर और बाहर की दुनिया को बखूबी संभाल रही हैं।' लेकिन अगर आप भी मेरी तरह लड़की हैं, तो आप भी इस बात से इत्तेफाक रखती होंगी कि ये लाइन जब भी हमारी तरफ आती है, तो तारीफ नहीं बल्कि ताने भरे लहजे में आती है और इस बात को हम भी अब बखूबी समझने लगे हैं। अक्सर इस जुमले को पूरा करने के लिए आगे अपने मन मुताबिक कई तरह की चीजें जोड़ दी जाती हैं। कभी कहा जाता है कि 'ये आजकल का लड़कियां सिर्फ करियर की देखती हैं' या 'ये आजकल का लड़कियां बहुत जवाब देती हैं...' या फिर 'ये आजकल का लड़कियां पहले जैसी नहीं रही...।'
कई बार ऐसा भी होता है कि इस जुमले के आगे कुछ नहीं जोड़ा जाता, लेकिन त्योरी चढ़ाकर या फिर मुंह बनाकर जब इतना ही कह दिया जाता है कि ' उफ्फ ये आजकल का लड़कियां..', तो बस हम समझ जाते हैं कि यहां तारीफ को बिल्कुल नहीं हो रही है, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों है?

पूरी तरह नहीं बदली है पितृसत्तात्मक सोच

असल में इस जुमले को तारीफ नहीं बल्कि ताने की तरह बोले जानमे के पीछो कई कारण हैं। जब कहा जाता है कि 'ये आजकल का लड़कियां..' तो कहीं न कहीं यह एक सामान्य वाक्त नहीं होता है, बल्कि उसके पीछे एक भाव होता है, जो आज भी उस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पाया है, जहां लड़कियां पितृसत्तात्मक सोच की बेड़ियों में नहीं फंसी हैं, बल्कि अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।

जहां लड़कियां अपने साथ होने वाले गलत हरकतों को बर्दाश्त नहीं करती हैं, बल्कि मुंहतोड़ जवाब देने की हिम्मत रखती हैं। आज की लड़कियां पहले से ज्यादा पढ़ रही हैं, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, अपने फैसले खुद ले रही हैं और मेंटल हेल्थ से लेकर रिश्तों तक हर मुद्दे पर खुलकर बात कर रही हैं। ऐसे में जब समाज का एक हिस्सा यह बदलाव बर्दाश्त नहीं कर पाता है, तो यह टिप्पणी करना सबसे आसान लगता है।

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लड़कियां तो बदली हैं पर उन्हें देखने का नजरिया बदलने की जरूरत है

आजकल की लड़कियां बेशक पहले से ज्यादा मजबूत हो गई हैं और अपनी पहचान बनाने की हर मुमकिन कोशिश कर रही हैं, जिसमें वो बखूबी कामयाब भी हो रही हैं, लेकिन अब वक्त आ गया है कि उनकी तरफ देखने का नजरिया भी बदला जाए।

समय के हिसाब से आगे बढ़ती लड़कियों पर अब गर्व करने की जरूरत है, न कि उन्हें सवालों के घेर में खड़ा करने की। अब वक्त आ गया है कि जब किसी लड़की को 'आजकल की लड़की...' कहकर बुलाया जाए, तो उसे ये कटाक्ष न लगे, बल्कि उसके सम्मान और आत्मविश्वास के लिए कही गई लाइन लगे।

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