Fri Sep 11, 2026 | Updated 09:31 PM IST

रिश्ता बराबरी का, फिर पुरुषों के मुकाबले महिलाओं से ज्यादा उम्मीदें क्यों रखी जाती हैं?

पति और पत्नी यानी लाइफ पार्टनर...हमसफर...तो जाहिर सी बात है कि रिश्ता बराबरी का हुआ। बेशक होना भी चाहिए, लेकिन फिर क्यों उम्मीदें महिलाओं से ज्यादा रखी जाती हैं? बात चाहे रिश्ता निभाने की हो या रिश्ता बचाने की, क्यों महिलाओं से ही कोशिश करने को कहा जाता है?
Updated:- 2026-07-12, 00:53 IST
image

जिंदगी के सफर में हम सभी को हमसफर की तलाश जरूर होती है और जब कोई सच्चा हमसफर मिल जाता है, तो जिंदगी के मायने की बदल जाते हैं। दो लोग साथ मिलकर एक नए सफर की शुरुआत करते हैं, एक-दूसरे के लाइफ पार्टनर बनते हैं और उस रिश्ते को दिल से निभाने के हजारों वादें करते हैं। बेशक ये सब बहुत खूबसूरत होता है और अगर रिश्ते निभाने की कोशिश दोनों तरफ से की जाए, तो शायद कोई भी रिश्ता कभी टूट नहीं सकता, बशर्ते कोशिश दोनों तरफ से बराबरी की है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि बराबरी के इस रिश्ते में महिलाओं से उम्मीदें ज्यादा रखी जाती हैं। रिश्ते को निभाना हो या टूटने से बचाना, महिलाओं से ही सारी अपेक्षाएं रखी जाती हैं, लेकिन आखिर ऐसा क्यों?

माफ करने की उम्मीद

आमतौर पर महिलाओं से उम्मीद की जाती है कि अगर उनका पति, उनका लाइफ पार्टनर कोई गलती करता है, तो वो बस उसे माफ कर दें। माफ करना गलत नहीं है, लेकिन यह बात दोनों पर लागू होनी चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं है। पति चाहे छोटी सी बात का बड़ा मुद्दा क्यों न बना ले, उस पर कोई सवाल नहीं उठता, लेकिन महिलाएं अगर किसी गलती पर झुकने या माफ करने से इंकार कर दें, तो उन्हें कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है।

घर और बाहर की जिम्मेदारियों को निभाने की उम्मीद

why are women held to higher expectations than men in relationship
"अरे वाह...कितना अच्छा पति मिला है...तुम्हारे लिए चाय बना रहा है।" आपने कई बार इस तरह की बातें सुनी होंगी। असल में पुरुषों को रसोई में देखना समाज के कई लोगों को अब भी बहुत गलत लगता है और ऐसे में अगर कोई पति अपनी पत्नी का घर के कामों में हाथ बंटा रहा है, तो उसकी तारीफों के पुल बांध दिए जाते हैं। यहां भी उम्मीदें महिलाओं से ही हैं। पत्नी घर भी संभाले, बाहर जाकर नौकरी भी करे और बच्चों पर भी पूरा ध्यान दे और अगर उससे कोई गलती हो जाए, तो उसे लापरवाह पत्नी का टैग देने में देर नहीं की जाती है।

खुद टूटकर भी रिश्ता बचाने की उम्मीद

"क्या हो गया...इतनी सी बात पर कोई रिश्ता तोड़ता है क्या...तुम्हें किसी भी हालत में अपनी शादी बचानी चाहिए।" ये बातें कई बार महिलाओं को तब सुनने को मिलती हैं, जब वो रिश्ते में हो रहे गलत के खिलाफ आवाज उठाती हैं। यहां पुरुषों से ये उम्मीद नहीं की जाती है कि वो अपनी पत्नी के हिसाब से खुद को ढालने की कोशिश करें, बल्कि महिलाओं से उम्मीद की जाती है कि वो किसी भी हालत में रिश्ते को बचाएं।

यह भी पढ़ें- 'तुम फिर से भूल गए?' आखिर महिलाओं की याददाश्त रिश्तों में इतनी शार्प क्यों होती है?

उम्मीदों का पलड़ा अक्सर महिलाओं की तरफ ज्यादा भारी क्यों होता है?

why are women held to higher expectations than men in relationship
असल में यह सोच नई नहीं है। यह सालों से हमारे अंदर पनप रही पितृसत्तात्मक सोचक का परिणाम है। रिश्ता बराबरी का है, पति-पत्नी गाड़ी के दो पहिए हैं, ये बातें हम कह जरूर देते हैं, लेकिन महिलाओं से जुड़ी पारंपरिक अपेक्षाएं अभी भी कम नहीं हुई हैं। वक्त बदलने के साथ उनके ऊपर नई जिम्मेदारियां डाली जाती रहीं, लेकिन पुरानी जिम्मेदारियां कम नहीं हुईं। इसका एक कारण ये भी है कि एक वक्त तक पत्नी को आर्थिक और सामजिक तौर पर पति पर निर्भर माना जाता था और यही वजह थी कि उनसे रिश्ते को निभाने और बचाने की सारी उम्मीदें रखी जाती हैं। 

यह भी पढ़ें- 'इस बार सब ठीक हो जाएगा', आखिर क्यों बार-बार ये सोचकर पार्टनर को माफ कर देती हैं महिलाएं?


अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Images: magnific, shutterstock

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।