गणपति बप्पा के आने से लेकर उनकी विदाई तक पूरा माहौल भक्ति और खुशी से भरा रहता है। घर हो या पंडाल, लोग अपनी इच्छा और श्रद्धानुसार 3, 5, 7 या 10 दिनों तक बप्पा की पूजा करते हैं। साथ ही आरती करते हैं और विदाई के दौरान उन्हें अगले साल आने की कामना के साथ विसर्जित करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी नोटिस किया है कि विसर्जन के समय कई जगहों पर लोग बप्पा पर गुलाल उड़ाते हैं और नारियल अर्पित करते हैं, आखिर विदाई के दौरान ही ऐसा क्यों किया जाता है?
क्या इसके पीछे कोई धार्मिक वजह या सिर्फ खुशी जताने का तरीका है? दरअसल, इन दोनाें चीजों से जुड़ी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं और स्थानीय परंपराएं हैं। आज हम आपको अपने इस लेख में बता रहे हैं कि बप्पा की विदाई के समय गुलाल और नारियल का क्या रोल होता है? आइए जानते हैं-
Image Credit- Magnific
बप्पा की विदाई में गुलाल क्यों उड़ाते हैं?
गणपति विसर्जन के समय गुलाल उड़ाने का जो माहौल होता है, वह देखने लायक होता है। विसर्जन के समय लोग ढोल-ताशों की थाप पर जमकर नाचते-गाते हैं और खुशी में चारों तरफ गुलाल उड़ाते हैं। ऐसे खूबसूरत नजारे देश के अलग-अलग शहरों में देखने को मिलते हैं। दरअसल, अलविदा कहते समय बप्पा की विदाई सिर्फ दुख का पल नहीं होती बल्कि भक्त उन्हें पूरे जोश और खुशी के साथ विदा करते हैं। इस दौरान लोगों की उम्मीद बस यही होती है कि बप्पा अगले साल जल्दी से आएं। इसी खुशी और उमंग को जताने के लिए लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं और हवा में गुलाल उड़ाकर जश्न मनाते हैं।
गुलाल से जुड़ी ये बातें ध्यान रखें
अगर आपको लगता है कि हर जगह गुलाल उड़ाया जाता है, तो कुछ बातें आपको जान लेनी चाहिए-
- हर जगह विसर्जन में गुलाल उड़ाना जरूरी नहीं होता है।
- गुलाल उड़ाना अलग-अलग इलाकों और परिवारों की परंपरा पर निर्भर करता है।
- इसे बप्पा की विदाई के समय खुशी जताने के लिए उड़ाया जाता है।
बप्पा के विसर्जन से पहले नारियल क्यों चढ़ाते हैं?
ये तो आप सभी जानती होंगी कि हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के समय नारियल का इस्तेमाल जरूर किया जाता है। इसे शुभ माना जाता है। गणपति पूजा में भी नारियल चढ़ाए जाने की परंपरा है। वहीं विसर्जन के समय की बात करें तो इसको लेकर मान्यता है कि यह भक्त की तरफ से बप्पा काे दिया जाने वाला एक तरह से भेंट होता है। इसके साथ ही इसे मन की बुरी चीजों और अहंकार को छोड़ने का भी एक तरीका माना जाता है।
image credit- magnific
नारियल को अहंकार से क्यों जोड़ा जाता है?
धार्मिक मान्यता है कि नारियल का बाहर का सख्त वाला हिस्सा इंसान के अहंकार का प्रतीक होता है। इसके अंदर का सफेद हिस्सा मन की शुद्धता से जुड़ा हुआ होता है। इसलिए पूजा के समय नारियल चढ़ाया जाता है। इससे माना जाता है कि हम अपने अंदर के अहंकार और मन को भगवान को समर्पित कर रहे हैं। कुछ जगहों पर इस नारियल को बप्पा के साथ विसर्जित कर दिया जाता है, तो कुछ लोग इसे प्रसाद के रूप में भी बांट देते हैं।
अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख केवल लोक-मान्यताओं, धार्मिक रीति-रिवाजों और स्थानीय परंपराओं पर आधारित है। हमारा उद्देश्य किसी भी तरह के अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि इस त्योहार से जुड़ी लोक-परंपराओं की जानकारी साझा करना है।
Image Credit- AI
