Mysterious Book Voynich Manuscript: अगर कोई आपसे कहे कि दुनिया में 240 पन्नों की एक ऐसी किताब है, जिसे आज तक कोई भी नहीं पढ़ पाया है, तो हो सकता है कि आपको अजीब लगे। मगर आपको बता दें कि यह शत-प्रतिशत सत्य है। इस किताब का नाम Voynich Manuscript है। इसके किताब के पुराने चर्मपत्र के पन्ने अजीब पौधों, चमकते तारों और रहस्यमयी निशानों की रंग-बिरंगी तस्वीरों से भरे हैं। सदियों से इस छोटी सी किताब ने दुनिया के सबसे बड़े दिमागों को उलझन में डाल रखा है। कोई भी इसका एक शब्द भी नहीं पढ़ पाया है और न ही कोई यह पक्के तौर पर जानता है कि इसे किसने और क्यों लिखा था? आइए जानते हैं कि इस किताब के बारे में विस्तार से।

Voynich Manuscript किताब में है अजीब लिखावट

Voynich Manuscript किताब छह अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई है और हर हिस्से में अनोखी और सुंदर तस्वीरें हैं। चूंकि इसके शब्द आज भी एक पहेली बने हुए हैं, इसलिए विशेषज्ञों ने अंदर की तस्वीरों के आधार पर ही इन अध्यायों के नाम रखे हैं। नीचे प्वाइंट में जानें इनके बारे में-

  • हर्बल पन्ने- यह किताब का सबसे बड़ा हिस्सा है, जिसमें पौधों और जड़ी-बूटियों की सौ से अधिक विस्तृत तस्वीरें हैं, जो हमारी दुनिया के किसी भी जाने-पहचाने पौधे से मेल नहीं खातीं।
  • तारों भरा आसमान- इस हिस्से में सूरज, चांद, तारों और राशि चक्र (zodiac signs) के चार्ट बने हुए हैं।
  • मानव आकृतियां- इस भाग में पानी के कुंडों और उलझी हुई नलकियों से जुड़ी छोटी आकृतियों के चित्र हैं।
  • ब्रह्मांड (कॉसमॉस)- तारों के पैटर्न और ज्यामितीय आकारों से भरे गोल चक्र इस हिस्से में आते हैं।
  • फार्मेसी- पहले अध्याय की तरह इसमें भी जड़ी-बूटियां हैं, लेकिन साथ में जार, बोतलें और डिब्बे भी बने हैं, जो किसी प्राचीन दवाखाने जैसे लगते हैं।
  • रेसिपी खंड- आखिरी पन्नों में साफ-सुथरी पंक्तियाँ और छोटे सजावटी निशान हैं, जिन्हें निर्देश या रेसिपी माना जाता है।

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15वीं या 16वीं सदी पुराना है Voynich Manuscript का इतिहास

वॉयनिच पांडुलिपि (Voynich manuscript) एक सचित्र पांडुलिपि है जो एक अज्ञात भाषा में लिखी गई है और माना जाता है कि इसे 15वीं या 16वीं सदी में बनाया गया था। इसका नाम पुरानी और दुर्लभ किताबें बेचने वाले विल्फ्रिड वॉयनिच के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने इसे 1912 में खरीदा था। जब से यह पांडुलिपि मिली है, तब से विद्वान और वैज्ञानिक इसके टेक्स्ट को समझने की कोशिश कर रहे हैं। 1969 से इसे येल यूनिवर्सिटी की बीनेके रेयर बुक एंड मैन्युस्क्रिप्ट लाइब्रेरी में रखा गया है। इस किताब बीनेके एमएस 408 के नाम से भी जाना जाता है। 

Voynich Manuscript किताब को लेकर अनसुनी कहानी

द्वितीय विश्व युद्ध के कोड डिकोडर, बेहतरीन भाषाविद् और कंप्यूटर वैज्ञानिकों, सबने इस लिखावट को पढ़ने की कोशिश की, लेकिन हर बार असफलता ही हाथ लगी। कुछ आलोचकों का मानना था कि विल्फ्रेड वॉयनिच ने यह सब खुद गढ़ा था। हालांकि, प्राचीन सामग्रियों पर हुए आधुनिक वैज्ञानिक परीक्षणों और अजीब भाषा के पैटर्नों पर कंप्यूटर अध्ययनों से यह साबित होता है कि यह लिखावट किसी असली भाषा के नियमों का पालन करती है।

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यकीनन इस किताब की तस्वीरें और इसके बारे में पढ़कर आपको पता चल गया होगा कि 240 पन्नों को पढ़ना इतना मुश्किल क्यों है? अगर आपको यह लेख पसंद आया है, तो इसे शेयर करें। साथ ही ऐसे आर्टिकल को पढ़ने के लिए जुड़े रहे हरजिंदगी के साथ।

Source- Yale Library

Image Credit-WIKIPEDIA, Yale Library