रात में 12 बजे भगवान कृष्‍ण का जन्‍म हो चुका है। लोगों के घर में भगवान कृष्ण के जन्म के बाद पूजा की गई और लड्डू गोपाल को भोग लगाया गया। इस पूजा में कई घरों में खीरा भी रखा जाता है। कृष्ण जन्म के समय खीरे से जुड़ी एक खास परंपरा निभाई जाती है, लेकिन अब जब जन्माष्टमी बीत चुकी है, तो पूजा में रखा गया यह खीरा क्या करना चाहिए, यही सवाल कई लोगों के मन में आता है।

अगर आपके घर में भी लड्डू गोपाल का जन्म खीरे में रखकर कराया जाता है और अब वह बचा हुआ है, तो इसे लेकर एक धार्मिक मान्यता है। कहते हैं क‍ि इस खीरे को संतान की इच्छा रखने वाली महिलाओं को खिलाया जा सकता है। आइए इसके बारे में जानते हैं-

जन्माष्टमी पर खीरा क्यों रखा जाता है?

जन्माष्टमी की पूजा में खीरा रखने की परंपरा कई घरों में निभाई जाती है। भगवान कृष्ण के जन्म के समय इसका इस्तेमाल किया जाता है। दरअसल, जन्‍म से खीरे के अंदर ही बाल गोपाल को रखा जाता है। जब जन्‍म का समय पूरा होता है, तो बाल गोपाल बाहर आते हैं। ऐसे में कई लोग जन्‍म के बाद इस खीरे को प्रवाह‍ि‍त कर देते हैं, लेक‍िन धार्मिक मान्यता है क‍ि इसे यूं ही फेंकने के बजाय प्रसाद के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

जन्म के बाद खीरे का क्या करें?

अगर आपके घर में जन्माष्टमी की पूजा में खीरा रखा गया था, तो कृष्ण जन्म के बाद इसे दूसरे द‍िन संतान की इच्छा रखने वाली महिला को खिलाया जा सकता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण के जन्म के समय इस्तेमाल किए गए इस खीरे को खाने से संतान की इच्छा पूरी हो सकती है।

आज खीरे का कैसे इस्तेमाल करें?

जन्माष्टमी के बाद अगर पूजा वाला खीरा अभी ठीक है और खाने लायक है, तो परिवार की मान्यता के अनुसार इसे प्रसाद की तरह खाया जा सकता है। संतान की इच्छा रखने वाली महिला को इसे खिलाने की परंपरा भी इसी धार्मिक विश्वास से जुड़ी है, लेकिन अगर खीरा खराब हो चुका है या काफी समय से बाहर रखा है, तो उसे खाने से बचना चाहिए। प्रसाद होने के बावजूद खाने की चीज की साफ-सफाई और ताजगी का ध्यान रखना जरूरी है।

अगर आप भी संतान प्राप्‍त‍ि की इच्‍छा रखती हैं, तो इस खीरे का सेवन प्रसाद के रूप में कर सकती हैं। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

नोट- यह इनपुट सोशल मीड‍िया से ल‍िया गया है। हरजि‍ंदगी इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करती है। आपके प‍र‍िवार में खीरे को लेकर जो मान्‍यता है, उसी का पालन करें।

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