हम सभी मंदिर में पूजा या दर्शन करने के लिए जाते ही हैं। ऐसे में आपने कई बार देखा होगा कि वहां कुमकुम, चंदन या विभूति दी जाती है। कुछ लोग इसे माथे पर लगाते हैं तो कुछ लोग इसे अपने साथ घर ले आते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मंदिर में ये चीजें ही क्यों दी जाती हैं, आखिर कुमकुम, चंदन और विभूति में ऐसी क्या खास बात है? दरअसल, इन्हें लेकर मान्यता है कि ये ऐसी चीजें हैं जो ऊर्जा यानी एनर्जी को अपने अंदर समेट कर रखती हैं।
ऐसा कहा जाता है कि मंदिर में सकारात्मक माहौल में रखे जाने के बाद ये चीजें अपने अंदर भी वही पॉजिटिविटी और एनर्जी ले लेती हैं। यानी मंदिर में मिलने वाला कुमकुम, चंदन और विभूति सिर्फ पूजा की चीजें नहीं हैं बल्कि इनके साथ ऊर्जा से जुड़ी मान्यताएं भी हैं। आइए इसके बारे में जानते हैं-
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मंदिर में कुमकुम और विभूति देने की क्या वजह है?
कुमकुम और विभूति बहुत जल्दी आसपास की एनर्जी कैच कर लेते हैं और उसे अपने अंदर होल्ड करके रख सकते हैं। इसी वजह से मंदिरों में कुमकुम, चंदन और विभूति को भगवान के पास कुछ देर रखा जाता है, ताकि मंदिर की पॉजिटिव वाइब्स इनमें समा जाए। इसके बाद ही इन्हें भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है, ताकि लोग उस पॉजिटिव एनर्जी को अपने साथ घर ले जा सकें।
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कुमकुम, चंदन और विभूति से जुड़ी जरूरी बातें
पूजा में इस्तेमाल होने वाले कुमकुम, चंदन और विभूति सिर्फ परंपरा का हिस्सा नहीं हैं बल्कि इनके पीछे की वजह भी काफी दिलचस्प है।
- कुमकुम: यह आसपास की पॉजिटिव वाइब्स और एनर्जी को बहुत जल्दी अपने अंदर सोख लेता है।
- विभूति: ऊर्जा को सोखने और उसे संभालकर रखने के मामले में विभूति को सबसे ज्यादा असरदार माना जाता है।
- चंदन: विभूति और कुमकुम की तरह चंदन भी अपने आसपास की ऊर्जा को काफी हद तक एब्जॉर्ब कर सकता है।
- मंदिर में रखने का नियम: इसी वजह से इन्हें पहले कुछ समय के लिए मंदिर में भगवान के पास रखा जाता है, ताकि वहां की पूरी पॉजिटिव एनर्जी इनमें समा जाए।
- प्रसाद के रूप में बांटना: मंदिर की पवित्र ऊर्जा इनमें समा जाने के बाद ही इन्हें भक्तों को माथे पर लगाने या घर ले जाने के लिए दिया जाता है।
महिलाएं माथे पर कुमकुम क्यों लगाती हैं?
कुमकुम का इस्तेमाल सिर्फ मंदिरों में ही नहीं होता है। महिलाएं भी लंबे समय से माथे पर कुमकुम लगाती आ रही हैं। इसके पीछे अलग-अलग मान्यताएं हैं। ये तो आप जानती ही होंगी कि कुमकुम में हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है और हल्दी को उसके गुणों के लिए जाना जाता है। ऐसे में कुमकुम लगाने से सेहत को भी फायदे होते हैं। इसके अलावा कुमकुम शादीशुदा महिला की पहचान भी है। अगर किसी महिला के माथे पर कुमकुम लगा है तो इसे देखकर लोग समझ जाते हैं कि ये विवाहित है।
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विभूति को सबसे ऊपर क्यों माना जाता है?
कुमकुम और चंदन की तुलना में विभूति को ज्यादा असरदार माना जाता है। इसके पीछे भी यही मान्यता है कि विभूति एनर्जी को तेजी से कैच करती है और उसे अपने अंदर बनाए रखती है। इसी वजह से मंदिर में मिलने वाली विभूति को लोग श्रद्धा से माथे पर लगाते हैं। कुमकुम और चंदन को लेकर भी इसी तरह की एनर्जी से जुड़ी बातें कही जाती हैं, लेकिन इन तीनों में विभूति को सबसे ऊपर माना गया है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और लोक आस्थाओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसे केवल सामान्य जानकारी और धार्मिक संदर्भ के रूप में पढ़ें।
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