मध्य प्रदेश में ऐसे कई गांव हैं, जो अपनी अलग-अलग परंपराओं के लिए जाने जाते हैं। ऐसा ही एक गांव एमपी के खरगोन जिले में है, जहां दशकों पुरानी एक मान्यता का आज भी पूरे नियम-कायदों के साथ पालन किया जाता है। हम बात कर रहे हैं खरगोन के सेमरला गांव की। इस गांव में अगर किसी ग्रामीण की मौत किसी हादसे या दुर्घटना में हो जाती है, तो उसकी लाश को गांव की सीमा के बाहर ही रोक दिया जाता है। बता दें कि इस गांव की आबादी लगभग 1,500 है और यहां के सभी लोग बड़ी सख्ती से इस परंपरा का पालन करते हैं।
प्राकृतिक आपदाओं और रारकोट के पुजारी से जुड़ा इतिहास
स्थानीय निवासियों के अनुसार यह प्रथा कई सालों से चली आ रही है। दशकों पहले सेमरला गांव को लगातार कई प्राकृतिक आपदाओं और गंभीर मुसीबतों का सामना करना पड़ा था। उस समय गांव के संकट को दूर करने के लिए नजदीकी गांव रारकोट से एक पुजारी को बुलाया गया था।
इसी पुजारी ने गांव में हवन-पूजन कराने के बाद ग्रामीणों को सलाह दी कि जब भी इस गांव के किसी व्यक्ति की गांव की सीमा के बाहर दुर्घटना में मौत हो जाए, तो उसके शव को गांव के अंदर लाने के बजाय सीमा के बाहर ही रोक दिया जाए। अगर हादसे में मरने वाले का पार्थिव शरीर गांव के अंदर आ जाता है, तो इससे गांव पर भारी संकट आ सकता है।
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अंतिम संस्कार के लिए गांव की सीमा पर व्यवस्था
मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग का आधिकारिक पोर्टल पर निमाड़ और मालवा अंचल की स्थानीय परंपराओं, लोक-आस्थाओं, ग्रामीण जीवन शैली और सांस्कृतिक मान्यताओं के बारे में इस बात का जिक्र किया गया है। गांव की इस परंपरा का पालन करते हुए जब भी किसी व्यक्ति की सड़क हादसे में मौत हो जाती है, तो उसका सीमा के बाहर ही अंतिम संस्कार किया जाता है।
इसके लिए वहां विशेष इंतजाम भी किए जाते हैं। सेमरला गांव के लोगों के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों और रिश्तेदारों की मौजूदगी में गांव की सीमा पर ही एक खास स्थान बनाया गया है। गांव के सभी लोग और परिजन हादसे में किसी की जान जाने पर सीमा के बाहर एकत्र होते हैं, वहीं से अंतिम यात्रा निकालते हैं और पूरे सम्मान के साथ रीति-रिवाजों से अंतिम संस्कार करते हैं।
गांव में कोई नहीं करता इस परंपरा का विरोध
ग्रामीणों के मुताबिक, अटूट आस्था होने की वजह से गांव में कभी भी इस परंपरा का विरोध नहीं होता है। सभी लोग इस मान्यता का सम्मान करते हैं। गांव के लोगों का यह भी कहना है कि यह एक सदियों पुरानी सामाजिक परंपरा है, इसलिए प्रशासन भी इसमें सीधा दखल नहीं देता है।
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निष्कर्ष :
सेमरला गांव की यह परंपरा भले ही बाहर के लोगों के लिए थोड़ी अजीब लगे, लेकिन यहां के निवासियों के लिए यह गांव की सुरक्षा, सुख और शांति से जुड़ी गहरी आस्था का विषय है। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।
(Image Credit: magnific)
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