Fri Sep 11, 2026 | Updated 08:53 PM IST

जब दिल्ली की गद्दी पर बैठी एक महिला, जानिए क्यों इतिहास में खास है रजिया सुल्तान की कहानी?

रज‍िया सुल्तान का जन्‍म 1205 में हुआ था। लगभग 800 साल पहले उन्होंने अपने साहस और समझदारी से शासन चलाया। वह बिना किसी डर के खुद युद्ध के मैदान में उतरती थीं। 
Updated:- 2026-08-29, 18:10 IST
razia sultan story

आज से करीब 800 साल पहले दिल्ली की गद्दी पर बैठना किसी भी महिला के लिए आम नहीं था। उस समय सत्ता और शासन की दुनिया में पुरुषों का ही दबदबा हुआ करता था। मह‍िलाएं परदे में रहती थीं। ऐसे समय में एक महिला ने न सिर्फ दिल्ली की गद्दी संभाली बल्कि अपने फैसलों के दम पर शासन की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। वो महिला कोई और नहीं बल्‍क‍ि रजिया सुल्तान थीं। रजिया को दिल्ली की पहली और इकलौती महिला शासक माना जाता है।

रज‍िया सुल्‍तान काे मिली थी घुड़सवारी की ट्रेनिंग

खास बात यह थी कि रजिया सुल्तान सिर्फ महल में बैठकर हुकुम नहीं देती थीं, उन्‍हें घुड़सवारी, युद्ध और शासन चलाने की ट्रेनिंग भी मिली थी और जरूरत पड़ने पर वह खुद सेना के साथ युद्ध भी करती थीं। उनके पिता इल्तुतमिश भी उनकी काब‍िल‍ियत को समझते थे और उन्हें अपना उत्तराधिकारी बनाया था। हालांकि, रजिया सुल्‍तान का सत्ता तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था। इसमें कई लोगों को ब‍हुत द‍िक्कत हुई थी। हम आपको इसलिए यह सब बता रहे हैं क्योंकि हमने 'Her Story: महिलाएं जिन्होंने बदल दी दुनिया' नाम की एक सीरीज शुरू की है। इसी कड़ी में हम रोजाना ऐसी महिलाओं के बारे में बताएंगे। आज हम आपको रज‍िया सुल्‍तान की कहानी बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं-

razia sultan

बचपन से ही पिता के साथ सीखती थीं शासन चलाना

आपको बता दें क‍ि रजिया का जन्म 1205 में हुआ था। वह दिल्ली के सुल्तान शम्सुद्दीन इल्तुतमिश की बेटी थीं। उनके पिता ने रजिया को बाकी बेटियों की तरह सिर्फ महल में ही नहीं रखा था। उन्हें दरबार के कामकाज को भी समझाया जाता था। बताया जाता है क‍ि रजिया छोटी सी उम्र से ही अपने पिता के साथ प्रशासन से जुड़े काम देखती आई थीं। इस तरह उन्हें धीरे-धीरे यह समझ आने लगी कि एक बड़े राज्य को कैसे संभाला जाता है। उन्हें घुड़सवारी और युद्ध से जुड़ी ट्रेनिंग भी मिली। इल्तुतमिश के दूसरे बेटे भी उत्तराधिकारी बनने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन रजिया की काबिलियत ने ही उन्‍हें उत्तराधि‍कारी बना द‍िया था।

यह भी पढ़ें- 1857 की क्रांति की अमर योद्धा हैं वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी, जानिए कहानी

इल्तुतमिश ने बेटी को बनाया अपना उत्तराधिकारी

बताया जाता है क‍ि जब रजिया के भाई नासिरुद्दीन महमूद की मौत हो गई तो हालात बदल गए थे। ऐसे में इल्तुतमिश जानते थे क‍ि रज‍िया ही अब उत्तराध‍िकारी बनने लायक हैं। जब वह एक क‍िसी अभियान पर गए, तब उन्होंने दिल्ली की जिम्मेदारी रजिया को संभालने के ल‍िए कहा। ऐसे में रजिया ने बखूबी अपनी जिम्मेदारी न‍िभाई। जब इल्तुतमिश वापस लौटे तो उन्‍हें रज‍िया का काम बहुत पसंद आया।

razia sultan (1)

इसके बाद उन्होंने रजिया को अपना उत्तराधिकारी बनाने का फैसला किया। इस फैसले को इसल‍िए ऐत‍िहास‍िक माना गया क्योंक‍ि उस समय क‍िसी म‍ह‍ि‍ला को गद्दी पर बैठना सही नहीं माना जाता था, लेकिन इल्तुतमिश को लगता था कि उनकी बेटी बेटों से ज्यादा काबिल है।

पिता की मौत के बाद आसान नहीं था सफर

1236 में इल्तुतमिश की मौत हो गई। इसके बाद रजिया को तुरंत गद्दी नहीं मिली। दरबार के कुछ ताकतवर लोगों ने उनके भाई रुकनुद्दीन फिरोज को सुल्तान बना दिया, लेक‍िन रुकनुद्दीन ज्‍यादा समय तक ट‍िक नहीं पाए। करीब सात महीने बाद हालात उनके खिलाफ हो गए। उनकी मां शाह-तुर्कान की भूमिका भी इस दौरान काफी चर्चा में रही। आखिरकार रजिया को फ‍िर से सत्ता संभालना पड़ा। 1236 में वह दिल्ली की गद्दी पर बैठीं। इस तरह वह दिल्ली की पहली महिला सुल्तान बनीं थीं।

यह भी पढ़ें- Begum Hazrat Mahal: अवध की वो वीरांगना, जिसने 1857 में हिला दी अंग्रेजों की नींव

पर्दे के पीछे नहीं, खुद संभालती थीं सेना

रजिया की सबसे खास बात उनकी बहादुरी ही थी। वो सिर्फ दरबार में बैठकर फैसले नहीं लेती थीं। उन्हें युद्ध की ट्रेनिंग मिली थी और वह घोड़े पर सवार होकर सेना के साथ भी जाती थीं। वह पुरुषों की तरह घुड़सवारी करती थीं और हथियारों के साथ युद्ध में शामिल होती थीं।

दरबार के लोगों को पसंद नहीं था रज‍िया का तरीका

रजिया के सामने कई मुश्‍क‍िलें थीं। सबसे बड़ी मुश्किलों में से एक दरबार के ताकतवर लोगों का विरोध था। दरअसल, दरबार के लोगों को रज‍िया का सत्ता संभालना पसंद नहीं आ रहा था। ऐसे में रजिया ने भी अपने फैसलों में किसी तरह की कमजोरी नहीं दिखाई। उन्होंने ऐसे लोगों को बड़ी जिम्मेदारियां दीं जिन पर उन्हें पूरा भरोसा था। इसी में मलिक याकूत को अमीर-ए-अखुर यानी घोड़ों से जुड़े विभाग का प्रमुख बनाया गया। रज‍ि‍या की यह बात तुर्की अमीरों को पसंद नहीं आया। उन्हें लगा कि रजिया स‍िर्फ अपने भरोसे के लोगों को ही आगे बढ़ा रही हैं।

रजिया के सामने थीं बड़ी चुनौतियां

रज‍िया सत्ता भले ही संभाल रही थीं, लेक‍िन उनके सामने कई चुनौत‍ियां भी थीं। जैसे-

  • दरबार के कई ताकतवर लोग उनके खिलाफ थे।
  • पुरुष प्रधान व्यवस्था में महिला शासक को लोग स्वीकार नहीं कर पा रहे थे।
  • रज‍िया को उनके हर फैसलों पर लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा था।
  • सत्ता बचाने के लिए उन्हें राजनीतिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर काम करना पड़ा था।

यह भी पढ़ें- जिस महिला से कांपते थे दुश्मन, उसी ने यूपी में खड़ा किया यह बेसिलिका; पढ़ें बेगम समरू की कहानी

भटिंडा के गवर्नर ने कर दिया विद्रोह

आपकाे बता दें क‍ि रजिया का शासन ज्यादा लंबे समय तक नहीं चला था। 1240 की बात है, तब भटिंडा के गवर्नर मलिक अल्तूनिया ने उनके खिलाफ विद्रोह कर दिया था। रजिया को इस विद्रोह को दबाने के लिए खुद जाना पड़ा। इसी दौरान उनके भरोसेमंद याकूत की हत्या कर दी गई और रजिया को भी पकड़कर बंदी बना लिया गया। उधर दिल्ली के अमीरों ने उनके सौतेले भाई मुइजुद्दीन बहराम को गद्दी पर बैठा दिया। ऐसे में रजिया के सामने अब अपनी सत्ता वापस पाने की चुनौती थी।

अल्तूनिया के साथ मिलकर वापस लेने निकलीं दिल्ली

जब रज‍िया कैद से बाहर आईं तो उन्‍होंने अल्तूनिया के साथ हाथ मिलाया। दोनों ने मिलकर दिल्ली पर दोबारा कब्जा करने की कोशिश की। कहा जाता है कि इसी दौरान दोनों की शादी भी हुई। इसके बाद दोनों अपनी सेना लेकर दिल्ली की तरफ बढ़े। हालांकि‍, उन्‍हें सफलता नहीं म‍िली। उनकी सेना को हार का सामना करना पड़ा और दोनों पीछे हट गए।

यह भी पढ़ें- निडर शिक्षिका थीं फातिमा शेख, जिन्होंने सावित्रीबाई फुले का साथ देकर बदल दी श‍िक्षा की तस्वीर

अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Source- https://www.incredibleindiadestinations.com/razia-sultan-her-true-story/

Image Credit- Pinterest/ozal hasanov/Khadija Rizvi

FAQ
दिल्ली की गद्दी पर रजिया सुल्तान ने कितने साल शासन किया?
उन्होंने 1236 से 1240 तक, यानी लगभग चार साल शासन किया।
रजिया सुल्तान का मकबरा कहां स्थित है?
रजिया सुल्तान का मकबरा पुरानी दिल्ली के बुलबुली खाना इलाके में स्थित है।
रजिया सुल्तान की मृत्यु कैसे हुई थी?
1240 में कैथल के पास डाकुओं के साथ हुए संघर्ष में उनकी मृत्यु हो गई थी।
Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।