कभी-कभी कैलेंडर में कुछ संयोग ऐसे बनते हैं, जो किसी पर्व के मूल संदेश को और गहरा कर देते हैं। पितृपक्ष 2026 ऐसा ही एक अवसर लेकर आ रहा है। इस वर्ष श्राद्ध पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर, शनिवार को पूर्णिमा श्राद्ध से मानी जा रही है। प्रतिपदा श्राद्ध 27 सितंबर से आरंभ होगा और 10 अक्टूबर, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा। यानी शुरुआत भी शनिवार और अंतिम दिन भी शनिवार। इस बारे में विस्‍तार से हमें ज्योतिषाचार्य सिद्धार्थ एस कुमार बता रहे हैं।

शनि का यह संयोग क्यों खास है?

ज्योतिष में शनि केवल कठिनाइयों का ग्रह नहीं है। वह कर्म, उत्तरदायित्व, ऋण, अनुशासन और अपने किए का परिणाम स्वीकार करने का प्रतीक भी है। पितृपक्ष भी कहीं न कहीं हमें यही याद दिलाता है कि हमारा जीवन केवल हमारा नहीं है। हम अपने परिवार और वंश की एक लंबी यात्रा की अगली कड़ी हैं।

रेवती नक्षत्र में शनि

इस बार एक और रोचक संयोग है। पितृपक्ष के अधिकांश समय वक्री शनि मीन राशि के रेवती नक्षत्र में रहेंगे। रेवती 27 नक्षत्रों में अंतिम नक्षत्र है, इसलिए ज्योतिषीय परंपरा में इसे यात्रा की पूर्णता, समापन और अगले चरण की ओर बढ़ने से जोड़ा जाता है। शनि 9 अक्टूबर की शाम रेवती से वक्री होकर उत्तराभाद्रपद में प्रवेश करेंगे, यानी सर्वपितृ अमावस्या से ठीक पहले यह परिवर्तन होगा।

यही इस पितृपक्ष को प्रतीकात्मक रूप से दिलचस्प बनाता है- जो अधूरा है, उसे स्वीकार करना; जो मिला है, उसके लिए कृतज्ञ होना और जिनकी वजह से हम यहां तक पहुंचे हैं, उन्हें स्मरण करना। अंतिम दिन, 10 अक्टूबर की सर्वपितृ अमावस्या स्वयं शनिवार को पड़ रही है, इसलिए यह शनिश्चरी अमावस्या भी होगी। पंचांग स्रोत 10 अक्टूबर को अमावस्या और शनिवार दोनों की पुष्टि करते हैं।

पितृपक्ष को केवल भय, 'पितृ दोष' या समस्याओं से जोड़कर देखना इसके भाव को बहुत छोटा कर देता है। इसका मूल भाव श्रद्धा है। अपने पूर्वजों को याद करना, उनके प्रति कृतज्ञ होना और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार श्राद्ध, तर्पण, दान, सेवा और प्रार्थना करना।

पितृपक्ष 2026: श्राद्ध की पूरी तारीखें 

26 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक, अपने जीवन में केवल आगे मत देखिए। एक बार पीछे भी देखिए, क्योंकि कई बार भविष्य की ओर सही तरीके से बढ़ने के लिए यह याद रखना जरूरी होता है कि हमारी जड़ें कहां हैं और हम यहां तक किन के कारण पहुंचे हैं?

26 सितंबर शनिवार को पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर रविवार को प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर सोमवार को द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर मंगलवार को तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर बुधवार को चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध
1 अक्टूबर गुरुवार को षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर शुक्रवार को सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर शनिवार को अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर रविवार को नवमी श्राद्ध
5 अक्टूबर सोमवार को दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर मंगलवार को एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर बुधवार को द्वादशी श्राद्ध और मघा श्राद्ध
8 अक्टूबर गुरुवार को त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर शुक्रवार को चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या

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