करवा चौथ का नाम सुनते ही सबसे पहले ध्यान उन महिलाओं पर जाता है, जो अपने पति की लंबी उम्र के लिए पूरे दिन भूखी-प्यासी रहकर व्रत रखती हैं। सुबह की सरगी से लेकर शाम की पूजा और फिर चांद देखकर व्रत खोलने तक, इस दिन की हर रस्म बहुत ही खास होती है, लेकिन अब समय के साथ करवा चौथ मनाने का अंदाज भी धीरे-धीरे बदल रहा है।
आजकल कई घरों में पति भी अपनी पत्नी के साथ पूरे दिन का व्रत रखने लगे हैं। कोई अपनी वाइफ का साथ देने के लिए ऐसा करता है, तो कोई अपना प्यार जताने के लिए। ऐसे में यह सोचना तो बनता है कि क्या करवा चौथ अब सिर्फ महिलाओं का त्योहार रह गया है? ऐसे में आइए जानते हैं कि बदलते जमाने के साथ करवा चाैथ मनाने का तरीका कैसे बदल रहा है?
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कैसे बदल रहा है करवा चौथ मनाने का तरीका?
करवा चौथ हिंदू धर्म में शादीशुदा महिलाओं के लिए खास त्योहार माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छी सेहत की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। हालांकि, अब इस त्योहार को मनाने में पति भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने लगे हैं। कई कपल ऐसे हैं, जो इस दिन साथ में पूजा करते हैं और एक-दूसरे के लिए व्रत रखते हैं। कुछ पति पूरे दिन अपनी पत्नी के साथ बिना खाए-पिए रहते हैं, जबकि कुछ पूजा की तैयारियों से लेकर व्रत खोलने तक हर काम में उनका साथ देते हैं।
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यह बदलाव हर घर में देखने को नहीं मिलता, लेकिन कई कपल के बीच यह तरीका पसंद किया जा रहा है। उनके लिए करवा चौथ सिर्फ एक रस्म नहीं बल्कि एक-दूसरे के प्रति प्यार और साथ दिखाने का मौका भी बन रहा है।
अब पति भी क्यों रखते हैं करवा चौथ का व्रत?
पहले करवा चौथ का व्रत महिलाएं ही रखती थीं। पति इस दिन पूजा की तैयारी में मदद करते थे और रात को चांद निकलने के बाद पत्नी का व्रत खुलवाते थे, लेकिन अब कई पति खुद भी व्रत रखने लगे हैं। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह एक-दूसरे का साथ देना है। जब पत्नी पूरे दिन अपने पति के लिए व्रत रखती है, तो कुछ पति भी चाहते हैं कि वह इस दिन अकेले भूखी न रहे। इसलिए वे भी उसके साथ व्रत रखते हैं।
कुछ कपल के लिए यह अपनी फीलिंग्स जाहिर करने का तरीका है। हालांकि, हर कपल की सोच अलग होती है। जरूरी नहीं कि हर पति व्रत रखे ही, क्योंकि प्यार और परवाह दिखाने के तरीके भी अलग-अलग हो सकते हैं।
करवा चौथ मनाने के तरीके में कैसे आया बदलाव?
आपको बता दें कि समय के साथ शादी और रिश्तों को देखने का नजरिया भी बदल गया है। आज कई पति-पत्नी घर और परिवार की जिम्मेदारियां मिलकर उठाते हैं। ऐसे में त्योहार मनाने का तरीका भी पहले से अलग होता जा रहा है। पहले करवा चौथ पर महिलाओं के व्रत रखने और पुरुषों के उनकी मदद करने का चलन ज्यादा आम था। अब कुछ कपल इस परंपरा को अपने तरीके से मनाना पसंद करते हैं। पति भी व्रत रखते हैं, पत्नी के साथ पूजा करते हैं और कई बार दोनों एक-दूसरे के लिए चांद देखकर व्रत खोलते हैं।
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सोशल मीडिया पर भी ऐसे कपल की तस्वीरें और वीडियो देखने को मिलती हैं, जिनमें पति-पत्नी साथ में करवा चौथ मनाते हुए नजर आते हैं।
करवा चौथ पर पति-पत्नी साथ में कैसे कर सकते हैं पूजा?
जो पति अपनी पत्नी के साथ करवा चौथ मनाना चाहते हैं, वे अपनी सुविधा और परिवार की परंपरा के हिसाब से पूजा में शामिल हो सकते हैं। पति चाहें तो पत्नी के साथ व्रत रख सकते हैं, पूजा की तैयारी कर सकते हैं और शाम को करवा चौथ की व्रत कथा सुन सकते हैं। इसके बाद चांद निकलने पर दोनों मिलकर पूजा करें और व्रत खोल सकते हैं। हालांकि, पति के लिए करवा चौथ का व्रत रखना जरूरी नहीं है। पारंपरिक रूप से यह व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छी सेहत की कामना के लिए रखती हैं।
करवा चौथ 2026: इस बार कब है व्रत?
साल 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर गुरुवार को रखा जा रहा है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छी सेहत की कामना करती हैं। शाम को पूजा के बाद चांद निकलने का इंतजार किया जाता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारियां सामाजिक मान्यताओं, प्रचलित ट्रेंड्स और धार्मिक कथाओं पर आधारित हैं। व्रत या उपवास से जुड़े किसी भी फैसले के लिए अपने डॉक्टर या ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।
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