भारत में वैसे तो त्योहारों की कोई कमी नहीं है, लेकिन नवरात्रि के दौरान गुजरात की रौनक ही कुछ अलग होती है। नौ दिनों तक चलने वाला यह उत्सव गुजरात में सिर्फ एक धार्मिक पूजा-पाठ नहीं बल्कि एक ग्रैंड सेलिब्रेशन हाेता है। यहां ढोल की थाप, संगीत की गूंज और रंग-बिरंगी चनिया-चोली में थिरकते लोग रातों की रौनक एकदम बढ़ा देते हैं। ऐसे में अगर आपने एक बार गुजरात की नवरात्रि का माहौल देख लिया, तो समझिए कि आपने त्योहार मनाने का सही और सबसे जोशीला अंदाज देख लिया।

ज‍िस तरह कोलकाता में दुर्गा पूजा की रौनक देखने लायक होती है, उसी तरह गुजरात की नवरात्र‍ि बहुत खास हाेती है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं क‍ि गुजरात में नवरात्र‍ि का सेल‍िब्रेशन कैसा होता है? गरबा के जोश से लेकर चन‍िया-चोली के रंग तक हम आपको सबकुछ बताएंगे।

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गरबा और डांडिया का द‍िखता है असली जोश

गुजरात में नवरात्रि की शाम होते ही पूरा राज्य संगीत और गरबा के माहौल में डूब जाता है। छोटे से लेकर बड़े शहरों में ग्राउंड्स सजते हैं, जहां हजारों लोग एक साथ गोल घेरा बनाकर गरबा करते हैं। कुछ मह‍िलाएं डांड‍िया भी खेलती हैं। इस दौरान मां जगदम्बा की मूर्ति या गर्बो यानी मिट्टी के दीपक को बीच में स्थापित किया जाता है और उसके चारों ओर थिरकते हुए गरबा की जाती है। इस मौके पर ढोल-नगाड़ों की गूंज और डांडिया की खनक के साथ रात भर चलने वाला यह डांस जोश से लोगों को भर देता है।

गुजरात में द‍िखेंगे चनिया-चोली और केडियूं के खूबसूरत रंग

गुजरात की नवरात्र‍ि में पहनावे का अपना एक अलग हीह क्रेज है। लड़कियां और महिलाएं कांच की कढ़ाई, बांधनी, आरी-वर्क और शीशों से डेकोरेट की गई हैवी चनिया चोली पहनती हैं। वहीं, लड़के पारंपरिक केडियूं यानी कढ़ाईदार कुर्ता और धोती में डैशिंग नजर आते हैं। इसके साथ ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर ज्वेलरी, कमरबंद और सिर पर पारंपरिक पगड़ी इस पूरे लुक में चार चांद लगा देती है। हर दिन के हिसाब से यहां पर अलग-अलग रंगों के आउटफिट्स का सेलेक्शन देखने को म‍िलता है।

क्‍या है गर्बो का धार्मिक महत्व?

आपको बता दें क‍ि केवल गरबा या डांड‍िया ही नहीं बल्कि गुजरात में नवरात्रि का धार्मिक महत्व भी बहुत है। इस दौरान मिट्टी के एक छोटे से घड़े में दीपक जलाकर रखा जाता है। इसे ही गर्बो कहा जाता है। यह जीवन और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। वडोदरा और अहमदाबाद जैसी जगहों पर होने वाली महाआरती का नजारा देखने लायक होता है। जब हजारों दीये एक साथ जगमगाते हैं तो मां दुर्गा की भक्ति में पूरा माहौल लीन हो जाता है।

देर रात तक लगे होते हैं फूड स्टॉल्स

जब कोई देर तक गरबा खेलता है तो इसके बाद भूख भी तेज लगती है। ऐसे में यहां पूरी रात फूड स्टॉल्स खुले रहते हैं। रात के 2-3 बजे भी स्ट्रीट फूड का मजा उठाया जा सकता है। फाफड़ा-जलेबी, खमण, ढोकला और गरमा-गरम चाय की दीवानगी तो देखने लायक होती है।

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गुजरात के नवरात्र‍ि की द‍िलचस्‍प बातें

अगर आप गुजरात की नवरात्र‍ि देखने का प्‍लान बना रही हैं, तो कुछ द‍िलचस्‍प बातें भी जान लें-

  • वडोदरा को गुजरात की गरबा कैपिटल माना जाता है। यहां यूनाइटेड वे जैसे ग्राउंड्स में एक साथ 30 हजार से भी ज्यादा लोग किसी बॉलीवुड गानों पर नहीं बल्कि केवल पारंपरिक लोक संगीत और ढोल की ताल पर गरबा करते हैं।
  • अहमदाबाद में मिट्टी के दीये या घड़े (गर्बो) की पूरे गुजरात में खास मांग होती है। इसमें किए गए बारीक छेद मां दुर्गा के दिव्य प्रकाश के फैलने का प्रतीक माने जाते हैं।
  • गुजरात में लोग नौ दिनों तक मां के नौ स्वरूपों के हिसाब से रंगों के कपड़े पहनते हैं। फ्रेंड्स और फैमिली ग्रुप्स अक्सर एक ही कलर के आउटफ‍िट्स में गरबा वेन्यू पहुंचते हैं।
  • गरबा खत्म होने के बाद देर रात 3 बजे सूरत और अहमदाबाद की सड़कों पर फाफड़ा, लोचो, घारी और गरमा-गरम चाय की दुकानें लगी होती हैं।

अगर आप भी ट्रेडिशनल वाइब्स और अनलिमिटेड मस्ती की शौकीन हैं, तो गुजरात की नवरात्रि का एक्सपीरिएंस आपको अपनी लाइफ में कम से कम एक बार जरूर लेना चाहिए। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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