हरियाली तीज उत्तर भारत के सबसे सुंदर और उल्लास से भरे त्योहारों में से एक है, जो मुख्य रूप से महिलाओं को समर्पित है। सावन के महीने में जब चारों तरफ प्रकृति अपनी हरी-भरी चादर ओढ़ लेती है, तब इस पर्व का आगमन होता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं। राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब तक, इस त्योहार को मनाने के तौर-तरीकों में क्षेत्रीय विविधता देखने को मिलती है, जो इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देती है। नीचे लेख में जानें इनके बारे में-
हरियाली तीज का पर्व क्यों मनाया जाता है?
हरियाली तीज का पर्व माता पार्वती और भगवान शिव का दिव्य मिलन का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए 107 जन्मों तक कठिन तपस्या की थी और 108वें जन्म में उन्हें भगवान शिव ने स्वीकार किया था। महिलाएं इस दिन अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए विशेष पूजा-अर्चना करती हैं।
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हरियाली तीज से जुड़ी 7 परंपराएं
हरियाली तीज के मौके पर अलग-अलग जगह पर भिन्न-भिन्न के रीति-रिवाज निभाए जाते हैं। इसी में से आज कुछ 7 ऐसी रिवाओं और परंपराओं के बारे में बताने जा रहे हैं।
1. सावन के झूले और पारंपरिक गीत (पूर्वांचल परंपरा)
उत्तर प्रदेश, खासकर पूर्वांचल और ब्रज क्षेत्र में सावन के महीने में झूलन उत्सव आयोजित होता है। इस दौरान मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को भी झूले पर झुलाया जाता है। महिलाएं पारंपरिक कजरी और सावन के गीत गाती हैं। इसके साथ यूपी में महिलाएं रेत से शिव-पार्वती की मूर्ति बनाकर उनकी विधिवत पूजा करती हैं और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
2. सिंजारा भेजने की रस्म (राजस्थानी परंपरा)
राजस्थान और हरियाणा में तीज से एक दिन पहले सिंजारा भेजने की परंपरा है। इसमें विवाहित बेटियों और नवविवाहित दुल्हनों के मायके से ससुराल पक्ष की ओर से कपड़े, आभूषण, श्रृंगार का सामान, मेहंदी और पारंपरिक मिठाइयां भेजी जाती हैं। जिन लड़कियों की नई-नई सगाई होती है, उन्हें भी ससुराल से यह भेंट भेजी जाती है।
3. शाही तीज माता की सवारी (जयपुर, राजस्थान परंपरा)
जयपुर में हरियाली तीज का पर्व बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। यहां तीज माता (माता पार्वती) की सवारी गाने-बाजे के साथ निकाली जाती है। पुराने जयपुर के त्रिपोलिया गेट से निकलने वाले इस शाही जुलूस में सजे-धजे हाथी, घोड़े, पारंपरिक बैंड और लोक कलाकार शामिल होते हैं, जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
4. पीहर जाने का आमंत्रण (उत्तर भारत की परंपरा)
उत्तर भारत की संस्कृति में यह परंपरा है कि तीज के अवसर पर नवविवाहिता को उसकी ससुराल से मायके बुला लिया जाता है। महिलाएं अपना पहला या शुरुआती सावन अपने परिवार, भाई और माता-पिता के साथ बिताती हैं, जहां उन्हें विशेष रूप से तैयार किए गए पकवान और आशीर्वाद मिलते हैं।
5. कोथली देने की रस्म (हरियाणा की परंपरा)
हरियाणा में हरियाली तीज को बड़े उल्लास से मनाया जाता है। यहां मायके से बेटी के घर कोथली भेजी जाती है, जिसमें कपड़े और मिठाइयां होती हैं। इसके अलावा, सास को बायना देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। हालांकि अब यह रिवाज हर जगह पर निभाया जाता है।
6. सोलह श्रृंगार और हाथों में गहरी मेहंदी रचाना (पूरे उत्तर भारत में)
हरियाली तीज के दिन सुहागिनें और कुंवारी कन्याएं हरे रंग के कपड़े, हरी या लाल चूड़ियां पहनती हैं। साथ ही हाथों व पैरों में मेहंदी लगाती हैं। ऐसा कहा जाता है कि हरा रंग प्रकृति, हरियाली और सुहाग का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सोलह श्रृंगार करने से माता पार्वती और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
7. नीमड़ी की विशेष पूजा (राजस्थान की परंपरा)
राजस्थान में हरियाली तीज के दिन नीमड़ी (नीम के पेड़) की पूजा करने की अनूठी परंपरा है। महिलाएं नीम के पेड़ की पूजा कर कथा सुनती हैं और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। इसके साथ ही राजस्थानी महिलाएं पारंपरिक लोकगीत जैसे सावणीय री कजली तीज और विशेष श्रृंगार के गीत गाकर इस पर्व को मनाती हैं।
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हालांकि,वर्तमान में हर एक रस्म और परंपराएं हर जगह होने लगी है। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Image Credit- magnific/AI
