Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज पर पहली बार मायके क्यों जाते हैं? जानिए इसका कारण

सनातन संस्कृति में त्योहारों का संबंध केवल धार्मिक अनुष्ठानों को नहीं दर्शाता, बल्कि ये परंपराएं रिश्तों की गर्माहट और अपनों के प्रति प्रेम को भी समर्पित हैं। सावन महीने में आने वाली शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पावन पर्व मनाया जाता है, जो सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद ही खास होता है। इस दिन चारों ओर हरियाली और उत्सव का माहौल रहता है। नवविवाहित महिलाओं के लिए शादी के बाद की पहली हरियाली तीज का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि पहली तीज ससुराल के बजाय मायके में मनाई जाती है। ऐसे में यह जानना तो बनता है कि इस खास रिवाज के पीछे कौन से धार्मिक और सामाजिक कारण छिपे हैं। जानते हैं आगे...
पहली हरियाली तीज पर क्यों जाते हैं मायके?
भारतीय समाज में बेटी का मायका न केवल उसके बचपन की सुनहरी यादों को दर्शाता है, बल्कि असीम दुलार और सुकून का केंद्र होता है। विवाह के पश्चात जब कोई लड़की नए परिवेश और नए परिवार में कदम रखती है, तो उसे शुरुआती दिनों में तालमेल बिठाने में थोड़ा समय लगता है। सावन का महीना प्रकृति में नए जीवन और हरियाली का प्रतीक माना जाता है।

ऐसे सुहावने मौसम में नवविवाहिता को मायके की कमी न खले और वह अपने बचपन के सहेलियों व परिजनों के साथ खुशियां बांट सके, इसीलिए पहली तीज पर उसे मायके बुलाने की प्रथा चली आ रही है।
धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं
इससे जुड़ी दो कथाएं भी हैं, जो बेटी के मायके जाने और पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखने की इस परंपरा पर रोशनी डालती हैं-
भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की गाथा
हरियाली तीज का पर्व मुख्य रूप से देवों के देव महादेव और जगजननी माता पार्वती के पवित्र मिलन की याद में मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए 108 जन्मों तक कठोर तपस्या की थी। सावन महीने की शुक्ल तृतीया के दिन ही भोलेनाथ ने माता पार्वती की निश्छल भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।
इसी वजह से शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी दाम्पत्य और अखंड सौभाग्य के लिए इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा और योग्य वर पाने की कामना से यह व्रत रखती हैं।
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राधा-कृष्ण का झूलन महोत्सव और बरसाना की परंपरा
ब्रज क्षेत्र में भी हरियाली तीज का पर्व बेहद ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन के इस पावन अवसर पर श्री राधा रानी अपनी ससुराल नंदगांव से अपने मायके बरसाना आती हैं। बरसाना में राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण के झूलन महोत्सव की अद्भुत छटा देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राधा रानी के मायके आगमन की इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज भी बेटियां अपनी पहली हरियाली तीज पर पिता के घर आती हैं और झूला झूलकर खुशियां मनाती हैं।

निष्कर्ष
हरियाली तीज का पर्व आस्था, सौंदर्य और अटूट प्रेम का संगम है। पहली तीज पर नवविवाहिता का मायके जाना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा का वह सुंदर पहलू है जो बेटी को यह अहसास कराता है कि शादी के बाद भी मायके में उसका स्थान और प्यार पहले जैसा ही बना रहता है।
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