भविष्य के लिए जब भी बचत की बात की जाती है तो अकसर लोग यही सोचते हैं कि कल की चिंता में अपना आज खराब क्यों करना? ...लेकिन खर्च के मामले में अपनाई गई थोड़ी-सी सूझबूझ आपको कई तरह की आर्थिक परेशानियों से बचा सकती है। पैसे खत्म होने के बाद पछताने से बेहतर यही होगा कि पारिवारिक बजट बनाते समय अनावश्यक खर्च को शुरू से ही नियंत्रित किया जाए। इस मसले पर हमने वित्तीय सलाहकार बलवंत जैन से बातचीत की और जानें मनी मनी मैनेजमेंट के आसान टिप्‍स। 

शामिल करें सबको

परिवार के सभी सदस्यों की ज़रूरतें अलग होती हैं। इसलिए बजट बनाने की प्रक्रिया में पति-पत्नी के साथ बच्चों (अगर बड़े हों तो) और बुज़ुर्गों को भी शामिल करना चाहिए। सभी के सुझाव आपके लिए अहमियत रखते हैं। जब लोगों को पहले से यह बात मालूम हो जाएगी कि किन ख़र्चों में कटौती की जा रही है तो वे अनावश्यक वस्तुओं की मांग नहीं करेंगे।

किस्तों में भुगतान से बचें

अकसर ईएमआइ का प्रलोभन लोगों को आकर्षित करता है। इसके लालच में लोग अपने घर के लिए वैसी महंगी चीज़ें भी खरीद कर ले आते हैं जो उनके लिए ज़रूरी नहीं होतीं। भले ही कोई कंपनी बिना किसी ब्याज के सामान बेचने का दावा करे, पर लोगों को मालूम नहीं होता वे पहले ही उस वस्तु की कीमत बढ़ा कर रखती हैं। लोग यह सोचकर खुश होते हैं कि कंपनी उनसे कोई ब्याज नहीं ले रही है, पर उन्हें ज्य़ादा कीमत पर चीज़ें खरीदनी पड़ती हैं। समझदारी इसी में है कि जब तक अति आवश्यक न हो ईएमआई पर चीज़ें न खरीदें और सोच-समझकर खर्च करें। भविष्य की खरीदारी को ध्यान में रखते हुए अपने खर्च में कटौती करें। जब आपके बैक अकाउंट में पर्याप्त पैसे जमा हो जाएं, तभी आप अपनी मनपसंद वस्तु खऱीदें। जहां तक संभव हो क्रेडिट कार्ड के बजाय डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करें। अगर क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करती हैं तो निर्धारित समय पहले बकाया राशि का भुगतान करना न भूलें।

इरादे पर डटे रहें

बजट बनाते समय आप अपने मासिक खर्च की अधिकतम सीमा निर्धारित करें और पूरे महीने इस बात का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है कि किसी भी हाल में आप उस निर्धारित सीमा से ज्य़ादा खर्च नहीं करेंगे। जब यह लक्ष्य हासिल हो जाए तो भविष्य में भी यही तरीका अपनाएं। आप अपने लिए किसी बड़े टारगेट का चुनाव कर सकते हैं। ऐसी छोटी बचत के लिए बैंक में आरडी(रिकरिंग डिपॉजि़ट)अकाउंट खोलना भी फायदेमंद रहता है। यह व्यक्ति के सेविंग अकाउंट से जुड़ा होता है और प्रतिमाह आपके द्वारा तय की गई तिथि को आपके सेविंग अकाउंट से आरडी में अपने आप आपका फंड ट्रांस्फर हो जाता है और अच्छा ब्याज भी मिल जाता है और अवधि पूरी होने के बाद वह पैसा अपने आप आपके सेविंग अकाउंट में वापस चला आता है। फिर आप चाहें तो उससे कोई महंगा समान खरीदें या किसी दूसरे बड़े प्लैन में निवेश कर सकती हैं।

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आप हैं घर की वित्त मंत्री

आप अपने परिवार की फाइनेंस मिनिस्टर हैं और परिवार की ज़रूरतों को आपसे बेहतर कोई दूसरा नहीं समझ सकता। इसलिए यह ज़रूरी नहीं है कि घर का बजट बनाने के लिए हमेशा फाइनेंशियल एक्सपर्ट से सलाह ली जाए। आप खुद भी अपने परिवार का बजट बना सकती हैं। हां, इस दौरान अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो आपके लिए बजट बनाना आसान हो जाएगा :

  • सबसे पहले छोटे हिस्सों में होने वाले खर्च की एक संक्षिप्त सूची बनाएं। मसलन महीने के राशन के अलावा फल-सब्ज़ी, दूध, खर्च की एक सूची बना लें।
  • अब आप उन मदों की सूची बनाएं जहां आपको पैसे का भुगतान करना है। मसलन, बिजली बिल, होम या कार लोन की किस्तें, बच्चों की स्कूल और ट्यूशन फीस, टीवी ब्रॉडबैंड कनेक्शन, इंटरनेट और फोन का बिल, घरेलू सहायकों का वेतन आदि। फिर इस सारे ख़्ार्च को जोड़ लें। इससे महीने की शुरुआत में ही आपको यह जानने में आसानी होगी कि आपको इस महीने अपनी आय का यह निश्चित हिस्सा हर हाल खर्च होगा ही।
  • वैसी आकस्मिक ज़रूरतों की एक सूची ज़रूर बनाएं, जिन पर बीच में कभी भी खर्च करना पड़ता है। मसलन, मामूली बीमारियों के दौरान डॉक्टर की फीस और दवाओं, मेहमानों, घर और कार से जुड़ी छोटी-छोटी मरम्मत पर होने वाला व्यय। मान लीजिए पूरे साल में अनुमानित रूप से होने वाले इस ख़्ार्च की कुल राशि 60,000 है तो इसमें 12 हिस्सों में बांट दें और हर महीने के बजट में से 5,000 रुपये ऐसे आकस्मिक खर्चों के लिए रखें। ध्यान रहे, इसका इस्तेमाल किसी भी दूसरे मद में नहीं होना चाहिए। अगर किसी महीने कोई आकस्मिक ज़रूरत नहीं आई तो भी इस राशि को भविष्य के लिए अलग से सुरक्षित रखें।
  • अपनी मासिक आय में से प्रतिमाह कम से कम 5 प्रतिशत तक बचत ज़रूर करें और साल के अंत में इस राशि को किसी अच्छे प्लैन में निवेश करें। निवेश के दौरान इस बात का भी पूरा ध्यान रखें कि उसका लॉकइन पीरियड बहुत लंबा न हो, ताकि किसी आकस्मिक स्थिति में वहां बिना किसी नुकसान के अपनी जमा राशि वापस निकालकर उसका सदुपयोग कर सकें।
  • अगर महीने के अंत में आपको ऐसा लगता है कि आपसे ज्य़ादा खर्च हो गया है तो फिर अगले महीने कुछ गैर ज़रूरी खर्चों मेें कटौती करके उस नुकसान की भरपाई कर लें।
 

हर कदम पर बचत

हमें बचत के व्यापक अर्थ को समझना चाहिए। इसका मतलब केवल पैसों कीसेविंग से नहीं है बल्कि हमें हर कदम पर बचत करनी चाहिए। पानी, बिजली और पेट्रॉल जैसे आवश्यक संसाधनों की बचत के अलावा घर और किचन में भी इस बात का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है कि आवश्यक वस्तुओं की बर्बादी न हो। इसके लिए इन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखें :

  • घर के लिए कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदते समय उसकी स्टार रेटिंग ज़रूर देखें। 5 स्टार रेटिंग वाले उपकरण सबसे ज्य़ादा बिजली बचाते हैं।
  • दो-चार कपड़ों के लिए बार-बार वाशिंग मशीन चलाने के बजाय अपनी ज़रूरत मुताबिक फुल लोड पर एक ही बार मशीन चलाएं। इससे पानी, बिजली और डिटर्जेंट के साथ समय की भी बचत होती है।
  • ज़रूरत न होने पर घर के सभी विद्युत उपकरणों का स्विच ऑफ रखें।
  • कुकिंग के दौरान ईंधन की बचत के लिए दाल-चावल जैसी चीज़ें पकाने से दो-तीन घंटे पहले भिगोकर रखें, जहां तक संभव हो प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करें और खाना हमेशा ढक कर पकाएं। खाना हमेशा इस अंदाज़ से बनाएं कि बचा हुआ हुआ भोजन बर्बाद न हो।
  • ऑफिस जाने के लिए कार पूलिंग व्यवस्था भी आपके लिए पेट्रॉल की बचत में मददगार होती है।
  • हर संडे बाहर खाने जाने के बजाय कभी घर भी कुछ अच्छा बनाएं और परिवार के साथ मिलकर क्वॉलिटी टाइम एंजॉय करें।
  • महीने भर की आवश्यक चीज़ों की शॉपिंग के दौरान गैर-ज़रूरी चीज़ें खरीदने से बचें। एक साथ एक फ्री का ऑफर होने पर कोई वस्तु तभी खरीदें, जब वाकई आपको उसकी ज़रूरत हो।
  • बजट बनाते समय अगर आप इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगी तो महीने के अंत में सारे पैसे खत्म होने की चिंता से पूरी तरह मुक्त रहेंगी।

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