आजकल पंजाबी गाने का क्रेज कुछ ज्‍यादा ही बढ़ गया है। क‍िसी की शादी हो, दोस्‍त की पार्टी हो या फि‍र सोशल मीड‍िया की रील ही क्‍यों न हो, हर जगह पंजाबी गाने सुनाई दे ही जाते हैं। इन्‍हीं में से एक गाना 'बाजरे दा सि‍ट्टा' है। इस गाने को आपने इंस्‍टाग्राम पर रील में सुना होगा, लेक‍िन क्‍या आप जानती हैं क‍ि यह एक पंजाबी लोकगी‍त है? जी हां, इस लोकगीत में पंजाब के गांवों की पुरानी ज‍िंदगी, खेती के काम और र‍िश्‍ताें की प्‍यारी सी तकरार भी छ‍िपी हुई है।

इसकी सबसे फेमस लाइन में बाजरे की बाली और हथेली का ज‍िक्र होता है। यह लाइनें आपको भले ही नॉर्मल लगती हों, लेक‍िन जब आप इनका मतलब समझेंगी तो पता लगेगा क‍ि इस लोकगीत में प्‍यार और रूठने-मनाने की बात क‍ितने द‍िलचस्‍प तरीके से कही गई है। आइए इसके बारे में व‍िस्‍तार से जानते हैं-

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क्या होता है 'बाजरे दा सिट्टा'?

सबसे पहले ताे यह जान लेते हैं क‍ि बाजरे दा स‍िट्टा का मतलब क्‍या होता है? आपको बता दें क‍ि पुराने समय में फसल के दौरान मह‍िलाएं अपने हाथों से अनाज को अलग करती थीं। रोजाना के इसी काम से इस गाने की यह लाइन जुड़ी हुई है।

गीत की जो फेमस पंक्‍त‍ि है 'बाजरे दा स‍िट्टा, वे असां तल्‍ली ते मरोड़या', उसमें 'स‍िट्टा' बाजरे की बाली और 'तल्‍ली' का इस्‍तेमाल हथेली यानी हाथ के ल‍िए क‍िया गया है। यानी इसमें बताया गया है क‍ि बाजरे की बाली को हाथ पर रखकर मरोड़ा गया है, ताक‍ि उसके दाने अलग हो जाएं।

प्‍यार और तकरार की आती है बात

इस लोकगीत की अगली लाइन कहानी को खेती से न‍िकालकर प्‍यार तक ले जाती है। इसमें अपने प्‍यार के रूठकर जाने और उसे वापस मनाने का जि‍क्र क‍िया गया है। जब आप 'रुठड़ा जांदा माह‍िया, वे असां गली व‍िचों मोड़ेया' लाइन को ध्‍यान से सुनेंगी तो मतलब समझ आएगा कि‍ इसमें प्रेमी नाराज होकर जा रहा था, लेक‍िन गली में ही मनाकर राेक लि‍या गया।

बाजरे की बाली को हाथों से मसलकर दाने निकालने की मेहनत और रूठे हुए पार्टनर को मनाने का तरीका बिल्कुल एक जैसा है। जैसे बाजरे को छिलके से अलग करने के लिए थोड़ा जोर लगाना पड़ता है, वैसे ही प्यार के रिश्ते में थोड़ी-बहुत नोंकझोंक और कोशिश तो चलती ही रहती है।

महिलाओं की बैठकी में गूंजता था गीत

बताया जाता है क‍ि पंजाब के गांवों मंं मह‍िलाएं एक साथ बैठती थीं, तो ऐसे ही लोकगीत गाए जाते थे। चाहे कोई गैदर‍िंग हो या कोई फंक्‍शन, ढोलक बजाकर ऐसे ही लोकगीत गाए जाते थे।

अब रील में सुनाई देती है यह लोकगीत

आज के समय में आपको यह गाना इंस्‍टाग्राम या यूट्यूब पर रील में सुनाई दि‍या होगा। साल 2021 में जब इसका रीम‍िक्‍स वर्जन आया था तो यह खूब वायरल हुआ था।

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