एक जमाना ऐसा भी था, जब हिंदी फिल्मों में कुल पांच-सात सिचुएशन होती थीं, जिन्हें ध्यान में रखकर ही कुछ गीत या भावपूर्ण दृश्य लिखे जाते थे। राज कपूर, यश चोपड़ा, सूरज बड़जात्या और करण जौहर जैसे सफल निर्देशकों की फिल्मों में इस मौसम से संबंधित कई गाने, एक्शन और इमोशनल सीन्स फिल्माए गए हैं। हालांकि, अब नयी फिल्मों में सावन के झूले कम ही नजर आते हैं। भले ही आजकल बरसात पर गाने उतनी बड़ी तादाद में नहीं बनते, लेकिन अब भी इस मौसम का जादू फिल्मों से पूरी तरह गायब नहीं हुआ है।
आसान नहीं होती शूटिंग
साल 1979 में रिलीज हुई अमिताभ बच्चन की फिल्म 'मंजिल' का गाना 'रिम झिम गिरे सावन' मुंबई की सड़कों पर शूट किया गया था। बताया जाता है कि उस गाने को शूट करने के लिए फिल्म निर्माताओं ने कई दिनों तक बारिश का इंतजार किया था। फिल्म 'तुम्बाड' के अभिनेता और सह-निर्माता सोहम शाह कहते हैं, "इस फिल्म में लैंडस्केप और बादलों के दृश्य वास्तविक दिखाने के लिए हमने इसे मानसून में शूट किया था।"
दृश्य बढ़ा देते हैं बजट
निर्देशक कुणाल कोहली की दोनों ही फिल्मों 'फना' और 'हम तुम' में बरसात की सिचुएशन बनाई गई थी। इसके बारे में कुणाल कहते हैं कि वह निर्देशक नहीं बने थे, तभी सोच लिया था कि जब भी निर्देशक बनेंगे, तो बरसात के दृश्य उनकी फिल्मों में जरूर होंगे। किसी कलाकार को ऐसी असहजता के साथ स्क्रीन पर रोमांटिक दिखाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का भी बहुत ध्यान रखना पड़ता है, ताकि किसी को करंट न लगे और कैमरा पानी में सुरक्षित रहे।
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जीना पड़ता है मौसम को
फिल्मी बारिश के बारे में गीतकार समीर कहते हैं कि अगर उन्हें बरसात से संबंधित पांच हजार गाने लिखने हों, तो भी कोई दिक्कत नहीं होगी, क्योंकि वह सावन के माहौल को जी चुके हैं। उनके गांव में लड़कियां अक्सर इससे जुड़े लोकगीत गाती थीं, वह दृश्य आज भी उनकी आंखों में बसा है। अब तो यह सब खुलेआम होता है, इसलिए मौसम, त्योहारों और रिश्तों की बातें कम हो रही हैं। साहिर लुधियानवी का वह गीत 'जिंदगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात' का चित्रण भी बहुत सुंदर था।
बच्चा बन जाता हूं मैं: जुबिन नौटियाल (गायक)
बरसात में बैठकर गाना रिकॉर्ड करना मेरे लिए बहुत खास होता है। चाहे खुशनुमा जश्न के गाने हों या दुख भरे गीत, बारिश हर माहौल के साथ बहुत आसानी से घुल-मिल जाती है। बारिश से जुड़े गाने सुनने वाले पहले भी थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे। बरसात पर पहले भी फिल्मों में बहुत प्रयोग किया गया है और आगे भी होता रहेगा।
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अब प्रमोट नहीं होते गाने: तनिष्क बागची (संगीतकार)
हर दौर के गानों में बारिश और रोमांस को एक साथ जोड़ा गया है। सावन के महीने में जो जोड़े एक-दूसरे के साथ रहते हैं, उनके लिए तो यह रोमांटिक मौसम होता है, लेकिन जो अपने साथी से दूर हैं, उन्हें भी उनकी याद आने लगती है। ऐसा नहीं है कि आज की फिल्मों में बारिश पर कम गाने बनते हैं। मैं खुद कई फिल्मों के लिए बरसात के गाने बना चुका हूं, लेकिन उनकी जगह पर डांस नंबर्स को प्रमोट किया जाता है।
मुंबई ब्यूरो - प्रियंका सिंह और दीपेश पांडे
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