वर्क फ्रॉम होल का कल्चर पुराना हो गया है, लेकिन लोगों को अब तक इसकी आदत नहीं हुई है, तभी उनकी मसल्‍स हमेशा अकड़ी रहती हैं और बदन में दर्द रहता है। कई लोग तो ऐसा कहते हैं जैसे ये दर्द उनके लिए स्थायी हो गया है और इसके साथ ही जीने की आदत बन गई है। हालांकि, यह बिल्कुल सही नहीं है।

वर्क फ्रॉम होम में कमर और कंधे के दर्द से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें

एक्सपर्ट के मुताबिक ऐसे लोगों को न केवल अपने रोजाना के काम के तरीके, लाइफस्टाइल में बदलाव लाने की जरूरत है बल्कि छोटी-छोटी आदतों को दिनचर्या में शुमार करने की आवश्यकता है। वरना बढ़ती उम्र में बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

एर्गोनोमिक कुर्सी है जरूरी

वर्क फ्रॉम होम के दौरान कई लोग प्लास्टिक की कुर्सी, डाइनिंग टेबल या फिर बिस्तर पर बैठकर काम करते हैं, तो कई लोग ऐसे भी हैं जो जमीन पर बैठकर घंटों काम करते हैं। इनमें से बैठने का कोई भी तरीका सही नहीं है क्योंकि इससे शरीर के हर हिस्सों पर दबाव पड़ता है और पोश्चर गलत होता है। जिसकी वजह से पीठ, कमर और यहां तक की हाथों में भी दर्द होने लगता है। धीरे-धीरे यह दर्द उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाता है। दरअसल, मनुष्यों की रीढ़ लंबे समय तक बैठने की मुद्रा को बनाए रखने में सक्षम नहीं होती है। इन सभी का एक बेहतरीन उपाय है एर्गोनोमिक की कुर्सियां। यह कुर्सी इस ढंग से बनी है जिसमें आपकी रीढ़ अपने आकार के हिसाब से सही रहती है, उसमें किसी तरह का दबाव नहीं आता।

फॉरवर्ड स्टूप का नुकसान

लैपटॉप हैंडी होने के कारण लोग इसे गोद में लेकर भी काम करते हैं, इस मुद्रा को ‘फॉरवर्ड स्टूप’ कहते हैं। लंबे समय तक इस अवस्था में बैठने पर वर्टिब्रल डिस्क पर दबाव दो गुना से अधिक बढ़ जाता है। यह मसल्‍स में दर्द और हाथों में खिंचाव होने लगता है।

कैसे बदलें अपनी आदतें?

एडजस्टेबल स्टैंडिंग डेस्क बहुत मददगार होते हैं, क्योंकि इससे बैठना और खड़े होना दोनों आरामदायक हो जाता है।

  • काम के दौरान 45 मिनट के अंतराल में एक बार उठकर आस-पास थोड़ा टहल लेना चाहिए।
  • आंखों को लैपटाप की समान दूरी पर रखें, इससे हाथ और आंख दोनों में दर्द नहीं होगा।
  • एक घंटे के अंदर खड़े होकर ताड़ासन या फिर छोटी-छोटी स्ट्रेचिंग जरूर करें। इससे शरीर की हड्डियां लचीली रहेंगी।
  • जो लोग अधिक समय तक बैठे रहते हैं, उन्हें भोजन के बाद 100 कदम चलना चाहिए, इससे खाना पचने में मदद होती है।

ऑर्थोपेडिक सर्जन, नोएडा के डॉ.अमित कुमार अग्रवाल बताते हैं कि कई लोग दर्द होते ही पेनकिलर खा लेते हैं, लेकिन ऐसे दर्द में पेनकिलर कोई स्थायी समाधान नहीं है बल्कि छोटी-छोटी आदतों से आप वर्क फ्रॉम होम को आसान बना सकते हैं। जैसे लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे न रहें, चेयर में एक लोवर बैक सपोर्ट या कुशन लगाकर बैठें। रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। बीच-बीच में एक ब्रेक लें, रोजाना सुबह वॉकिंग या एक्‍सरसाइज करें। संतुलित आहार लें, जिससे वजन न बढ़े। हां, अगर ये सब करने के बावजूद दर्द बरकरार रहता है या फिर हाथ पैरों में सुनापन लगता है तो डॉक्टर से सलाह करें।

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लेखक- सुमन अग्रवाल

Images: magnific